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आजादी दिलाने में अहिंसा और क्रांति दोनों की अहम भूमिका : उपमुख्यमंत्री
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बलिया। आजादी की लड़ाई में एक तरफ अहिंसा का आंदोलन चल रहा था, दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में क्रांतिकारी ब्रितानी हुकूमत से लोहा लेने में जुटे थे। आजादी दिलाने में अहिंसा और क्रांति दोनों की अहम भूमिका है। 1942 में मुंबई में आजादी के दीवाने इकट्ठा हुए। उसी दौरान गांधी जी, सरदार बल्लभ भाई पटेल सहित अन्य को गिरफ्तार कर लिया।
गांधीजी ने करो या मरो का नारा दिया, जिसे बलिया के लोगों ने हृदय से लिया। नौ से 19 अगस्त के बीच जिले के कोने-कोने में आजादी के मतवालों ने सरकारी संस्थानों पर कब्जा कर न सिर्फ तिरंगा लहराया बल्कि स्वघोषित सरकार भी बना डाली। इसकी गूंज लंदन तक पहुंच गई थी। बलिया का मतलब है स्वाभिमानी, सम्मान से जीने वाले लोग, ये भृगु बाबा और पूर्व पीएम चंद्रशेखर की धरती है। बलिया की धरा से निकली आवाज पूरे भारत वर्ष में जाएगी। स्वतंत्रता व अमर सेनानियों के सपने को पूरा करने के लिए हमें पीएम की अगुवाई में मुहिम चलानी चाहिए, उसकी शुरुआत बलिया की धरती से हो।
उक्त बातें प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शनिवार को बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही। 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। हर वर्ष की तरह परम्परा के अनुरूप प्रतीकात्मक तौर पर सेनानियों के साथ जेल में गए, फिर जेल का फाटक खुला और सभी सेनानी बाहर निकले। इस दौरान ‘भारत माता की जय‘ और वंदेमॉतरम के उद्घोष से पूरा जेल परिसर गूंज उठा। जेल से बाहर निकलने के बाद डिप्टी सीएम श्री पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत अन्य अतिथियों के साथ सेनानी राजकुमार ‘बाघ‘ की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर नमन किया। शहीदों के परिजनों को सरकार की ओर मिली सहायता राशि का प्रतीकात्मक चेक वितरित किया गया। पुलिस लाइन के परेड ग्राउण्ड में जनसभा हुई। जनसभा में डिप्टी सीएम ने कहा कि बलिया साधारण धरती नहीं है। अंग्रेजों को यहां के क्रांतिकारियों के आगे झुकना पड़ा। परिहवन मंत्री दयाशंकर सिंह की ओर से जिले के एकमात्र जीवित सेनानी रामविचार पाण्डेय को चार पहिया वाहन तथा 75 सेनानी परिजनों को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। डिप्टी सीएम ने सभी के हाथ में चाबियां सौंपी। उन्होंने परिवहन मंत्री की इस पहल की सराहना की। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया के लिए आज का दिन गौरवन्वित करने वाला है। हमारे बलिदानियों ने जो त्याग बलिदान किया है, उसी वजह से खुले में हम सांस ले रहे हैं। अगले वर्ष यह कार्यक्रम 9 अगस्त से ही शुरू होगा। प्रतिदिन शहीद स्थलों पर अलग-अलग कार्यक्रम होंगे और 19 अगस्त को भव्य समापन समारोह होगा।
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गांधीजी ने करो या मरो का नारा दिया, जिसे बलिया के लोगों ने हृदय से लिया। नौ से 19 अगस्त के बीच जिले के कोने-कोने में आजादी के मतवालों ने सरकारी संस्थानों पर कब्जा कर न सिर्फ तिरंगा लहराया बल्कि स्वघोषित सरकार भी बना डाली। इसकी गूंज लंदन तक पहुंच गई थी। बलिया का मतलब है स्वाभिमानी, सम्मान से जीने वाले लोग, ये भृगु बाबा और पूर्व पीएम चंद्रशेखर की धरती है। बलिया की धरा से निकली आवाज पूरे भारत वर्ष में जाएगी। स्वतंत्रता व अमर सेनानियों के सपने को पूरा करने के लिए हमें पीएम की अगुवाई में मुहिम चलानी चाहिए, उसकी शुरुआत बलिया की धरती से हो।
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उक्त बातें प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शनिवार को बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही। 19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। हर वर्ष की तरह परम्परा के अनुरूप प्रतीकात्मक तौर पर सेनानियों के साथ जेल में गए, फिर जेल का फाटक खुला और सभी सेनानी बाहर निकले। इस दौरान ‘भारत माता की जय‘ और वंदेमॉतरम के उद्घोष से पूरा जेल परिसर गूंज उठा। जेल से बाहर निकलने के बाद डिप्टी सीएम श्री पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत अन्य अतिथियों के साथ सेनानी राजकुमार ‘बाघ‘ की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर नमन किया। शहीदों के परिजनों को सरकार की ओर मिली सहायता राशि का प्रतीकात्मक चेक वितरित किया गया। पुलिस लाइन के परेड ग्राउण्ड में जनसभा हुई। जनसभा में डिप्टी सीएम ने कहा कि बलिया साधारण धरती नहीं है। अंग्रेजों को यहां के क्रांतिकारियों के आगे झुकना पड़ा। परिहवन मंत्री दयाशंकर सिंह की ओर से जिले के एकमात्र जीवित सेनानी रामविचार पाण्डेय को चार पहिया वाहन तथा 75 सेनानी परिजनों को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। डिप्टी सीएम ने सभी के हाथ में चाबियां सौंपी। उन्होंने परिवहन मंत्री की इस पहल की सराहना की। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया के लिए आज का दिन गौरवन्वित करने वाला है। हमारे बलिदानियों ने जो त्याग बलिदान किया है, उसी वजह से खुले में हम सांस ले रहे हैं। अगले वर्ष यह कार्यक्रम 9 अगस्त से ही शुरू होगा। प्रतिदिन शहीद स्थलों पर अलग-अलग कार्यक्रम होंगे और 19 अगस्त को भव्य समापन समारोह होगा।
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