{"_id":"6183c21f17d42d499a204082","slug":"nandi-village-will-be-held-in-dadri-fair-from-today-ballia-news-vns6209572192","type":"story","status":"publish","title_hn":"ददरी मेले में आज से लगेगा नंदी ग्राम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ददरी मेले में आज से लगेगा नंदी ग्राम
विज्ञापन
बलिया। कोरोना की मार के करीब दो वर्ष बाद शुक्रवार से ददरी मेला का नंदीग्राम पूरी रौ में दिखेगा। इसके लिए, नगर पालिका की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सड़कों पर पैचिंग के साथ ही पशु व्यापारियों के लिए जरूरी बंदोबस्त भी पूरे कर लिए गए हैं। दीपावली बाद पांच नवंबर से पशु मेले के नंदी ग्राम में पशु उतरने लगेंगे।
शहर के काशीपुर के पास मेला के लिए 120 काश्तकारों से 129.29 एकड़ भूमि ली गई है। बता दें कि ददरी मेले का आयोजन दो भाग में होता है। पहले पशु मेला और फिर कार्तिक पूर्णिमा के दिन से मीना बाजार के नाम से आम लोगों के लिए मेला का आयोजन होता है। मेला की ऐतिहासिकता में दंगल और चेतक प्रतियोगिता से लेकर ददरी महोत्सव और संत समागम चार चांद लगाते हैं। वैसे तो दीपावली के अगले दिन से ही मेला अपने अस्तित्व में आ जाता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद से मेले की रौनक बढ़ जाती है। भारतेंदु कला मंच पर आने के लिए साहित्य व कला जगत की नामी गिरामी हस्तियां लालायित रहती हैं। इसका प्रमुख कारण मंच पर पर आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन और मुशायरा है।
ददरी मेले में आयोजित होने वाले कार्यक्रम
शुक्रवार से शुरू होकर 13 दिसंबर तक चलने वाले ददरी मेले में कार्तिक पूर्णिमा के बाद 19 नवंबर से मीना बाजार शुरू हो जाएगा। इसमें 24 नवंबर को चेतक प्रतियोगिता, 27 को दंगल, 28 से संत समागम होगा। 30 को कव्वाली का आयोजन होगा। 28 से 30 नवंबर तक मेला के क्रीड़ांगन में खेलकूद होगा। दो दिसंबर को मुशायरा, पांच को कवि सम्मेलन और 11 दिसंबर को ददरी महोत्सव का वृहद कार्यक्रम होगा। समापन 13 दिसंबर को किया जाएगा।
विज्ञापन
पशु मेला की जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेला में आने वाले पशु व्यापारियों को पूरी सहूलियत और आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ नगर पालिका, बलिया
विज्ञापन
शहर के काशीपुर के पास मेला के लिए 120 काश्तकारों से 129.29 एकड़ भूमि ली गई है। बता दें कि ददरी मेले का आयोजन दो भाग में होता है। पहले पशु मेला और फिर कार्तिक पूर्णिमा के दिन से मीना बाजार के नाम से आम लोगों के लिए मेला का आयोजन होता है। मेला की ऐतिहासिकता में दंगल और चेतक प्रतियोगिता से लेकर ददरी महोत्सव और संत समागम चार चांद लगाते हैं। वैसे तो दीपावली के अगले दिन से ही मेला अपने अस्तित्व में आ जाता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद से मेले की रौनक बढ़ जाती है। भारतेंदु कला मंच पर आने के लिए साहित्य व कला जगत की नामी गिरामी हस्तियां लालायित रहती हैं। इसका प्रमुख कारण मंच पर पर आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन और मुशायरा है।
विज्ञापन
ददरी मेले में आयोजित होने वाले कार्यक्रम
शुक्रवार से शुरू होकर 13 दिसंबर तक चलने वाले ददरी मेले में कार्तिक पूर्णिमा के बाद 19 नवंबर से मीना बाजार शुरू हो जाएगा। इसमें 24 नवंबर को चेतक प्रतियोगिता, 27 को दंगल, 28 से संत समागम होगा। 30 को कव्वाली का आयोजन होगा। 28 से 30 नवंबर तक मेला के क्रीड़ांगन में खेलकूद होगा। दो दिसंबर को मुशायरा, पांच को कवि सम्मेलन और 11 दिसंबर को ददरी महोत्सव का वृहद कार्यक्रम होगा। समापन 13 दिसंबर को किया जाएगा।
विज्ञापन
पशु मेला की जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेला में आने वाले पशु व्यापारियों को पूरी सहूलियत और आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ नगर पालिका, बलिया