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एक माह सात दिन बाद भी नहीं निकला उपभोक्ताओं के लिए रास्ता
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Thu, 15 Dec 2016 09:54 PM IST
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- फोटो : ANI
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बैंकों में नोटबंदी के पांच हफ्ते बाद भी लोगों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। जहां कई बैंकों के एटीएम शोपीस बने हुए हैं वहीं कुछ एटीएम लोगों को राहत पहुंचाने में लगे हुए है। ऐसे में करेंसी चेस्ट वाले बैंकों के एटीएम बंद होने पर तरह-तरह के सवाल उठने लगे है। लोगों की मानें तो बैंकों के अफसरों ने जानबूझकर इस तरह का माहौल कायम किया है।
नगर में नोटबंदी के बाद एटीएम मशीनों ने बैक उपभोक्ताओं का पूरी तरह से साथ नहीं दिया है। जिले में सेंट्रल बैंक तथा एसबीआई के पास करेंसी चेस्ट है। फिर इन बैंकों में लोगों को सुविधा जनक पैसे नहीं निकल पा रहे है। आलम यह है कि सेंट्रल बैंक में कुछ हद तक एटीएम में पैसे डाले भी जा रहे है। वहीं एसबीआई के एटीएम में पैसे नहीं पड़ रहे है।
बैंक अधिकारियों का रुख उपभोक्ताओं के बिल्कुल विपरीत है। ऐसे में लोग निराश होकर अपने घरों को बिना पैसा लिए ही लौट रहे है। जिससे लोगों में काफी आक्रोश दिख रहा है। जो लोग मोदी के नोटबंदी को सराह रहे थे, वे लोग भी अब अपने गुुस्से का इजहार कर दे रहे। लोगों का मानना है कि अगर नोटबंदी जरुरी था तो फिर आरबीआई को बैंकों पर नकेल कसने के लिए नियम भी बनाने चाहिए थे।
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नगर में नोटबंदी के बाद एटीएम मशीनों ने बैक उपभोक्ताओं का पूरी तरह से साथ नहीं दिया है। जिले में सेंट्रल बैंक तथा एसबीआई के पास करेंसी चेस्ट है। फिर इन बैंकों में लोगों को सुविधा जनक पैसे नहीं निकल पा रहे है। आलम यह है कि सेंट्रल बैंक में कुछ हद तक एटीएम में पैसे डाले भी जा रहे है। वहीं एसबीआई के एटीएम में पैसे नहीं पड़ रहे है।
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बैंक अधिकारियों का रुख उपभोक्ताओं के बिल्कुल विपरीत है। ऐसे में लोग निराश होकर अपने घरों को बिना पैसा लिए ही लौट रहे है। जिससे लोगों में काफी आक्रोश दिख रहा है। जो लोग मोदी के नोटबंदी को सराह रहे थे, वे लोग भी अब अपने गुुस्से का इजहार कर दे रहे। लोगों का मानना है कि अगर नोटबंदी जरुरी था तो फिर आरबीआई को बैंकों पर नकेल कसने के लिए नियम भी बनाने चाहिए थे।
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