फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Mangal Pandey's birth anniversary will be celebrated with pomp

धूमधाम से मनाई जाएगी मंगल पांडेय की जयंती

Mon, 18 Jul 2022 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 11:09 PM IST
विज्ञापन
Mangal Pandey's birth anniversary will be celebrated with pomp
बलिया। जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने कहा कि 19 जुलाई को शहीद मंगल पांडेय की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को प्रेस वार्ता कर उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी। बताया कि मंगल पांडेय की जयंती पर 19 जुलाई को सुबह 7:30 बजे से उनके पैतृक गांव नगवा में प्रभात फेरी निकाली जाएगी। उसके बाद 9:30 से 10:30 बजे तक मंगल पांडे चौराहा से टाउन हॉल तक रैली निकलेगी टाउन हॉल में भाषण प्रतियोगिता हरोगी। कदम चौराहा, भृगु आश्रम तिराहा, शहीद स्मारक स्थल एवं टाउन हॉल में नुक्कड़ नाटक भी होगा।
विज्ञापन

सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोकगीत प्रस्तुत गोपाल राय प्रस्तुत करेंगे। मंगल पांडेय की जयंती पर मंगलवार को बहुउद्देश्यीय सभागार में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसमें लोकगीत गायक गोपाल राय व गायक रामकृपाल मंगल पांडेय की वीरता पर आधारित गीत प्रस्तुत करेंगें। फौजदार सिंह देश भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा शहीद मंगल पांडेय पर आधारित नाटक का मंचन किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों के लिए उन्होंने अलग-अलग अधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी है।
विज्ञापन

फांसी देने को तैयार नहीं थे जल्लाद
बलिया। वर्ष 1827 में यूपी के बलिया स्थित नगवां में जन्म लेने वाले मंगल पांडेय ने क्रांति की वो ज्वाला जलाई जिससे अंग्रेज भी कांप उठे थे। अंग्रेजों ने डरकर 10 दिन पहले ही फांसी दे दी थी। ऐसे वीर सपूत को फांसी देने के लिए जल्लाद भी तैयार नहीं थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

मंगल पांडेय के पिता का नाम दिवाकर पांडेय और माता का नाम अभय रानी था। मंगल पांडे शरीर से स्वस्थ और अपनी बहादुरी, साहस तथा एक अच्छे सैनिक के रूप में जाने जाते थे। मंगल पांडेय का नाम स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी योद्धाओं के रूप में लिया जाता है। उनकी ओर से जलाई गई क्रांति की ज्वाला ने ईस्ट इंडिया कंपनी शासन को बुरी तरीके से हिला दिया था। वह ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल नेटिव इंफैंट्री में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए थे। नौकरी के करीब एक साल बाद ही उनकी कंपनी में नई इनफील्ड राइफल लाई गई। इस राइफल की कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी मिली होती थी। इस कारतूस को चलाने के लिए मुंह से काटकर राइफल में लोड करना होता था। ये भारतीय सैनिकों को मंजूर नहीं था। इसी के विरोध में मंगल पांडेय ने 29 मार्च 1857 को विद्रोह कर दिया। परिणाम स्वरूप उनकी गिरफ्तारी हुई और मुकदमा चलाया गया। इस विद्रोह के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी। 18 अप्रैल, 1857 यही वो तारीख थी, जब उन्हें फांसी दी जानी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed