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लाखों पौधे लगने के बाद भी जिले में नहीं है वनों का घेरा
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 26 Apr 2016 06:37 PM IST
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पाौधाराोपण
- फोटो : अमर उजाला
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जंगल कटते रहे हैं, वन उजड़ते रहे हैं, पौधरोपण होता रहा फिर भी पेड़ों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। वहीं पेड़ों को उजड़ने से सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग को सामाजिक वानिकी विभाग में बदल दिया गया। फिर भी पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी रही और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ता गया।
सामाजिक वानिकी विभाग के आंकड़ों को सच माना जाए तो जितना विभाग ने जितना पौधरोपण कराया अगर उतना धरातल पर भी होता तो यह जनपद, वनों का जनपद कहलाता।
विभाग प्रतिवर्ष पांच से साढ़े पांच लाख पौधे लगाते हैं।
यह सिलसिला सालाें से चला आ रहा है। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। मुख्य मार्गों के किनारे लगाए जाने वाले 20 फीसदी फलदार वृक्ष भी अब नजर नहीं आते। वन विभाग हर साल ग्राम समाज की भूमि पर, नहरों की पटरियों पर, रेलवे की भूमि पर, सड़क किनारे सरकारी भूमि पर, स्कूलों आदि जगहों पर पौधरोपण का कार्यक्रम करता है।
लाखों की संख्या में वृक्ष लगाए जाते हैं। कागजों में वही इलाका भी दर्ज होता है, जहां वृक्ष लगाए जाते हैं। लेकिन कुछ ही दिनों बाद वृक्षारोपण का वह इलाका वृक्ष विहीन हो जाता है। लगाए गए वृक्ष क्यों गायब हो जाते हैं ? इसका जवाब वन विभाग नहीं दे पा रहा है।
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देखा जाए तो वन विभाग ने वर्ष 2014-15 में 4,46,000 पौधे 436 हेक्टेयर में लगाए गए। इसी क्रम में वर्ष 2015-16 में 4,28,000 पौधे 428 हेक्टेयर में लगाए गए। जबकि वर्ष 2016-17 में 5,45,000 पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए 516 हेक्टेयर भूमि में लगाने का लक्ष्य है।
इसके लिए जमीन चिह्नित कर गड्ढा खोदने को कार्य चल रहा है। वन विभाग को जनपद कुल नौ रेंजों में बांटा गया है। जिसमें छाता, बलिया, बांसडीह, रसड़ा, बैरिया, फेफना, बेल्थरा, सिकंदरपुर तथा मनियर शामिल हैं। सभी रेंजों में मानक के हिसाब से प्रति वर्ष बराबर पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन इन पौधों की जांच-पड़ताल कर दिया जाए तो जमीन पर 10 फीसदी भी पौधे बचे हुए नहीं मिलेंगे।
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सामाजिक वानिकी विभाग के आंकड़ों को सच माना जाए तो जितना विभाग ने जितना पौधरोपण कराया अगर उतना धरातल पर भी होता तो यह जनपद, वनों का जनपद कहलाता।
विभाग प्रतिवर्ष पांच से साढ़े पांच लाख पौधे लगाते हैं।
यह सिलसिला सालाें से चला आ रहा है। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। मुख्य मार्गों के किनारे लगाए जाने वाले 20 फीसदी फलदार वृक्ष भी अब नजर नहीं आते। वन विभाग हर साल ग्राम समाज की भूमि पर, नहरों की पटरियों पर, रेलवे की भूमि पर, सड़क किनारे सरकारी भूमि पर, स्कूलों आदि जगहों पर पौधरोपण का कार्यक्रम करता है।
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लाखों की संख्या में वृक्ष लगाए जाते हैं। कागजों में वही इलाका भी दर्ज होता है, जहां वृक्ष लगाए जाते हैं। लेकिन कुछ ही दिनों बाद वृक्षारोपण का वह इलाका वृक्ष विहीन हो जाता है। लगाए गए वृक्ष क्यों गायब हो जाते हैं ? इसका जवाब वन विभाग नहीं दे पा रहा है।
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देखा जाए तो वन विभाग ने वर्ष 2014-15 में 4,46,000 पौधे 436 हेक्टेयर में लगाए गए। इसी क्रम में वर्ष 2015-16 में 4,28,000 पौधे 428 हेक्टेयर में लगाए गए। जबकि वर्ष 2016-17 में 5,45,000 पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए 516 हेक्टेयर भूमि में लगाने का लक्ष्य है।
इसके लिए जमीन चिह्नित कर गड्ढा खोदने को कार्य चल रहा है। वन विभाग को जनपद कुल नौ रेंजों में बांटा गया है। जिसमें छाता, बलिया, बांसडीह, रसड़ा, बैरिया, फेफना, बेल्थरा, सिकंदरपुर तथा मनियर शामिल हैं। सभी रेंजों में मानक के हिसाब से प्रति वर्ष बराबर पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन इन पौधों की जांच-पड़ताल कर दिया जाए तो जमीन पर 10 फीसदी भी पौधे बचे हुए नहीं मिलेंगे।