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Ballia News: चार दिनों से हो रही बारिश, 12 से ज्यादा मोहल्लों में जलभराव
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नगर के जापलिनगंज मोहल्ला में सड़क पर लगा बारिश का पानी तथा उससे होकर गुजरती युवती।संवाद
बलिया। 20 से 23 अगस्त तक बीते चार दिनों में जिले में 54 मिलीमीटर बारिश हुई। हालांकि बीते चार दिनों से हो रही बारिश ने गर्मी और उमस से भले ही राहत प्रदान की और अधिकतम तापमान में करीब 4.5 डिग्री की कमी दर्ज की गई है लेकिन न्यूनतमा तापमान जस का तस है। शहर के करीब 12 से ज्यादा मोहल्ले ऐसे हैं, जिनमें जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है।
वहीं, बारिश ने शहर की सूरत भी बिगाड़ दी है। नगर के घनश्याम नगर समेत कुछ जगहों पर लोगों को बाढ़ व बारिश के पानी के कारण आवागमन के लिए बांस-बल्ली की मदद से अस्थायी पुल बनाना पड़ा है। शुक्रवार को रात में डेढ़ घंटे तक हुई 3.2 एमएम वर्षा से न केवल विभिन्न मार्गों पर पानी लग गया बल्कि प्रमुख गलियां और सड़कों पर जलभराव की स्थिति रही। कुछ मोहल्लों में तो सड़क पर इतना कीचड़ हो गया कि लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके। शनिवार को दिन में रुक-रुक कर करीब 9.5 मिलीमीटर बरसात हुई । हालांकि दिन में तीन बजे के बाद हुई धूप से मौसम का मिजाज फिर तल्ख नजर आया।
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सड़कों पर बने गड्ढे, आवागमन मुश्किल
बारिश के बाद शहर समेत देहात क्षेत्र की सड़कें बिखर सी गई हैं। पानी के बहाव के साथ सड़क से कंकड़-पत्थर ही नहीं तारकोल तक बह गया है। हालात यह है कि सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। सड़कों में पांच से आठ इंच गहरे व दो फीट तक चौड़े गड्ढे बन गए हैं। इनमें बारिश का पानी भरने से हालात और बिगड़ जाते हैं। इन गड्ढों को भरने में विभाग भी लापरवाही बरत रहा है। ऐसे में ये गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए हैं।
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जल भराव से जूझते हैं दो हजार परिवार
विगत कई वर्षों से श्रीराम बिहार कालोनी के 100, कल्पना कॉलोनी के 200, आवास विकास कॉलोनी के 1000, विवेकानंद कॉलोनी के 100, रामदहिनपुरम कॉलोनी के 500, जेल कॉलोनी के 50, पुलिस लाइन में करीब 300 आवास व टैगोरनगर के करीब 20 से 25 घरों के अलावा काजीपुरा मोहल्ला की बड़ी आबादी जल भराव की समस्या से जूझती हैं।
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इन मोहल्लों में होता हैं जलभराव
शहर के काजीपुरा, बहादुरपुर कालोनी, राम दहिमपुरम, विवेकानंद कालोनी, आवास विकास कालोनी, श्रीराम बिहार कालोनी, सतनी सराय, एससी काॅलेज, जापलिनगंज, हरपुर, एनसीसी तिराहा, जिला कारागार, पुलिस लाइन, स्टेडियम, पुलिस कार्यालय, मॉडल तहसील परिसर, पीडब्लूडी डाकबंगला, जलनिगम कार्यालय, कलेक्ट्रेट परिसर आदि क्षेत्र में बरसात के दिनों में जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
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धान व खरीफ की फसलों के संजीवनी है बारिश
कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के अध्यक्ष डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि इस समय जो मध्यम दर्जे की बारिश हो रही है, वह धान एवं खरीफ की फसलों के लिए लाभप्रद है, क्योंकि धान को पानी की अधिक आवश्यकता होती है और खरीफ की फसलें मानसून पर निर्भर करती हैं। यह बारिश खेतों में नमी बढ़ाकर किसानों को सिंचाई से राहत दिलाती है, फसलों को सूखने से बचाती है, और उनकी वृद्धि व विकास में मदद करती है। बताया कि धान की फसल में कुछ बीमारियों, जैसे पत्ता लपेट (लीफ फोल्डर) के प्रकोप को बारिश से कम हो जाता है। साथ ही बारिश में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे पौधों को स्वस्थ वृद्धि के लिए पोषण मिलता है। कुल मिलाकर, समय पर और उचित मात्रा में होने वाली बारिश धान और खरीफ की अन्य फसलों के लिए संजीवनी का काम करती है। यह किसानों को सिंचाई के खर्च से बचाती है और फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद जगाती है। जिले में खरीफ फसलों की खेती का लक्ष्य 1.50 लाख 26 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जिसमें धान व मक्का, बाजरा, अरहर, ज्वार जैसी फसलें शामिल हैं।
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नगर के जल भराव वाले निचले इलाकों में पंप लगाकर पानी बाहर निकाला जा रहा है ताकि नागरिकों को असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके अलावा कीटनाशकों का छिड़काव कराने के साथ ही फागिंग कराई जा रही है। -सुभाष कुमार, ईओ, नगर पालिका, बलिया।
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पिछले एक सप्ताह का तापमान व बारिश का विवरण
दिन तापमान बारिश
16 अगस्त 34.5 27.5 00
17 अगस्त 35 29 00
18 अगस्त 35 26.5 00
19 अगस्त 35 26.5 00
20 अगस्त 33 27 22.2 एमएम
21 अगस्त 30 26.5 18.1 एमएम
22 अगस्त 30.5 25 3.2 एमएम
23अगस्त 30.5 26.5 9.5एमएम
नोट- आंकडे़ मौसम विज्ञान केंद्र, मिड्डा के अनुसार।
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वहींं, 20 अगस्त को 22.2 एमएम बारिश के चलते चांददीयर में आठ दिन में दोबारा निर्माणाधीन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे धंस गया। इसके पहले 13 अगस्त को निर्माणाधीन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे धंसा था तब 38 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
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वहीं, बारिश ने शहर की सूरत भी बिगाड़ दी है। नगर के घनश्याम नगर समेत कुछ जगहों पर लोगों को बाढ़ व बारिश के पानी के कारण आवागमन के लिए बांस-बल्ली की मदद से अस्थायी पुल बनाना पड़ा है। शुक्रवार को रात में डेढ़ घंटे तक हुई 3.2 एमएम वर्षा से न केवल विभिन्न मार्गों पर पानी लग गया बल्कि प्रमुख गलियां और सड़कों पर जलभराव की स्थिति रही। कुछ मोहल्लों में तो सड़क पर इतना कीचड़ हो गया कि लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके। शनिवार को दिन में रुक-रुक कर करीब 9.5 मिलीमीटर बरसात हुई । हालांकि दिन में तीन बजे के बाद हुई धूप से मौसम का मिजाज फिर तल्ख नजर आया।
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सड़कों पर बने गड्ढे, आवागमन मुश्किल
बारिश के बाद शहर समेत देहात क्षेत्र की सड़कें बिखर सी गई हैं। पानी के बहाव के साथ सड़क से कंकड़-पत्थर ही नहीं तारकोल तक बह गया है। हालात यह है कि सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। सड़कों में पांच से आठ इंच गहरे व दो फीट तक चौड़े गड्ढे बन गए हैं। इनमें बारिश का पानी भरने से हालात और बिगड़ जाते हैं। इन गड्ढों को भरने में विभाग भी लापरवाही बरत रहा है। ऐसे में ये गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए हैं।
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जल भराव से जूझते हैं दो हजार परिवार
विगत कई वर्षों से श्रीराम बिहार कालोनी के 100, कल्पना कॉलोनी के 200, आवास विकास कॉलोनी के 1000, विवेकानंद कॉलोनी के 100, रामदहिनपुरम कॉलोनी के 500, जेल कॉलोनी के 50, पुलिस लाइन में करीब 300 आवास व टैगोरनगर के करीब 20 से 25 घरों के अलावा काजीपुरा मोहल्ला की बड़ी आबादी जल भराव की समस्या से जूझती हैं।
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इन मोहल्लों में होता हैं जलभराव
शहर के काजीपुरा, बहादुरपुर कालोनी, राम दहिमपुरम, विवेकानंद कालोनी, आवास विकास कालोनी, श्रीराम बिहार कालोनी, सतनी सराय, एससी काॅलेज, जापलिनगंज, हरपुर, एनसीसी तिराहा, जिला कारागार, पुलिस लाइन, स्टेडियम, पुलिस कार्यालय, मॉडल तहसील परिसर, पीडब्लूडी डाकबंगला, जलनिगम कार्यालय, कलेक्ट्रेट परिसर आदि क्षेत्र में बरसात के दिनों में जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
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धान व खरीफ की फसलों के संजीवनी है बारिश
कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के अध्यक्ष डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि इस समय जो मध्यम दर्जे की बारिश हो रही है, वह धान एवं खरीफ की फसलों के लिए लाभप्रद है, क्योंकि धान को पानी की अधिक आवश्यकता होती है और खरीफ की फसलें मानसून पर निर्भर करती हैं। यह बारिश खेतों में नमी बढ़ाकर किसानों को सिंचाई से राहत दिलाती है, फसलों को सूखने से बचाती है, और उनकी वृद्धि व विकास में मदद करती है। बताया कि धान की फसल में कुछ बीमारियों, जैसे पत्ता लपेट (लीफ फोल्डर) के प्रकोप को बारिश से कम हो जाता है। साथ ही बारिश में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे पौधों को स्वस्थ वृद्धि के लिए पोषण मिलता है। कुल मिलाकर, समय पर और उचित मात्रा में होने वाली बारिश धान और खरीफ की अन्य फसलों के लिए संजीवनी का काम करती है। यह किसानों को सिंचाई के खर्च से बचाती है और फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद जगाती है। जिले में खरीफ फसलों की खेती का लक्ष्य 1.50 लाख 26 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जिसमें धान व मक्का, बाजरा, अरहर, ज्वार जैसी फसलें शामिल हैं।
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नगर के जल भराव वाले निचले इलाकों में पंप लगाकर पानी बाहर निकाला जा रहा है ताकि नागरिकों को असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके अलावा कीटनाशकों का छिड़काव कराने के साथ ही फागिंग कराई जा रही है। -सुभाष कुमार, ईओ, नगर पालिका, बलिया।
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पिछले एक सप्ताह का तापमान व बारिश का विवरण
दिन तापमान बारिश
16 अगस्त 34.5 27.5 00
17 अगस्त 35 29 00
18 अगस्त 35 26.5 00
19 अगस्त 35 26.5 00
20 अगस्त 33 27 22.2 एमएम
21 अगस्त 30 26.5 18.1 एमएम
22 अगस्त 30.5 25 3.2 एमएम
23अगस्त 30.5 26.5 9.5एमएम
नोट- आंकडे़ मौसम विज्ञान केंद्र, मिड्डा के अनुसार।
वहींं, 20 अगस्त को 22.2 एमएम बारिश के चलते चांददीयर में आठ दिन में दोबारा निर्माणाधीन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे धंस गया। इसके पहले 13 अगस्त को निर्माणाधीन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे धंसा था तब 38 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।

नगर के जापलिनगंज मोहल्ला में सड़क पर लगा बारिश का पानी तथा उससे होकर गुजरती युवती।संवाद