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निर्देश फाइलों में घूम रहे, छुट्टे पशु सड़कों पर
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बलिया। चुनाव में इस बार छुट्टा पशु भी मुद्दा बन गए हैं। ग्रामीणों में इसको लेकर काफी गुस्सा है। करीब एक माह पहले शासन की ओर से अभियान चलाकर छुट्टे पशुओं को पकड़ने का निर्देश दिया गया लेकिन यह भी हवा हवाई होकर रह गया। किसानों को छुट्टे पशुओं से फसलों को बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए पशु आश्रय स्थल बनाने की कवायद शुरू की थी। दो वृहद पशु आश्रय स्थल जिगिरसड़ व बछईपुर में संचालित हैं। बेल्थरारोड तहसील के करौंदी में वृहद पशु आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। इसके अलावा छुट्टे मवेशियों को पकड़ कर रखने के लिए जिले में 26 अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाए हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 16 ब्लॉकों में एक-एक व नगर पालिका व नगर पंचायतों में कुल एक-एक हैं। हालांकि नगर पंचायत मनियर में वृहद कान्हा गोशाला निर्माणाधीन है। कुछ दिनों पहले शासन की ओर से 10 जनवरी तक अभियान चलाकर छुट्टे पशुओं को पकड़ने का निर्देश भी बेअसर रहा। अधिकांश पशु आश्रय स्थलों पर व्यवस्था के नाम पर केवल कोरम ही किया गया है। शहर के कई मार्गों पर छुट्टे पशु चक्रमण करते मिल जाएंगे। नगर के जापलिनगंज मार्ग पर मवेशी चक्रमण करते रहते हैं जिससे मार्ग से गुजरने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सहभागिता योजना में संरक्षित हैं 459 छुट्टे पशु
बलिया। जिले में सहभागिता योजना के तहत 459 छुट्टे पशुओं का पोषण करने के लिए अलग-अलग किसानों को प्रशासन की ओर से दिया गया है। पशुपालन विभाग की ओर से समय-समय पर इन किसानों के यहां संरक्षित पशुओं का सत्यापन संबंधित ब्लॉक के बीडीओ की ओर से कराया जाता है और बीडीओ की ओर से प्रस्तुत बिल के आधार पर भुगतान किया जाता है। अब तक करीब 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। शेष भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।
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35 पशुओं को चारे का है इंतजाम
रेवती। नगर पंचायत कार्यालय स्थित पशु आश्रय स्थल पर कुल 35 बछड़े पल रहे हैं। इनके भोजन के लिए एक बड़े टिन शेड में बड़े पैमाने पर भूसा रखा हुआ है। कार्यालय के लिपिक राधेश्याम वर्मा ने बताया कि पहले 34 मवेशी थे अब 35 मवेशी यहां पल रहे हैं। आश्रय स्थल के मवेशियों की देखरेख कर रहे संतोष रावत तथा सोनू रावत ने बताया कि बछड़ों को भूसा में चोकर, गुड़, सरसों की खली आदि मिलाकर खिलाया जाता है।
गो आश्रय स्थल पर गंदगी का अंबार
नगरा।सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जिले के अधिकारी कितना महत्व दे रहे है, यह बलिया के नगरा विकास खण्ड के रघुनाथपुर में बने गो आश्रय स्थल को देखने से साफ पता चल जाएगा। लाखों खर्च के बावजूद इस आश्रय स्थल पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। बछड़ों को ठंड से बचाव के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। प्रदेश सरकार ने छुट्टा बछड़ों के लिए लाखों रुपए ख़र्च करके रघुनाथपुर में पशु आश्रय स्थल का निर्माण कराया। इसमें छुट्टा बछड़े भी रखे गए लेकिन जिनके ऊपर देख रेख की जिम्मेदारी सौंपी गई वे कभी भी रख रखाव के प्रति कभी गम्भीर नहीं रहे।
गौशालाओं में संरक्षित गोवंश- 10
वृहद गो आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश-235
अस्थाई गो आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश- 2265
नगरीय क्षेत्र कान्हा गौशालाओं में संरक्षित गोवंश- 44
सहभागिता योजना के तहत संरक्षित गोवंश- 459
छुट्टे पशुओं को संरक्षित करने की योजना पूरी तरह फ्लॉप हुई है। हां, इसकी आड़ में सरकारी धन का गोलमाल खूब किया जा रहा है। आए दिन पशु आश्रय स्थलों में पशुओं की मौत होती है लेकिन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। छुट्टे पशुओं से फसलों की रखवाली करने के लिए पूरी रात जागनी पड़ती है।
- लाल बहादुर यादव
पशु आश्रय स्थल पर मवेशियों के रखने को माकूल इंतजाम नहीं हैं, इसके चलते आए दिन मवेशियों की मौत होती है। यह बात अलग है कि तुरंत दूसरे छुट्टे पशुओं को पकड़कर संख्या पूरी कर ली जाती है। छुट्टे पशु किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
- शत्रुंजय कुमार चौबे
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वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार ने छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए पशु आश्रय स्थल बनाने की कवायद शुरू की थी। दो वृहद पशु आश्रय स्थल जिगिरसड़ व बछईपुर में संचालित हैं। बेल्थरारोड तहसील के करौंदी में वृहद पशु आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। इसके अलावा छुट्टे मवेशियों को पकड़ कर रखने के लिए जिले में 26 अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाए हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 16 ब्लॉकों में एक-एक व नगर पालिका व नगर पंचायतों में कुल एक-एक हैं। हालांकि नगर पंचायत मनियर में वृहद कान्हा गोशाला निर्माणाधीन है। कुछ दिनों पहले शासन की ओर से 10 जनवरी तक अभियान चलाकर छुट्टे पशुओं को पकड़ने का निर्देश भी बेअसर रहा। अधिकांश पशु आश्रय स्थलों पर व्यवस्था के नाम पर केवल कोरम ही किया गया है। शहर के कई मार्गों पर छुट्टे पशु चक्रमण करते मिल जाएंगे। नगर के जापलिनगंज मार्ग पर मवेशी चक्रमण करते रहते हैं जिससे मार्ग से गुजरने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सहभागिता योजना में संरक्षित हैं 459 छुट्टे पशु
बलिया। जिले में सहभागिता योजना के तहत 459 छुट्टे पशुओं का पोषण करने के लिए अलग-अलग किसानों को प्रशासन की ओर से दिया गया है। पशुपालन विभाग की ओर से समय-समय पर इन किसानों के यहां संरक्षित पशुओं का सत्यापन संबंधित ब्लॉक के बीडीओ की ओर से कराया जाता है और बीडीओ की ओर से प्रस्तुत बिल के आधार पर भुगतान किया जाता है। अब तक करीब 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। शेष भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।
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35 पशुओं को चारे का है इंतजाम
रेवती। नगर पंचायत कार्यालय स्थित पशु आश्रय स्थल पर कुल 35 बछड़े पल रहे हैं। इनके भोजन के लिए एक बड़े टिन शेड में बड़े पैमाने पर भूसा रखा हुआ है। कार्यालय के लिपिक राधेश्याम वर्मा ने बताया कि पहले 34 मवेशी थे अब 35 मवेशी यहां पल रहे हैं। आश्रय स्थल के मवेशियों की देखरेख कर रहे संतोष रावत तथा सोनू रावत ने बताया कि बछड़ों को भूसा में चोकर, गुड़, सरसों की खली आदि मिलाकर खिलाया जाता है।
गो आश्रय स्थल पर गंदगी का अंबार
नगरा।सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जिले के अधिकारी कितना महत्व दे रहे है, यह बलिया के नगरा विकास खण्ड के रघुनाथपुर में बने गो आश्रय स्थल को देखने से साफ पता चल जाएगा। लाखों खर्च के बावजूद इस आश्रय स्थल पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। बछड़ों को ठंड से बचाव के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। प्रदेश सरकार ने छुट्टा बछड़ों के लिए लाखों रुपए ख़र्च करके रघुनाथपुर में पशु आश्रय स्थल का निर्माण कराया। इसमें छुट्टा बछड़े भी रखे गए लेकिन जिनके ऊपर देख रेख की जिम्मेदारी सौंपी गई वे कभी भी रख रखाव के प्रति कभी गम्भीर नहीं रहे।
गौशालाओं में संरक्षित गोवंश- 10
वृहद गो आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश-235
अस्थाई गो आश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश- 2265
नगरीय क्षेत्र कान्हा गौशालाओं में संरक्षित गोवंश- 44
सहभागिता योजना के तहत संरक्षित गोवंश- 459
छुट्टे पशुओं को संरक्षित करने की योजना पूरी तरह फ्लॉप हुई है। हां, इसकी आड़ में सरकारी धन का गोलमाल खूब किया जा रहा है। आए दिन पशु आश्रय स्थलों में पशुओं की मौत होती है लेकिन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। छुट्टे पशुओं से फसलों की रखवाली करने के लिए पूरी रात जागनी पड़ती है।
- लाल बहादुर यादव
पशु आश्रय स्थल पर मवेशियों के रखने को माकूल इंतजाम नहीं हैं, इसके चलते आए दिन मवेशियों की मौत होती है। यह बात अलग है कि तुरंत दूसरे छुट्टे पशुओं को पकड़कर संख्या पूरी कर ली जाती है। छुट्टे पशु किसानों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
- शत्रुंजय कुमार चौबे