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Ballia News: अवसाद के कारण बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति
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पंदह। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मंगलवार को सीएचसी खेजुरी में मन चेतना दिवस मनाया गया। इसमें मानसिक रोगों की भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया गया। जिला अस्पताल की साइकोथेरिपिस्ट डाॅ. अनुष्का ने मानसिक रोगों के लक्षण बताए। कहा गया कि अवसाद के कारण आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
बताया कि आबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया और अवसाद के कारण कोई भी व्यक्ति मानसिक विकार का शिकार हो सकता है। इसके अलावा सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और शारीरिक कमियां भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसके चलते व्यक्ति असामान्य व्यवहार करने लगता है। मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इस प्रकार के लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान और उपचार के लिए ''मन चेतना दिवस'' मनाया जाता है। यदि कोई मानसिक समस्या, उलझन, घबराहट, नींद न आने, आत्महत्या के विचार आने से परेशान हो या आत्महत्या का प्रयास किया हो, तो ऐसे व्यक्तियों को जिला अस्पताल की ओपीडी या ''मन चेतना शिविर'' में भेजें। इससे पूर्व एडिशनल सीएमओ डॉ. पद्मावती ने कार्यक्रम की शुरुआत की। एसीएमओ ने भी मानसिक असंतुलन के लिए सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक पक्ष को जिम्मेदार ठहराया। अधीक्षक डॉ. रत्नेश कुमार, डीपीएम राज शेखर, डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. अमर नाथ शर्मा, डॉ. प्रशांत सिंह मौजूद रहे।
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बताया कि आबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया और अवसाद के कारण कोई भी व्यक्ति मानसिक विकार का शिकार हो सकता है। इसके अलावा सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और शारीरिक कमियां भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसके चलते व्यक्ति असामान्य व्यवहार करने लगता है। मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इस प्रकार के लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान और उपचार के लिए ''मन चेतना दिवस'' मनाया जाता है। यदि कोई मानसिक समस्या, उलझन, घबराहट, नींद न आने, आत्महत्या के विचार आने से परेशान हो या आत्महत्या का प्रयास किया हो, तो ऐसे व्यक्तियों को जिला अस्पताल की ओपीडी या ''मन चेतना शिविर'' में भेजें। इससे पूर्व एडिशनल सीएमओ डॉ. पद्मावती ने कार्यक्रम की शुरुआत की। एसीएमओ ने भी मानसिक असंतुलन के लिए सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक पक्ष को जिम्मेदार ठहराया। अधीक्षक डॉ. रत्नेश कुमार, डीपीएम राज शेखर, डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. अमर नाथ शर्मा, डॉ. प्रशांत सिंह मौजूद रहे।
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