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Ballia News: बिना ईटीपी के संचालित हो रहे हैं अस्पताल
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बलिया। जिले के अधिकांश नर्सिंग होम में ईटीपी नहीं है। इससे प्राइवेट अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मानकों पर खरा नहीं उतरते है। बावजूद इसके प्राइवेट नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन बदस्तूर है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करते समय भी स्वास्थ्य विभाग संचालकों से यह जानकारी लेना जरूरी नहीं समझता, जिससे जिले में मानकों की अनदेखी कर बड़ी तादाद में प्राइवेट नर्सिंग होम संचालित हो रहे है। जिससे न सिर्फ मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है बल्कि शासन के निर्देशों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रजिस्ट्रेशन करते समय ही जांच करने का दावा तो करता है। लेकिन ईटीपी होने या नहीं होने की जांच नहीं करता। जिससे अस्पताल संचालक कागजों में सबकुछ ओके बताकर प्रमाण पत्र हासिल कर लेते है। यहीं वजह है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग के पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है। जबकि सरकार की ओर से 10 बेड से अधिक वाले नर्सिंग होम के लिए ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के आदेश हैं।
रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहा स्वास्थ्य विभाग : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 62 नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में ईटीपी है या नहीं, इसकी जानकारी करने में अब स्वास्थ्य विभाग जुटा हुआ है।
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क्या है ईटीपी : अस्पतालों से जो गंदा पानी और तरल पदार्थ निकलता है, उसे इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में साफ किया जाता है। इसके बाद नालियों में भी अगर अस्पतालों का पानी बहेगा तो भूजल को प्रदूषित नहीं करेगा।
एनजीटी के आदेश के मुताबिक नर्सिंग होम में ईटीपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी अस्पताल में ईटीपी नहीं है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। बलिया में एक भी नर्सिंग होम में ईटीपी नहीं लगा है। समय-समय पर इसके लिए नोटिस भी जारी की जाती रही है। - एससी शुक्ला, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी, आजमगढ़
जिले के कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा है इसका सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद ही पता चलेगा कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है। जहां ईटीपी नहीं लगा होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. जयंत कुमार, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रजिस्ट्रेशन करते समय ही जांच करने का दावा तो करता है। लेकिन ईटीपी होने या नहीं होने की जांच नहीं करता। जिससे अस्पताल संचालक कागजों में सबकुछ ओके बताकर प्रमाण पत्र हासिल कर लेते है। यहीं वजह है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग के पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है। जबकि सरकार की ओर से 10 बेड से अधिक वाले नर्सिंग होम के लिए ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के आदेश हैं।
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रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहा स्वास्थ्य विभाग : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 62 नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में ईटीपी है या नहीं, इसकी जानकारी करने में अब स्वास्थ्य विभाग जुटा हुआ है।
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क्या है ईटीपी : अस्पतालों से जो गंदा पानी और तरल पदार्थ निकलता है, उसे इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में साफ किया जाता है। इसके बाद नालियों में भी अगर अस्पतालों का पानी बहेगा तो भूजल को प्रदूषित नहीं करेगा।
एनजीटी के आदेश के मुताबिक नर्सिंग होम में ईटीपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी अस्पताल में ईटीपी नहीं है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। बलिया में एक भी नर्सिंग होम में ईटीपी नहीं लगा है। समय-समय पर इसके लिए नोटिस भी जारी की जाती रही है। - एससी शुक्ला, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी, आजमगढ़
जिले के कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा है इसका सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद ही पता चलेगा कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है। जहां ईटीपी नहीं लगा होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. जयंत कुमार, सीएमओ