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कहीं हीर समझेगा कहीं रांझा समझेगा
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Sun, 08 Nov 2015 10:46 PM IST
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राष्ट्रीय अधिवेशन एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन शनिवार की शाम रसड़ा क्षेत्र के कैथी कला गांव में हुआ। जिसमें शानदार रचनाएं सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। शुरुआत मुख्य अतिथि नगर के चेयरमैन प्रतिनिधि लक्ष्मण गुप्ता एवं विशिष्ठ अतिथि रमेश सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस दौरान कवि सरगम ने सरस्वती वंदना मां वीणा वाली सरगम सवार दें...सुनाकर कार्यक्रम की शुरूआत की। कवि अश्वनी आलोक ने न नीति होगी और न धर्म होगा, सुनाकर वाहवाही लूटी। वहीं डॉ. भगवान सिंह भास्कर ने कहा कि कहीं हीर समझेगा, कहीं रांझा समझेगा, भरी महफिल में वे तनहा समझेगा.. सुनाकर युवाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्व सांसद एवं प्रो. ओम पाल सिंह नीडर ने कहा कि सौगंध राम की, खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे...।
सुनाकर युवाओं में जोश भर दिया। डॉ. बृजेश सिंह ने कहा कि अभी भी देश के हर जख्म की तश्वीर बाकी है, फिजाओं में रचे आतंक की तहरीर बाकी है.. सुनाकर देश भक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। अंत में मुख्य अतिथि बाबू लाल बहादुर सिंह साहित्य विभूषण अलंकार से सम्मानित किया गया। सभी कवियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। संयोजक विवेकानंद सिंह, शैलेंद्र सिंह, भपूेंद्र सिंह, मनोज सिंह मौजूद रहे।
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इस दौरान कवि सरगम ने सरस्वती वंदना मां वीणा वाली सरगम सवार दें...सुनाकर कार्यक्रम की शुरूआत की। कवि अश्वनी आलोक ने न नीति होगी और न धर्म होगा, सुनाकर वाहवाही लूटी। वहीं डॉ. भगवान सिंह भास्कर ने कहा कि कहीं हीर समझेगा, कहीं रांझा समझेगा, भरी महफिल में वे तनहा समझेगा.. सुनाकर युवाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्व सांसद एवं प्रो. ओम पाल सिंह नीडर ने कहा कि सौगंध राम की, खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे...।
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सुनाकर युवाओं में जोश भर दिया। डॉ. बृजेश सिंह ने कहा कि अभी भी देश के हर जख्म की तश्वीर बाकी है, फिजाओं में रचे आतंक की तहरीर बाकी है.. सुनाकर देश भक्ति से ओत-प्रोत कर दिया। अंत में मुख्य अतिथि बाबू लाल बहादुर सिंह साहित्य विभूषण अलंकार से सम्मानित किया गया। सभी कवियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। संयोजक विवेकानंद सिंह, शैलेंद्र सिंह, भपूेंद्र सिंह, मनोज सिंह मौजूद रहे।
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