फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Government Polytechnic College of Jigirsad not built even after 15 years

Ballia News: 15 वर्षों बाद भी नहीं बना जिगिरसड़ का राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज

Thu, 04 Apr 2024 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2024 12:22 AM IST
विज्ञापन
Government Polytechnic College of Jigirsad not built even after 15 years
सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत जिगिरसड़ में निर्माणाधीन राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का वर्ष 2005-06 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो 15 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। हैरत तो यह है कि इस कॉलेज के नाम पर नामांकन भी हो रहा है, लेकिन छात्रों को पढ़ाई के लिए मऊ जाना पड़ता है।
विज्ञापन

वर्ष 2005-06 में स्वीकृत इस पॉलिटेक्निक कॉलेज की आधारशिला 2009 में रखी गई थी। जिसे हर हाल में 2012 में पूरा करना था, लेकिन विभागीय अनदेखी के कारण पिछले 15 वर्षों से निर्माणाधीन है और अभी भी इसका 30 फीसदी काम अधूरा है। हैरत की बात यह है की धरातल पर आधा अधूरा यह काॅलेज 2012 से कागजों में संचालित हो रहा है। इस कॉलेज के नाम पर नामांकन भी होता है, लेकिन छात्रों को पढ़ाई के लिए मऊ जाना पड़ता है।
विज्ञापन

करीब 10 एकड़ भूभाग पर 12 करोड़ की लागत से बनने वाले इस कॉलेज के निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। सरकार ने इस बाबत तत्काल 52 लाख की धनराशि भी जारी कर दी। तब से लेकर अब तक इसका निर्माण कार्य अधर में लटका है। तीन साल के अंदर निर्माण कार्य पूरा न होने पर दोबारा प्राक्कलन में इसकी लागत दो करोड़ बढ़ गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस बीच कार्यदाई संस्था के जिम्मेदारों ने निर्माण में जमकर हीलाहवाली की, नतीजतन अलग अलग किस्तों में पूरी लागत का भुगतान होने के बाद भी इसका आधा कार्य भी पूरा नहीं कराया गया। 2018 में इस राजकीय पॉलिटेक्निक काॅलेज के निर्माण में की गई धांधली की शिकायतों की जांच में करोड़ों का घोटाला भी सामने आया था। जिसके बाद शासन स्तर से 2.16 करोड़ की रिकवरी भी कराई गई। एक बार पुन: निर्माण निगम द्वारा कार्य शुरू कराया गया है। लेकिन, निर्माण की कच्छप गति से अगले सत्र में भी संचालन को लेकर संशय बरकरार है।


तीन ट्रेड के लिए होता है नामांकन

पूर्वांचल के बड़े पॉलिटेक्निक काॅलेजों में शुमार जिगिरसंड के इस राजकीय काॅलेज को दस ट्रेड की मान्यता प्राप्त है। जिसमें सिविल, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग, मेकेनिकल मेंटेनेंस, टेक्सटाइल्स डिजाइनिंग, कंप्यूटर साइंस और सिविल इंजीनियरिंग शामिल है। फिलहाल यहां तीन ट्रेड इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग, मेकेनिकल मेंटेनेंस और टेक्सटाइल्स डिजाइनिंग के लिए 60-60 विद्यार्थियों का नामांकन किया जाता है। जिन्हें राजकीय पॉलीटेक्निक काॅलेज, मऊ में शिक्षित-प्रशिक्षित किया जाता है।


बीते 15 वर्षों से कालेज संचालन की उम्मीद लगाए बैठे स्थानीय लोगों में व्यवस्था के प्रति काफी नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता बबलू शुक्ल ने बताया कि सरकारी धन के दुरुपयोग के कारण तीन साल तक कार्य बंद रहा। एक बार फिर कार्यदाई संस्था ने काम शुरू किया है। अभी भी बहुत से कार्य अधूरे हैं। वहीं सुरेंद्र चौहान का कहना था कि इस कालेज को लेकर युवाओं में काफी उत्साह था लेकिन विभागीय अधिकारियों की लूट खसोट ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।


छात्रा प्रेमसुधा का कहना था कि पॉलिटेक्निक काॅलेज को लेकर हमारे जैसे काफी छात्र छात्राएं खुश थे। उम्मीद थी कि अब तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। पर भ्रष्टाचार ने इस परियोजना के साथ साथ स्थानीय युवाओं की उम्मीदों का गला घोट दिया। जबकि दीनानाथ चौहान का कहना था कि काॅलेज यदि समय पर शुरू कर दिया गया होते तो क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों को गैर जनपद में जाकर शिक्षा नहीं लेनी पड़ती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed