गंगा लाल निशान के पार: बलिया में बाढ़ का संकट मंडराया, गांवों की ओर चला पानी, पलायन को मजबूर लोग
यूपी के बलिया में गंगा नदी का पानी लाल निशान को पार कर अब गांवों को अपनी जद में लेना शुरू कर दिया है। निचली बस्ती के लोग पलायन को मजबूर होने लगे हैं।
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बलिया में गंगा का जलस्तर लाल निशान पारकर मध्यम फ्लड लेबल की ओर बढ़ चला है। इस कारण क्षेत्र में बाढ़ का संकट मंडराने लगा है। शनिवार को ग्राम पंचायत गोपालपुर के ग्राम उदयीछपरा, दुबे छपरा गोपालपुर में पूर्व में कराए गए कटानरोधी कार्य के नीचे से गंगा का पानी अनुसूचित बस्ती की ओर जाना शुरू हो गया है। बस्ती के लोग पलायन को मजबूर होने लगे हैं। गांव में पानी फैलने की सूचना पर उपजिलाधिकारी बैरिया आत्रेय मिश्रा ने निरीक्षण किया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का दिशा-निर्देश दिया गया।
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने के कारण गंगा का पानी तटीय इलाके के निचले हिस्से में फैलने से उदई छपरा अनुसूचित बस्ती में भगदड़ मच गई है। लोग अपने घरों से सामान निकालकर एनएच 31 की ओर पहुंच रहे हैं। गांव के लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
रुक-रुककर हो रही बारिश ने बढ़ाई परेशानी
दुबे छपरा में हुए कटानरोधी कार्य के बगल में गंगा की बैंक रोल धारा का दबाव होने से किनारे पर कटान प्रारंभ हो गया है। हालांकि बाढ़ खंड के लोग उक्त स्थान पर मिट्टी से भरी बोरी डालकर कटान को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। देर शाम तक कोई सफलता नहीं मिल सकी। रुक-रुक हो रही वर्षा के कारण भी कटान पीडि़तों की समस्या कम होने के बजाय बढ़ने लगी है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार, गंगा का जलस्तर शनिवार दोपहर 12 बजे 58.140 मीटर रहा। साथ ही प्रति घंटा दो सेंटीमीटर का बढ़ाव बना हुआ है।
पानी बढ़ने से फसलें जलमग्न
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने के कारण गंगा के तटीय इलाके में बोई गई खड़ी फसल भी जलमग्न हो गई हैं। गंगा का पानी बढ़ने के कारण पचरुखिया मझौवा, महुआ दियरी, डंगरबाद शुकुल छपरा प्रबोधपुर रुद्रपुर, गायघाट के निचले इलाके में पानी फैल गया है। इससे बोई गई खड़ी फसल डूब गई है। किसानों के लाखों का नुकसान बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि गंगा का जलस्तर तीसरी बार बढ़ने के कारण हम सबकी बोई गई फसल बर्बाद हो गई है।
गोपालपुर में घुसा पानी
शनिवार सुबह से गोपालपुर गांव में गंगा के बाढ़ का पानी परमहंस कुम्हार के घर के पास से घुसने लगा है। गांव में अफरातफरी का माहौल है। निचले हिस्से के दहारी राम, भिखारी राम, दशरथ राम, मोहन राम, तेजू राम, नवमी राम आदि लोग अपने परिवार और पशु के साथ दुबे छपरा एनएच-31 के किनारे सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं।
गोपालपुर में पानी घुसने के साथ ही उदई छपरा, प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बुधनचक, मुरली छपरा, ग्राम पंचायत जगदेवा, आंशिक टेंगरहीं आदि गांव व इन गांव के लहलहाते खेतों पर गंगा के बाढ़ का पानी फैलने की आशंका बढ़ गई है। बाढ़ का पानी बढ़ने का यही रफ्तार रहा तो अगले 24 घंटे के अंदर आधा दर्जन गांव बाढ़ से घिर जाने और खेत टापू बन जाने की आशंका ग्रामीण व्यक्त कर रहे हैं। एसडीएम बैरिया आत्रेय मिश्र ने बताया कि बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए छोटी और मझौली नावें मंगाई गई हैं।
एक तरफ सूखा, दूसरी तरफ बाढ़ का खतरा
इस वर्ष मानसून के कमजोर पड़ने के कारण सूखे का सामना करना पड़ा। अब बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है। गंगा के जलस्तर में जिस गति से वृद्धि जारी है दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाएंगे। गंगा, टोंस, मगई नदी के किनारे सब्जी के खेतों में पानी घुसने लगा है।
पानी थोड़ा और बढ़ा तो कोट अंजोरपुर, मिल्की, मठिया, इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, गंगहरा, बरकंटी, कुल्हडि़या, बड़का खेत, पलिया खास, रैया खाड़ी, वेल्सीपार, सरवनपुर डेरा, गोविंदपुर टापू में तब्दील हो जाएंगे। इन गांवों के लोगों को अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ेगी। इन गांवों की बिजली सप्लाई भी काट दी जाती है। बाढ़ पीडि़तों को अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ती हैं।
अधूरे स्पर पर बन रहा बैक रोलिंग धारा का दबाव
बढ़ते जलस्तर के कारण नदी की बैक रोलिंग धारा का दबाव सीधे बलिया-बैरिया मार्ग के किलोमीटर 27.990 पर बने अधूरे स्पर पर बन रहा है। इससे स्पर में दरार पड़ गई हैं। वहीं, एनएच-31को बचाने के लिए गंगापुर से लेकर सुघर छपरा तक तीन स्पर पर बनाए गए है।
मानक के अनुरूप कार्य न होने के कारण हर जगह यह रिवेटमेंट गंगा की लहरों में बैठता जा रहा है। सोनार टोला के समीप बने आधे अधूरे पीचिंग कार्य ध्वस्त हो रहे हैं। बाढ़ के पानी से निचले इलाकों में पचरुखिया, मझौवां, धर्मपुरा, शुक्ल छपरा, बेलहरी, रुद्रपुर, गायघाट तक के पांच सौ एकड़ फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं।