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वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन: कार्यालयों से लेकर कोषागार तक रही बजट खपाने की तेजी
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बलिया। वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होने के कारण अधिकांश कार्यालयों में बजट खपाने का कार्य किया जा रहा है। खासकर कंटीजेंसी फंड को लेकर अधिकारी तत्पर रहते हैं क्योंकि वित्तीय वर्ष बीत जाने पर यह लैप्स हो जाता है। आमतौर पर विभागों से लेकर बैंकों का तक वित्तीय लेखा जोखा 31 मार्च को ही होता है। इसको देखते हुए गुरुवार को पूरे दिन सरकारी कार्यालयों में लेखा-जोखा से संबंधित कार्य होता रहा।
हालांकि कई विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि वित्तीय साल के अंतिम दिन कार्यों के सापेक्ष भुगतान के लिए बजट उपलब्ध करा दिया जाता है और उसे वित्तीय वर्ष की अवधि में ही भुगतान भी करना होता है। इसके चलते सभी तरह के बिल बाउचर आदि तैयार रखे जाते हैं ताकि बजट मिलने पर उसका उपयोग किया जा सके। उधर, वित्तीय साल का अंतिम दिन बैंको में मार्च क्लोजिंग रहा लेकिन सरकारी पैसों पर बैंकों की नजर रही ताकि बजट की धनराशि को हस्तांतरित किया जा सके। इसके अलावा कोषागार में भी पूरे दिन कर्मचारी विभिन्न विभागों से बजट के सापेक्ष मिले बिल वाउचर को लेकर कार्रवाई में जुटे रहे। हालांकि अब पहले की तरह हालात नहीं रहे और लाभार्थी परक योजनाओं के अधिकांश भुगतान का काम पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिए होता है। इसके अलावा विभागीय कार्यों व कंटीजेंसी मद में ही वित्तीय साल के अंतिम दिनों में शासन की ओर से बजट उपलब्ध कराया जाता है जिसे पूर्व में बने बिल आदि के आधार पर समायोजन करने का काम किया जाता है। कमोवेश सभी विभागों में वित्तीय साल के अंतिम दिनों में इस तरह का बजट मिलता है।
विकास भवन में स्थित जिला समाज कल्याण, जिला दिव्यांग जन कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण, डीआरडीए, जिला कृषि अधिकारी, डीपीआरओ, जिला विकास अधिकारी, जिला युुवा कल्याण, आरईएस आदि विभागों के कार्यालयों में कर्मचारी बजट के समायोजन में लगे रहे। उधर, कोषागार में भी कर्मचारी वित्तीय साल का अंतिम दिन होने के कारण व्यस्त रहे।
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हालांकि कई विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि वित्तीय साल के अंतिम दिन कार्यों के सापेक्ष भुगतान के लिए बजट उपलब्ध करा दिया जाता है और उसे वित्तीय वर्ष की अवधि में ही भुगतान भी करना होता है। इसके चलते सभी तरह के बिल बाउचर आदि तैयार रखे जाते हैं ताकि बजट मिलने पर उसका उपयोग किया जा सके। उधर, वित्तीय साल का अंतिम दिन बैंको में मार्च क्लोजिंग रहा लेकिन सरकारी पैसों पर बैंकों की नजर रही ताकि बजट की धनराशि को हस्तांतरित किया जा सके। इसके अलावा कोषागार में भी पूरे दिन कर्मचारी विभिन्न विभागों से बजट के सापेक्ष मिले बिल वाउचर को लेकर कार्रवाई में जुटे रहे। हालांकि अब पहले की तरह हालात नहीं रहे और लाभार्थी परक योजनाओं के अधिकांश भुगतान का काम पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के जरिए होता है। इसके अलावा विभागीय कार्यों व कंटीजेंसी मद में ही वित्तीय साल के अंतिम दिनों में शासन की ओर से बजट उपलब्ध कराया जाता है जिसे पूर्व में बने बिल आदि के आधार पर समायोजन करने का काम किया जाता है। कमोवेश सभी विभागों में वित्तीय साल के अंतिम दिनों में इस तरह का बजट मिलता है।
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विकास भवन में स्थित जिला समाज कल्याण, जिला दिव्यांग जन कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण, डीआरडीए, जिला कृषि अधिकारी, डीपीआरओ, जिला विकास अधिकारी, जिला युुवा कल्याण, आरईएस आदि विभागों के कार्यालयों में कर्मचारी बजट के समायोजन में लगे रहे। उधर, कोषागार में भी कर्मचारी वित्तीय साल का अंतिम दिन होने के कारण व्यस्त रहे।
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