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Ballia News: 1871 की पर्ची लेकर कनाडा से खड़सरा पहुंची चौथी पीढ़ी, पूर्वजों की मिट्टी की तलाश

Sun, 04 Oct 2026 11:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:33 PM IST
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Fourth generation arrives in Khadsara from Canada with a slip from 1871, seeking the soil of their ancestors.
पंदह विकास खंड के खड़सरा ग्राम पंचायत के बेलौना टोला में कनाडा के टोरंटो से आए दंपती 75 वर्षीय
पंदह (बलिया)। करीब 155 साल बाद पूर्वजों की मिट्टी की तलाश में कनाडा से चौथी पीढ़ी खड़सरा पहुंची तो भावुक हो उठी। हाथ में वर्ष 1871 की एक पुरानी पर्ची थी, जिस पर अंग्रेज अधिकारी के हस्ताक्षर और पूर्वजों का पता दर्ज था।
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इसी दस्तावेज को आधार बनाकर करीब 15 दिन की खोज के बाद असगर अली और उनकी पत्नी बर्नी कनाडा से विकास खंड पंदह के खड़सरा गांव के बेलौना टोला पहुंचे। पंचायत भवन पर ग्राम पंचायत सचिव मिथिलेश पांडेय से मुलाकात कर उन्होंने अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी जुटाई।
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असगर अली के पिता की दादी सुमैया वर्ष 1871 में करीब 14 वर्ष की उम्र में अपने भाई-बहनों के साथ गिरमिटिया मजदूर के रूप में कोलकाता से कनाडा चली गई थीं। उस समय उनके अन्य भाई-बहनों की उम्र करीब 10 और आठ वर्ष थी। कनाडा पहुंचने के बाद परिवार की पीढ़ियां वहीं बसती चली गईं। वर्षों बाद चौथी पीढ़ी ने अपने पूर्वजों की जन्मभूमि तलाशने का निर्णय लिया।
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असगर के पास पूर्वजों से जुड़ा केवल वर्ष 1871 का एक पुराना दस्तावेज था। उस पर अंग्रेज अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ पता दर्ज था।

इसी दस्तावेज के आधार पर उन्होंने ऑनलाइन खोज शुरू की। खोजबीन करते हुए पहले गाजीपुर पहुंचे, जहां दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें बलिया जनपद की ओर भेजा गया। बलिया पहुंचने के बाद पता चला कि उनके पूर्वजों का संबंध पंदह विकास खंड के खड़सरा गांव के बेलौना टोला से रहा है।

इसके बाद असगर अली अपनी पत्नी के साथ बेलौना पहुंचे। पंचायत भवन पर ग्राम पंचायत सचिव मिथिलेश पांडेय से मुलाकात कर उन्होंने अपने पूर्वजों से जुड़ी जानकारी साझा की। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह सटीक रूप से पता नहीं चल सका कि वर्तमान में वह परिवार किस घर या परिवार से जुड़ा हुआ है। सचिव ने उन्हें गांव और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने में सहयोग का भरोसा दिया। पड़ोसियों के संपर्क नंबर भी साथ ले गए: अपने पूर्वजों की मिट्टी तक पहुंचने की खुशी असगर और उनकी पत्नी के चेहरे पर साफ दिखाई दी।
भाषा की समस्या के बावजूद दोनों गांव के लोगों से बातचीत और जानकारी जुटाने का प्रयास करते रहे। उन्होंने आसपास के कुछ लोगों के मोबाइल नंबर भी लिए, ताकि आगे अपने परिवार की कड़ियों को जोड़ सकें। असगर ने दोबारा खड़सरा आने का भरोसा दिया है।
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एक पर्ची ने जोड़ दी 55 साल पुरानी कड़ी

करीब 155 साल पुराने दस्तावेज ने कनाडा में रहने वाले परिवार को उनके पूर्वजों की जन्मभूमि तक पहुंचा दिया। सुमैया की 14 वर्ष की उम्र में गांव छोड़ने के बाद उनकी अगली पीढ़ियां विदेश में बस गईं, लेकिन वर्षों बाद उनके वंशजों ने उसी पुराने पते के सहारे अपनी जड़ों को तलाश लिया। बेलौना पहुंचने के बाद असगर और उनकी पत्नी के लिए यह सिर्फ एक गांव की यात्रा नहीं, बल्कि अपने परिवार के इतिहास से दोबारा जुड़ने का भावुक पल था।
खड़सरा की प्रधान बीमा देवी ने कहा कि दंपती कनाडा से डेढ़ दशक बाद खड़सरा गांव आया था। उनका स्वागत किया गया, बुजुर्गों व पड़ोसियों से मुलाकात की और पूरी जानकारी ली। भविष्य में पुनः आने का वादा कर वापस लौट गए।
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