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बलिया: पूर्व एमएलए राम इकबाल ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल, कहा- दवा तो छोड़िए, अस्पताल में हवा के बिना मरे लोग
Sun, 27 Jun 2021 01:43 PM IST
उत्पल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 27 Jun 2021 01:43 PM IST
सार
भाजपा के फायर ब्रांड नेता एवं पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह शुक्रवार को अपने ही सरकार पर निशाना साधते नजर आए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में आए कोविड-19 के प्रकोप से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया।
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पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा के फायर ब्रांड नेता एवं पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह शुक्रवार को अपने ही सरकार पर निशाना साधते नजर आए। उन्होंने कहा कि दवा तो छोड़िए आम जनता अस्पतालों में हवा के बिना तड़प-तड़प के मरी है। वर्ष 2020 में आए कोविड-19 के प्रकोप से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया।
इस हृदयविदारक घटना पर जिम्मेदार लोगों को गाल नहीं बजाना चाहिए, बल्कि जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कोरोनाकाल को काले वर्ष के रूप में याद किया जाएगा। पूर्व विधायक बलिया के नगरा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोरोना में कोई ऐसा गांव नहीं है, जिस गांव में 10 लोग न मरे हों।
बलिया में सिर्फ 30 बेड का अस्पताल बिना आक्सीजन प्लांट के संचालित था। स्वास्थ्य महकमा चाहता तो पूरे जनपद के सीएचसी, पीएचसी को मिलाकर 1000 से 1500 बेड संचालित किए जा सकते थे, लेकिन कोई तैयारी नहीं थी। लाखों लोग हवा के बिना तड़प-तड़प कर मरे हैं। खेजुरी, दुबहड़, नगरा व रसड़ा को कोविड सेंटर बनाए जाने की मांग की गई थी।
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इस हृदयविदारक घटना पर जिम्मेदार लोगों को गाल नहीं बजाना चाहिए, बल्कि जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कोरोनाकाल को काले वर्ष के रूप में याद किया जाएगा। पूर्व विधायक बलिया के नगरा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोरोना में कोई ऐसा गांव नहीं है, जिस गांव में 10 लोग न मरे हों।
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बलिया में सिर्फ 30 बेड का अस्पताल बिना आक्सीजन प्लांट के संचालित था। स्वास्थ्य महकमा चाहता तो पूरे जनपद के सीएचसी, पीएचसी को मिलाकर 1000 से 1500 बेड संचालित किए जा सकते थे, लेकिन कोई तैयारी नहीं थी। लाखों लोग हवा के बिना तड़प-तड़प कर मरे हैं। खेजुरी, दुबहड़, नगरा व रसड़ा को कोविड सेंटर बनाए जाने की मांग की गई थी।
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34 लाख की आबादी वाले जिले में न्यूरो सर्जन, कार्डियोलोजिस्ट नहीं है। किडनी, लीवर के डॉक्टर नहीं है। गेहूं खरीद पर पूर्व विधायक श्री सिंह ने कहा कि जब घर-घर घूमकर कोरोना की वैक्सीन लगाई जा सकती है तो किसानों की फसल क्यों नहीं खरीदी जा सकती है। 15 मई से सुचारु रूप से खरीदारी शुरू हुई, जब बारिश का मौसम शुरू हो गया।
ट्रालियों पर मशीन लाद कर किसानों के घर जाकर गेहूं की खरीद करनी चाहिए थी। डीजल का मूल्य बढ़ने के कारण जुताई, सिंचाई, खाद, बीज का दाम बढ़ गया है। प्रति बीघा जुताई पर ही 12 सौ रुपये खर्च आ रहा है। सरकार प्रति क्विंटल 72 रुपये बढ़ाती है। ऐसे में किसान की आय दोगुनी कैसे होगी।
ट्रालियों पर मशीन लाद कर किसानों के घर जाकर गेहूं की खरीद करनी चाहिए थी। डीजल का मूल्य बढ़ने के कारण जुताई, सिंचाई, खाद, बीज का दाम बढ़ गया है। प्रति बीघा जुताई पर ही 12 सौ रुपये खर्च आ रहा है। सरकार प्रति क्विंटल 72 रुपये बढ़ाती है। ऐसे में किसान की आय दोगुनी कैसे होगी।