फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Every time the effect of some wave is shown

हर बार दिखा है किसी न किसी लहर का असर

Mon, 21 Feb 2022 11:34 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 11:34 PM IST
विज्ञापन
Every time the effect of some wave is shown
बलिया। विधानसभा चुनाव में जनपद की सभी सीटों पर कभी न कभी सभी प्रमुख दलों की लहर दिखी है। किसी दल के पक्ष या विपक्ष में आंधी चलने पर उन्हें धरातल का मुंह भी देखना प़ड़ा है। बीच के कुछ चुनावों को चुनावों को छोड़ दें तो 1993 तक यहां कांग्रेस का प्रभाव रहा। कभी आठ में से सात सीटें अपने पास रखने वाली कांग्रेस को 1996 के बाद एक सीट के लिए तरसना पड़ रहा है। जनपद में सपा और बसपा से पहले भाजपा का यहां से खाता खुला था। 1991 में भाजपा को यहां से पहली जीत मिली थी।
विज्ञापन

आजादी के बाद से प्रदेश में 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। 18वीं विधानसभा के लिए मतदान जारी है। 1951 और 1957 के विधानसभा चुनाव में जनपद की आठ विधानसभाओं में कांग्रेस का सात-सात सीट पर कब्जा रहा। 1962 में ये संख्या घटकर पांच, 1967 और 1969 में तीन-तीन, तो 1974 में बढ़कर फिर से छह विधानसभा सीट पर पहुंच गई। इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस के विरोध में लहर चली तो कांग्रेस 1977 में एक सीट पर सिमट गई। उस समय सात सीटों पर जनता पार्टी के विधायकों ने कब्जा जमाया था। तीन वर्ष बाद 1980 के चुनाव में कांग्रेस फिर छह सीटों पर आ गई। 1985 के विधानसभा चुनाव में फिर कांग्रेस विरोधी लहर में मात्र एक सीट मिली। अन्य सीटों पर अन्य सीटों पर जनता पार्टी और लोकदल के प्रत्याशियों ने कांग्रेस के उम्मीदवारों को मात दी थी। 1980 के बाद कांग्रेस वो दमखम फिर से नहीं दिखा पाई। हालांकि 1989 में दो, 1991 में तीन और 1993 में फिर दो सीटों पर काबिज रही। 1989 के विधानसभा चुनाव में जनपद के बसपा की इंट्री हो चुकी थी। हालांकि उसे जीत नहीं मिली थी, लेकिन दो सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर पहुंचे थे। खाता खोलने के लिए उसे 1993 का इंतजार करना पड़ा। 1991 में सपा और बसपा से पहले भाजपा ने अपना खाता। सीयर सीट से हरिनरायन ने पहली बार जीत दर्ज की। 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा का एक साथ जनपद में खाता खुला था। जनपद में तीन सीट पर सपा, दो पर बसपा के प्रत्याशी जीते थे। सपा से सीयर से शारदानंद अंचल, सिकंदरपुर से दीनानाथ चौधरी, कोपीचिट से अंबिका चौधरी चुनाव जीते थे। बसपा से रसड़ा सुरक्षित सीट से घूरा राम और चिलकहर से संग्राम सिंह यादव चुनाव जीते थे। भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली थी।
विज्ञापन

1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तीन प्रत्याशी चुनाव जीते थे। तब रसड़ा, सीयर और द्वाबा विधानसभा में जीत मिली थी। सीयर से हरिनरायन दूसरी बार विधायक बने थे। इसके बाद 2017 में भाजपा अपने पूरे उफान पर दिखी। तब मोदी लहर में उसे कुल पांच सीटें मिली। बलिया, बैरिया, सिंकदरपुर, बेल्थरारोड और फेफना विधानसभा में उसे जीत मिली। 1993 के बाद सपा के लिए सबसे अच्छा चुनाव 2002 और 2012 का रहा। 2002 में उसके चार और 2012 में पांच प्रत्याशी जीत कर विधानसभा में पहुंचे। 2007 में सपा विरोधी लहर में बसपा के छह विधायक यहां से चुनाव जीते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

किस दल को मिली कितनी सीटें
वर्ष-भाजपा-सपा-बसपा-कांग्रेस
1951-0-0-0-7
1957-0-0-0-7
1962-0-0-0-5
1967-0-0-0-3
1969-0-0-0-3
1974-0-0-0-6
1977-0-0-0-1
1980-0-0-0-6
1985-0-0-0-1
1989-0-0-0-2
1991-1-0-0-3
1993-1-3-2-2
1996-3-1-1-1
2002-2-4-1-0
2007-0-2-6-0
2012-1-5-1-0
2017-5-1-1-0
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed