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Ballia News: सरयू की कटान से 6 गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडराया
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बैरिया क्षेत्र के गोपालनगर टाड़ी गांव को ठोकर मारती सरयू नदी की लहरें।संवाद
- फोटो : ARchive
बैरिया। सरयू नदी की कटान से सुरेमनपुर दियरांचल के 6 गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है।
उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बड़ी कटानरोधी परियोजना शुरू कराने और प्रभावित गांवों को बचाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरयू नदी की धारा लगातार उपजाऊ कृषि भूमि को निगल रही है। कई किसान अपनी जमीन गंवाने के बाद मजदूरी करने को मजबूर हैं। अधिसिझुआ, चांददियर, चाईछपरा, मधुबनी, गंगापुर, सुरेमनपुर, दुर्जनपुर, हनुमानगंज, नारायणगढ़, झरकटहां, नवकागांव और देवपुर मठिया सहित कई गांवों की कृषि भूमि कटान की चपेट में है।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में दावा किया है कि पिछले दस वर्षों में सरयू नदी में करीब 500 मकान समा चुके हैं। वहीं, लगभग 10 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। कटान की यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में कई गांवों का अस्तित्व मिटने का खतरा बढ़ जाएगा। इससे बड़ी आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है।
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गोपालनगर ग्राम पंचायत की प्रशासक किरण देवी, मानगढ़ के प्रशासक राजकुमार यादव और शिवाल के प्रशासक परमात्मा गोंड के अलावा विजय कुमार यादव, सुनील यादव और चंद्रशेखर यादव ने मुख्यमंत्री से कटान की समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने की अपील की। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार प्रभावित गांवों, आबादी और कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
उपजिलाधिकारी रमेशचंद वर्मा ने बताया कि कटान पीड़ितों का पत्रक मिला है, सरयू नदी का कटान की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। पुनः कटान रोकने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट देने के साथ ही बाढ़ विभाग को लिखा जाएगा।
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उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बड़ी कटानरोधी परियोजना शुरू कराने और प्रभावित गांवों को बचाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरयू नदी की धारा लगातार उपजाऊ कृषि भूमि को निगल रही है। कई किसान अपनी जमीन गंवाने के बाद मजदूरी करने को मजबूर हैं। अधिसिझुआ, चांददियर, चाईछपरा, मधुबनी, गंगापुर, सुरेमनपुर, दुर्जनपुर, हनुमानगंज, नारायणगढ़, झरकटहां, नवकागांव और देवपुर मठिया सहित कई गांवों की कृषि भूमि कटान की चपेट में है।
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ग्रामीणों ने ज्ञापन में दावा किया है कि पिछले दस वर्षों में सरयू नदी में करीब 500 मकान समा चुके हैं। वहीं, लगभग 10 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। कटान की यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में कई गांवों का अस्तित्व मिटने का खतरा बढ़ जाएगा। इससे बड़ी आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है।
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गोपालनगर ग्राम पंचायत की प्रशासक किरण देवी, मानगढ़ के प्रशासक राजकुमार यादव और शिवाल के प्रशासक परमात्मा गोंड के अलावा विजय कुमार यादव, सुनील यादव और चंद्रशेखर यादव ने मुख्यमंत्री से कटान की समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने की अपील की। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार प्रभावित गांवों, आबादी और कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
उपजिलाधिकारी रमेशचंद वर्मा ने बताया कि कटान पीड़ितों का पत्रक मिला है, सरयू नदी का कटान की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। पुनः कटान रोकने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट देने के साथ ही बाढ़ विभाग को लिखा जाएगा।