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बच्चों को शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाएं, शादी करना ही फर्ज नहीं : जया किशोरी

Thu, 29 Oct 2026 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:15 AM IST
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Educate children and make them self-reliant; getting them married is not the only duty: Jaya Kishori
बांसडीह रोड क्षेत्र छोड़हर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रवचन करती जया किशोरी। जागरूक प
बांसडीह रोड। छोड़हर गांव में बुधवार से प्रसिद्ध कथावाचक जया किशोरी की श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई। कथा के पहले दिन पूरा पंडाल राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा।
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भजन गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो, राधा रमण हरि गोपाल बोलो से वातावरण भक्तिमय हो गया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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कथा के दौरान जया किशोरी ने शिक्षा, संस्कार, आत्मनिर्भरता और ईश्वर के प्रति विश्वास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को जरूर शिक्षित करें और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा बनाएं। बेटा हो या बेटी, सभी को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है, लेकिन बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कोई माता-पिता नहीं चाहता कि उनकी बेटी ससुराल में दुख पाए। बेटी आत्मनिर्भर होगी तो अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस भी जुटा सकेगी।
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जया किशोरी ने कहा कि बच्चों की शादी कर देने भर से माता-पिता की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। बच्चों को शिक्षा, संस्कार, भावनाओं और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना भी जरूरी है। माता सीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजा जनक ने उनके लिए महल जैसा घर तलाशा था, लेकिन उन्हें वनवास में रहना पड़ा। इसके बावजूद माता सीता ने अपने संस्कार, धैर्य और भावनात्मक मजबूती के बल पर कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इसलिए बच्चों को केवल सुख-सुविधाएं देना ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों से लड़ने योग्य बनाना भी जरूरी है।
पूर्व मंत्री नारद राय ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर और कथावाचक जया किशोरी को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।
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रिश्तों में उलझकर भगवान को न भूलें
ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए जया किशोरी ने कहा कि मनुष्य दुनिया के रिश्तों में उलझकर भगवान को भूल जाता है। जब रिश्तों से निराशा मिलती है, तब उसे ईश्वर याद आते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य इस दुनिया में अकेला आया है और अकेला ही जाएगा, जबकि भगवान पहले दिन से उसके साथ हैं। उन्होंने कहा कि दान केवल धन का नहीं होता, बल्कि तन, मन और धन से किया गया सहयोग भी दान है। किसी को प्रसन्न कर देना और उसके चेहरे पर मुस्कान लाना भी दान का ही एक रूप है। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री नारद राय, हर्षित गुप्ता, पंडित प्रशांत मिश्रा, पंडित शुभम चौबे, धीरज मौर्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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भागवत कथा से मिलती है जीवन को सही दिशा : सूर्य प्रताप शाही

श्रीमद्भागवत कथा में पहुंचे कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा दिखाने के साथ अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देती है। कर्म के माध्यम से ही राजयोग और ज्ञानयोग का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व होता है। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को धर्म, कर्म और जीवन के मूल्यों की समझ मिलती है। उन्होंने युवा पीढ़ी से भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की अपील की। संवाद

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संतोष, प्रेम और सद्भाव सुखी जीवन का आधार : राजभर
कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने संतोष, प्रेम और सद्भाव को सुखी जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर से प्राप्त सुख-सुविधाओं के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए। दूसरों की धन-संपत्ति देखकर उनसे तुलना करने के बजाय अपने जीवन में संतोष का भाव रखना चाहिए। ''''संतोषम परम सुखम'''' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संतोष में ही परम सुख निहित है।
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