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विकास परियोजनाओं से बदलेगी जिले की तस्वीर : दयाशंकर सिंह
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कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में बलिया जिले के स्थापना दिवस पर मां सरस्वती के
- फोटो : सांकेतिक
बलिया। संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान की गौरवशाली परंपरा को संजोए बलिया का 186वां स्थापना दिवस रविवार को गंगा बहुद्देशीय सभागार में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में जिले के ऐतिहासिक गौरव को याद करने के साथ विकास की भावी योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया अपनी गौरवशाली विरासत को सहेजते हुए विकास की नई इबारत लिख रहा है। आने वाले समय में विभिन्न विकास परियोजनाओं से जिले की तस्वीर बदलेगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से बलिया की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत की झलक दिखाई।
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परिवहन मंत्री ने कहा कि एक नवंबर 1988 को गाजीपुर से अलग होकर बलिया स्वतंत्र जनपद बना था। उस समय जिले में तीन तहसीलें थीं। आज जनपद ने प्रशासनिक और विकास के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में बलिया का योगदान अविस्मरणीय है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मंगल पांडेय ने अपनी वीरता से देश का गौरव बढ़ाया, वहीं 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर आजादी का इतिहास रचा।
मंत्री ने जिले में संचालित विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना, बाईपास निर्माण, भृगु कॉरिडोर, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और गरीबों के लिए आवास जैसी योजनाओं पर काम हो रहा है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि बलिया अपनी ऐतिहासिक पहचान को कायम रखते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
समारोह में डीएम ज्ञानेंद्र सिंह, सीडीओ आलोक कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, सीआरओ गुलशन, सीएमओ डॉ. अभय कुमार राय, डीडीओ आनंद प्रकाश आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया अपनी गौरवशाली विरासत को सहेजते हुए विकास की नई इबारत लिख रहा है। आने वाले समय में विभिन्न विकास परियोजनाओं से जिले की तस्वीर बदलेगी।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से बलिया की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत की झलक दिखाई।
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परिवहन मंत्री ने कहा कि एक नवंबर 1988 को गाजीपुर से अलग होकर बलिया स्वतंत्र जनपद बना था। उस समय जिले में तीन तहसीलें थीं। आज जनपद ने प्रशासनिक और विकास के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में बलिया का योगदान अविस्मरणीय है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मंगल पांडेय ने अपनी वीरता से देश का गौरव बढ़ाया, वहीं 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देकर आजादी का इतिहास रचा।
मंत्री ने जिले में संचालित विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना, बाईपास निर्माण, भृगु कॉरिडोर, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और गरीबों के लिए आवास जैसी योजनाओं पर काम हो रहा है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि बलिया अपनी ऐतिहासिक पहचान को कायम रखते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
समारोह में डीएम ज्ञानेंद्र सिंह, सीडीओ आलोक कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, सीआरओ गुलशन, सीएमओ डॉ. अभय कुमार राय, डीडीओ आनंद प्रकाश आदि अधिकारी मौजूद रहे।

कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में बलिया जिले के स्थापना दिवस पर मां सरस्वती के- फोटो : सांकेतिक