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बलिया बदनाम हुआ : प्रतिबंध के बावजूद गंगा को छलनी कर रहा है खनन माफिया, पुलिस-प्रशासन की शह

Sat, 16 Apr 2022 05:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा सूरज शुक्ला, बलिया
सूरज शुक्ला, बलिया Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 16 Apr 2022 05:39 AM IST
सार

बलिया जिले की करीब 70-80 किमी की सीमा से होकर गंगा नदी गुजरती है। इस क्षेत्र में थोड़ी-थोड़ी दूर पर जेसीबी और पोकलैंड मशीन लगाकर खनन किया जा रहा है। यह पूरा अवैध कारोबार पुलिस-प्रशासन की शह पर जारी है।

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Despite the ban, the mining mafia is straining the Ganga river
गंगा में अवैध खनन.... फाइल चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गंगा में खनन पर प्रतिबंध के बावजूद माफिया इसे दिन-रात छलनी कर रहे हैं। बलिया जिले की करीब 70-80 किमी की सीमा से होकर गंगा नदी गुजरती है। इस क्षेत्र में थोड़ी-थोड़ी दूर पर जेसीबी और पोकलैंड मशीन लगाकर खनन किया जा रहा है। यह पूरा अवैध कारोबार पुलिस-प्रशासन की शह पर जारी है। न कोई रोकटोक न कोई सवाल-जवाब। खनन माफिया बेखौफ होकर धंधे में लगे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में पूरे खेल का राजफाश हो गया।

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जिले में जयप्रकाश नगर से कोटवा नारायणपुर तक जगह-जगह खनन जारी है। माफिया यहां से यूपी के कई जिलों के अलावा बिहार में भी खेप भेजते हैं। ट्रैक्टर और डंपर दिन-रात रेत ढोने में जुटे रहते हैं। अधिकतर खनन रात के अंधेरे में होता है, लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां दिन में भी जारी रहता है। ऐसे कई ठिकानों पर अमर उजाला की टीम पहुंची, जहां का पूरा अवैध धंधा कैमरे में कैद हुआ। 
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इस तरह करते हैं खेल
बाढ़ के समय तराई के इलाकों के खेतों में बड़े पैमाने पर बालू जमा हो जाती है। इसके लिए नियम है कि किसान को तीन महीने का लाइसेंस दिया जाएगा। इसके आधार पर किसान खेत से बालू निकलवा सकता है। इसमें माफिया खेल करते हैं।  

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  • एक जानकार ने बताया कि माफिया किसानों से बातचीत कर उनको लाइसेंस दिलवाते हैं। इसके बाद मनचाही जगह से बालू ले जाते हैं। कोई सवाल करता है तो लाइसेंस का हवाला देते हैं। इसी तरह पूरा खेल चल रहा है।

जेसीबी से बराबर किए बालू के टीले
अवैध खनन का मामला सुर्खियों में आने पर शुक्रवार को प्रभारी उप जिलाधिकारी राहुल यादव व क्षेत्राधिकारी अशोक कुमार मिश्रा ने गंगा तट, शिवपुर घाट व सती घाट का औचक निरीक्षण किया तो लाखों रुपये का लाल बालू मौके पर डंप मिला। इस संबंध में अधिकारियों ने खनन विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, अधिकारियों के आने के पहले ही पुलिस ने जेसीबी लगा कर बालू के ऊंचे टीलों को बराबर करा दिया था। 

कई टन बालू का लगा ढेर बारिश में होगा करोड़ों का खेल
नरही थाना क्षेत्र के करीब एक दर्जन इलाकों में सबसे अधिक अवैध खनन किया जा रहा है। खनन माफिया ने कई टन बालू जमा करना शुरू कर दिया है। यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है। जब बारिश का मौसम आएगा तब वह इसे और ऊंचे दामों पर बेचेंगे। नरही इलाके के एक स्कूल के पीछे माफिया ने डंपिंग यार्ड बना रखा है। इसे कैमरे में कैद किया गया है। यहां पर भी जब टीम पहुंची तो जो लोग काम कर रहे थे, वहां से भाग निकले।

अफसरों को नहीं दिखता ये अवैध कारोबार
डीएम, एसपी, खनन अधिकारी जैसे तमाम अफसरों की जिले में फौज है। बच्चे-बच्चे को खनन के बारे में जानकारी है। किसी से भी बात करो वह खनन माफिया के नाम से लेकर खनन कहां-कहां हो रहा है, इनकी जानकारी दे देगा। मगर यह सब इन जिम्मेदार अफसरों को नहीं दिखाई दे रहा। या ये कहें कि सांठगांठ की वजह से अवैध कारोबार को नजरअंदाज करते हैं।



बीच गंगा में खनन
गंगा किनारे तो छोड़िए, बीचों-बीच जेसीबी लगी हैं। कई-कई बीघे में रेत निकालकर खाई बना दी गई है। वहां आसानी से खनन होता रहता है। अमर उजाला टीम पहुंची तो जेसीबी व डंपर चालक वहां से चले गए। 

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