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गैंगरेप में दो को दस साल कैद, डॉक्टर बरी
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Sat, 07 Nov 2015 11:44 PM IST
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शहर से सटे शारदा नर्सिंग होम में पांच माह पूर्व हुए बहुचर्चित गैंगरेप मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अश्वनी कुमार सिंह की अदालत ने शनिवार को दो अभियुक्तों को दस-दस साल के सश्रम कारावास और `20-20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई, वहीं मुकदमे में मुख्य आरोपी बनाए गए नर्सिंग होम संचालक डा. जेपी शुक्ल को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया।
गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी मां का इलाज बलिया के तीखमपुर स्थित शारदा नर्सिंगहोम में चल रहा था।
वह मां के साथ वहीं थी। उसके पिता पैसे का इंतजाम करने के लिए घर गए थे। 22 मई 2015 की रात आठ बजे अस्पताल के डा. सर्वोत्तम पांडेय और शिवम चौबे ने किशोरी से कहा कि डाक्टर जेपी शुक्ला आपको ऊपर बुला रहे हैं।
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ऊपर जाने पर डा. जेपी शुक्ला, सर्वोत्तम, शिवम ने मेरे साथ सामूहिक दुष्कर्म किया तथा इसकी शिकायत थाने में न करने की धमकी दी। इस मामले में पीडि़ता की तहरीर पर कोतवाली थाने में मुकदमा पंजीकृत होने के बाद आरोपी सर्वोत्तम और शिवम को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन आरोपी डाक्टर फरार हो गए।
इसके लिए काफी दिनों तक जिले में जनांदोलन चला, इसके बाद डाक्टर ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए मामले के दो आरोपी सर्वोत्तम और शिवम को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में डा. जेपी शुक्ल को बरी कर दिया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद, गोरखनाथ यादव तथा बचाव पक्ष से कौशल सिंह और रंगबली सिंह ने पैरवी की।
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गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी मां का इलाज बलिया के तीखमपुर स्थित शारदा नर्सिंगहोम में चल रहा था।
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वह मां के साथ वहीं थी। उसके पिता पैसे का इंतजाम करने के लिए घर गए थे। 22 मई 2015 की रात आठ बजे अस्पताल के डा. सर्वोत्तम पांडेय और शिवम चौबे ने किशोरी से कहा कि डाक्टर जेपी शुक्ला आपको ऊपर बुला रहे हैं।
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ऊपर जाने पर डा. जेपी शुक्ला, सर्वोत्तम, शिवम ने मेरे साथ सामूहिक दुष्कर्म किया तथा इसकी शिकायत थाने में न करने की धमकी दी। इस मामले में पीडि़ता की तहरीर पर कोतवाली थाने में मुकदमा पंजीकृत होने के बाद आरोपी सर्वोत्तम और शिवम को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन आरोपी डाक्टर फरार हो गए।
इसके लिए काफी दिनों तक जिले में जनांदोलन चला, इसके बाद डाक्टर ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए मामले के दो आरोपी सर्वोत्तम और शिवम को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में डा. जेपी शुक्ल को बरी कर दिया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद, गोरखनाथ यादव तथा बचाव पक्ष से कौशल सिंह और रंगबली सिंह ने पैरवी की।