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सात क्लर्क व लेखाकार पर केस
ballia
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:05 PM IST
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जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग में सालों पहले हुए 12 करोड़ के जीपीएफ घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ के निर्देश पर पत्रावलियों के रखरखाव में लापरवाही बरतने के आरोप में डीआईओएस ने विभाग के सात पटल सहायक व लेखाकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
वर्ष 1994-95 व वर्ष 2003 से 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से कुल 104 अनियमित शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया गया। हालंाकि इस मामले का खुलासा सबसे पहले वर्ष 2002 में हुई और विजिलेंस टीम ने 379 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया और इसके बाद टीम ने शासन को जांच रिपोर्ट भी सौंपी। लेकिन सत्ता तक पहुंच रखने वाले अधिकारियों के जुगाड़ से सालों तक मामला दबा रहा।
इतना ही नहीं इसके बाद भी वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया जाता रहा। मार्च महीने में शासन के निर्देश पर वित्त विभाग विजिलेंस के छह अधिकारियों की दो टीमें जिले में पहुंची। टीम ने मामले से संबंधित कई पड़ताल की। बताया जाता है कि टीम की ओर से जीपीएफ से संबंधित पत्रावली की मांग की गई जिसे प्रस्तुत नहंीं किया गया। एक पखवारा भी शासन के निर्देश पर आडिट टीम में जिले में पहुंची थी और जीपीएफ से संबंधित पत्रावलियों की मांग की लेकिन उपलब्ध नहीं कराया गया। टीम ने माना कि पत्रावलियों का कस्टोडियन संबंधित पटल सहायक व लेखाकार होते हैं।
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टीम की रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ ने दोषी मिले पटल सहायक तथा लेखाकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश डीआईओएस को दिया। डीआईओएस अमरनाथ राय की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने पटल सहायक व संबंधित लेखकार अमरनाथ राय, सूर्यप्रकाश पांडेय, उमेश कुंवर, श्याम नारायण शुक्ला, द्वारिका मिश्र, विजय यादव तथा सुरेन्द्र चौबे के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में दो अन्य दोषी पटल सहायक तथा संबंधित लेखाकार लल्लन प्रसाद व पंचानंद का निधन हो चुका है।
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वर्ष 1994-95 व वर्ष 2003 से 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से कुल 104 अनियमित शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया गया। हालंाकि इस मामले का खुलासा सबसे पहले वर्ष 2002 में हुई और विजिलेंस टीम ने 379 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया और इसके बाद टीम ने शासन को जांच रिपोर्ट भी सौंपी। लेकिन सत्ता तक पहुंच रखने वाले अधिकारियों के जुगाड़ से सालों तक मामला दबा रहा।
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इतना ही नहीं इसके बाद भी वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया जाता रहा। मार्च महीने में शासन के निर्देश पर वित्त विभाग विजिलेंस के छह अधिकारियों की दो टीमें जिले में पहुंची। टीम ने मामले से संबंधित कई पड़ताल की। बताया जाता है कि टीम की ओर से जीपीएफ से संबंधित पत्रावली की मांग की गई जिसे प्रस्तुत नहंीं किया गया। एक पखवारा भी शासन के निर्देश पर आडिट टीम में जिले में पहुंची थी और जीपीएफ से संबंधित पत्रावलियों की मांग की लेकिन उपलब्ध नहीं कराया गया। टीम ने माना कि पत्रावलियों का कस्टोडियन संबंधित पटल सहायक व लेखाकार होते हैं।
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टीम की रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ ने दोषी मिले पटल सहायक तथा लेखाकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश डीआईओएस को दिया। डीआईओएस अमरनाथ राय की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने पटल सहायक व संबंधित लेखकार अमरनाथ राय, सूर्यप्रकाश पांडेय, उमेश कुंवर, श्याम नारायण शुक्ला, द्वारिका मिश्र, विजय यादव तथा सुरेन्द्र चौबे के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में दो अन्य दोषी पटल सहायक तथा संबंधित लेखाकार लल्लन प्रसाद व पंचानंद का निधन हो चुका है।