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मूकबधिर किशोरी से दुष्कर्म के अभियुक्त को दस साल की कैद
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Mon, 25 Apr 2016 08:22 PM IST
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दुष्कर्म
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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दोकटी थाना क्षेत्र के एक गांव में सालभर पहले मूकबधिर किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी सुजीत पाठक को दस वर्ष के सश्रम कारावास तथा अर्थदंड से दंडित किया। जबकि दूसरे आरोपी के किशोर घोषित होने पर उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई।
अभियोजन के अनुसार दोकटी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने तहरीर दर्ज कराया था कि उसकी नाबालिग मूक बधिर पुत्री होली के दिन छह मार्च 2015 को गांव में अबीर-गुलाल लेकर खेलने गई थी। समय करीब आठ बजे उसके ही गांव का आरोपी सुजीत पाठक ने उसे पकड़कर अपने घर ले गया और दुष्कर्म किया।
आरोपी का दूसरे नाबालिग साथी ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में साक्ष्य पूर्ण होने के बाद अदालत ने आरोपी सुजीत पाठक के खिलाफ आरोप साबित पाया। उसे दोषसिद्ध करार देते हुए दस वर्ष की सश्रम कारावास तथा 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
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निर्धारित अर्थदंड में से 40 हजार रुपये पीड़िता को भुगतान करने का आदेश कोर्ट ने दिया। मामले के दूसरे आरोपी को नाबालिग होने की दशा में कोर्ट ने उसकी पत्रावली को किशोर न्याय बोर्ड को सुपुर्द कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण ने तर्क प्रस्तुत किया।
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अभियोजन के अनुसार दोकटी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ने तहरीर दर्ज कराया था कि उसकी नाबालिग मूक बधिर पुत्री होली के दिन छह मार्च 2015 को गांव में अबीर-गुलाल लेकर खेलने गई थी। समय करीब आठ बजे उसके ही गांव का आरोपी सुजीत पाठक ने उसे पकड़कर अपने घर ले गया और दुष्कर्म किया।
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आरोपी का दूसरे नाबालिग साथी ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में साक्ष्य पूर्ण होने के बाद अदालत ने आरोपी सुजीत पाठक के खिलाफ आरोप साबित पाया। उसे दोषसिद्ध करार देते हुए दस वर्ष की सश्रम कारावास तथा 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
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निर्धारित अर्थदंड में से 40 हजार रुपये पीड़िता को भुगतान करने का आदेश कोर्ट ने दिया। मामले के दूसरे आरोपी को नाबालिग होने की दशा में कोर्ट ने उसकी पत्रावली को किशोर न्याय बोर्ड को सुपुर्द कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण ने तर्क प्रस्तुत किया।