{"_id":"573349904f1c1bba3f919873","slug":"jaanleva-hamle-k-jurm-me-saza","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानलेवा हमले के जुर्म में कैद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जानलेवा हमले के जुर्म में कैद
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 11 May 2016 08:32 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली उच्च न्यायलय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छोटे भाई पर जानलेवा हमला करने के जुर्म में कोर्ट ने भाई पवन कुमार को दस वर्ष सश्रम कारावास तथा दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार सिंह की अदालत में हुई।
अभियोजन के मुताबिक बांसडीहरोड थाना क्षेत्र सरया गांव निवासी वादी मुकदमा अखिलेश कुमार पांडेय ने थाने में तहरीर दी थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि मेरे भाई की शादी सोनवानी गांव में हुई थी। मेरे भाई को यह शक बराबर रहता था कि मेरी पत्नी सीमा पांडेय का नाजायज संबंध मेरे भाई से है।
इसी शक के आधार पर उसने मुझे जान से मारने की नियत से छह अप्रैल 2006 को तमंचे से फायर झोंक दिया। जिसकी गोली मेरे सीने में लगी। घायलावस्था में मुझे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोर्ट में सुनवाई करते हुए आरोपी भाई पवन कुमार पांडेय को जानलेवा हमला का दोषी करार देते हुए उसे दस वर्ष के सश्रम कारावास तथा दस हजार का अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद ने तर्क प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन के मुताबिक बांसडीहरोड थाना क्षेत्र सरया गांव निवासी वादी मुकदमा अखिलेश कुमार पांडेय ने थाने में तहरीर दी थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि मेरे भाई की शादी सोनवानी गांव में हुई थी। मेरे भाई को यह शक बराबर रहता था कि मेरी पत्नी सीमा पांडेय का नाजायज संबंध मेरे भाई से है।
विज्ञापन
इसी शक के आधार पर उसने मुझे जान से मारने की नियत से छह अप्रैल 2006 को तमंचे से फायर झोंक दिया। जिसकी गोली मेरे सीने में लगी। घायलावस्था में मुझे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोर्ट में सुनवाई करते हुए आरोपी भाई पवन कुमार पांडेय को जानलेवा हमला का दोषी करार देते हुए उसे दस वर्ष के सश्रम कारावास तथा दस हजार का अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण प्रसाद ने तर्क प्रस्तुत किया।
विज्ञापन