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पत्नी से मिलने की ख्वाहिश रह गई अधूरी
Updated Sat, 29 Sep 2018 10:44 PM IST
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बलिया। छपरा से फरुखाबाद को जाने वाली उत्सर्ग एक्सप्रेस पर चढ़ने के दौरान पैर फिसलने से आवास विकास कॉलोनी निवासी रिटायर्ड सूबेदार परमात्मा नंद सिंह की शुक्रवार की देर रात मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी लखनऊ में रहती है, जिससे वह मिलने के लिए उत्सर्ग एक्सप्रेस से जाने के लिए बलिया स्टेशन पर पहुंचे थे। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। पत्नी से मिलने की ख्वाहिश अधूरी रह गई।
सेना में सूबेदार मेजर के पद से वर्ष 2007 में रिटायर्ड होने के बाद परमात्मानंद सिंह ने आवास विकास कालोनी में अपना मकान बनाया। इसके बाद अधिकतर समय खेतीबारी या फिर सामाजिक कार्यों में लगाते थे। छोटा पुत्र राकेश सिंह एमएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई करता है। वहीं बड़े पुत्र प्रमोद सिंह गांव में रहकर खेतीबारी का करते हैं। परिवारीजनों की मानें तो उनकी पत्नी काफी दिनों से लखनऊ में रह रही थी। इधर कुछ दिन पूर्व उनकी पत्नी ने उन्हें फोन करके लखनऊ आकर उसे लेकर जाने की बात कही थी। पत्नी के बुलावे पर वह उसे लेने के लिए शुक्रवार को उत्सर्ग एक्सप्रेस लखनऊ जाने के लिए निकले थे। निकलने से पहले पत्नी को फोन पर आने की सूचना भी दिए थे। कहा था कि सुबह तक लखनऊ पहुंच जाऊंगा। उधर, हादसे की खबर मिलते ही पत्नी व परिवार वाले शनिवार को अस्पताल पहुंच गए और दहाड़े मारे जा रहे थे। पत्नी और बेटों के आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। रिश्तेदार परिजनों को ढांढस बंधाने में लगे हुए थे। बेटों का कहना था कि पिता जी उम्रदराज होने के बाद भी खुद की परवाह किए बगैर कड़ी मेहनत करते थे। हमेशा उनका भविष्य संवारने के लिए चिंतित रहते थे। उधर, शनिवार को रिटायर्ड सूबेदार मेजर परमात्मानंद के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
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सेना में सूबेदार मेजर के पद से वर्ष 2007 में रिटायर्ड होने के बाद परमात्मानंद सिंह ने आवास विकास कालोनी में अपना मकान बनाया। इसके बाद अधिकतर समय खेतीबारी या फिर सामाजिक कार्यों में लगाते थे। छोटा पुत्र राकेश सिंह एमएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई करता है। वहीं बड़े पुत्र प्रमोद सिंह गांव में रहकर खेतीबारी का करते हैं। परिवारीजनों की मानें तो उनकी पत्नी काफी दिनों से लखनऊ में रह रही थी। इधर कुछ दिन पूर्व उनकी पत्नी ने उन्हें फोन करके लखनऊ आकर उसे लेकर जाने की बात कही थी। पत्नी के बुलावे पर वह उसे लेने के लिए शुक्रवार को उत्सर्ग एक्सप्रेस लखनऊ जाने के लिए निकले थे। निकलने से पहले पत्नी को फोन पर आने की सूचना भी दिए थे। कहा था कि सुबह तक लखनऊ पहुंच जाऊंगा। उधर, हादसे की खबर मिलते ही पत्नी व परिवार वाले शनिवार को अस्पताल पहुंच गए और दहाड़े मारे जा रहे थे। पत्नी और बेटों के आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। रिश्तेदार परिजनों को ढांढस बंधाने में लगे हुए थे। बेटों का कहना था कि पिता जी उम्रदराज होने के बाद भी खुद की परवाह किए बगैर कड़ी मेहनत करते थे। हमेशा उनका भविष्य संवारने के लिए चिंतित रहते थे। उधर, शनिवार को रिटायर्ड सूबेदार मेजर परमात्मानंद के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
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