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एक्सीडेंट जोन बना बैरिया-मांझी मार्ग
Updated Tue, 16 Jan 2018 10:17 PM IST
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बलिया। बैरिया थाना क्षेत्र का एनएच-31 बैरिया-मांझी मार्ग एक्सीडेंटल जोन में तब्दील हो गया है। यहां देखा जाय तो करीब प्रत्येक माह में एक्सीडेंट के दौरान करीब आधा दर्जन लोग काल के गाल में समा जाते है। क्षेत्रवासियों की माने तो इसका मुख्य कारण हाइवे होने के बावजूद आज तक इस पर किसी प्रकार का सांकेतिक चिह्न का नहीं होना है।
बैरिया से मांझी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बने करीब ढाई दशक से अधिक हो गया है। लेकिन आज तक यातायात विभाग द्वारा किसी मोड़ या किसी विद्यालय तथा गांवों के पास कही भी कोई सांकेतिक चिह्न नहीं लगाया गया है। जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मोड़ और विद्यालय के साथ घनी आबादी वाले गांव से पहले सांकेतिक चिह्न लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन संबंधित विभाग आज तक उदासीनता बरतते चले आ रहा है। जिसके कारण आए दिन एनएच-31 पर जगह-जगह सड़क हादसे होते रहते है।
पिछले वर्ष के आकड़ों पर गौर किया जाय तो बैरिया से मांझी के बीच आधे दर्जन लोगों की सड़क दुर्घटना के कारण मौत हो चुकी है। जिसमें 27 अप्रैल 2017 को शिवन टोला मोड़ पर जगदीपिया देवी (55), छह जून को सोहन कुमार सिंह (20), 10 अक्तूबर को सुकठ यादव (75), 23 जुलाई को बलराम सिंह के डेरा के समीप अवधेश सिंह (50), तीन दिसम्बर को जयप्रभा सेतु पर दूधनाथ तिवारी (50) तथा बीते रविवार की शाम जयप्रभा सेतु के समीप राजेश यादव (32) काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं, दर्जनों लोग गंभीर रूप से जख्मी हो चुके है। अगर एनएच-31 स्थित मोड़, विद्यालय व घनी आबादी वाले गांव के दोनों तरफ सांकेतिक चिह्न लगा होता तो निश्चित ही सड़क हादसे पर अकुंश लग सकता है। लेकिन संबंधित विभाग सांकेतिक चिह्न लगने में घोर लापरवाही बरत रहा है।
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बैरिया कस्बा निवासी सेवानिवृत शिक्षक श्रीनाथ सिंह, जयप्रकाश नगर निवासी सूर्यनभान सिंह, चाँददीयर पंचायत के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बीरेंद्र यादव और समाजसेवी दुर्गविजय सिंह झलन का कहना है कि जिले में करोड़ों की लागत से एनएच-31 तो बन गया। लेकिन मोड़ व विद्यालयों के साथ ही भीड़ भाड़ वाले गांवों के पास सांकेतिक चिह्न संबंधित विभाग द्वारा आज तक नहीं लगाया गया। जिसका खामियाजा आम लोगों को आये दिन भुगतना पड़ रहा है।
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बैरिया से मांझी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बने करीब ढाई दशक से अधिक हो गया है। लेकिन आज तक यातायात विभाग द्वारा किसी मोड़ या किसी विद्यालय तथा गांवों के पास कही भी कोई सांकेतिक चिह्न नहीं लगाया गया है। जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मोड़ और विद्यालय के साथ घनी आबादी वाले गांव से पहले सांकेतिक चिह्न लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन संबंधित विभाग आज तक उदासीनता बरतते चले आ रहा है। जिसके कारण आए दिन एनएच-31 पर जगह-जगह सड़क हादसे होते रहते है।
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पिछले वर्ष के आकड़ों पर गौर किया जाय तो बैरिया से मांझी के बीच आधे दर्जन लोगों की सड़क दुर्घटना के कारण मौत हो चुकी है। जिसमें 27 अप्रैल 2017 को शिवन टोला मोड़ पर जगदीपिया देवी (55), छह जून को सोहन कुमार सिंह (20), 10 अक्तूबर को सुकठ यादव (75), 23 जुलाई को बलराम सिंह के डेरा के समीप अवधेश सिंह (50), तीन दिसम्बर को जयप्रभा सेतु पर दूधनाथ तिवारी (50) तथा बीते रविवार की शाम जयप्रभा सेतु के समीप राजेश यादव (32) काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं, दर्जनों लोग गंभीर रूप से जख्मी हो चुके है। अगर एनएच-31 स्थित मोड़, विद्यालय व घनी आबादी वाले गांव के दोनों तरफ सांकेतिक चिह्न लगा होता तो निश्चित ही सड़क हादसे पर अकुंश लग सकता है। लेकिन संबंधित विभाग सांकेतिक चिह्न लगने में घोर लापरवाही बरत रहा है।
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बैरिया कस्बा निवासी सेवानिवृत शिक्षक श्रीनाथ सिंह, जयप्रकाश नगर निवासी सूर्यनभान सिंह, चाँददीयर पंचायत के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बीरेंद्र यादव और समाजसेवी दुर्गविजय सिंह झलन का कहना है कि जिले में करोड़ों की लागत से एनएच-31 तो बन गया। लेकिन मोड़ व विद्यालयों के साथ ही भीड़ भाड़ वाले गांवों के पास सांकेतिक चिह्न संबंधित विभाग द्वारा आज तक नहीं लगाया गया। जिसका खामियाजा आम लोगों को आये दिन भुगतना पड़ रहा है।