बलिया। जिला अस्पताल के कर्मचारियों ने शुक्रवार को जिला अस्पताल परिसर में विश्व एक्स-रे दिवस केक काटकर मनाया। एक्सरे टेक्निशियन संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जर्मनी के भौतिक विज्ञान के प्रोफ़ेसर डब्लू रॉन्टजेन ने आज ही के दिन 1895 में एक्सरे मशीन की खोज की थी। जिला अस्पताल में एक्सरे मशीन का अस्तित्व 60 के दशक में सामने आया, जिसके बाद से निरंतर मरीजों को इसका लाभ मिलता रहा। श्री सिंह ने कहा कि एक्स-रे कक्ष में जानलेवा रेडिएशन का प्रभाव रहता है, जो एक्स-रे करने वाले टेक्नीशियन और पास पड़े मरीज को भी प्रभावित करता है। लेकिन जिला प्रशासन और शासन ने आज तक एक्सरे टेक्नीशियनों के लिए रेडिएशन बैच व्यवस्था नहीं की है। रेडिएशन बैच के अभाव में एक्स रे टेक्नीशियन अपनी जान हथेली पर लेकर रोजाना लोगों का एक्सरे कर रहे। इस दौरान श्री सिंह ने शासन- प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए एक्सरे टेक्नीशियनों को रेडिएशन बैच उपलब्ध कराने की मांग की है। कार्यक्रम के दौरान रेडियोलॉजिस्ट डा.संजय सिंह, सुशील ओझा, अजय कुमार रावत, जय प्रकाश राय, सुनील कुमार, चंद्र प्रकाश आदि मौजूद रहे।