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दोनों पांव में छाले, फिर नहीं रुक रही गांव जाने की डगर
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बैरिया। प्रचंड गर्मी, त्वचा को जला देने वाली धूप व आग की गोला बनी सड़क पर भी मजदूरों का पैदल चलना जारी है। अयोध्या से अपनी छह वर्षीय बेटी के साथ लगभग 300 किमी की पैदल यात्रा कर सोमवार की शाम बैरिया पहुंची ललिता देवी (30) के उसकी पुत्री कुमारी बच्चा (6) भी थी। मैनेजर सिंह स्मारक के सामने पुलिस सहायता केंद्र पर तैनात सिपाही विनोद यादव व पवन पांडेय ने मां-बेटी को भोजन कराया और पानी पिलाया। इसके बाद उसे बिहार की सीमा तक वाहन से भेजवाया।ललिता को पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर जाना है जबकि जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं है।
ललिता ने बताया कि अपने पति के साथ अयोध्या में रहती थी। दोनों लोग काम करते थे लेकिन कोरोना संक्रमण के साथ ही अचानक मेरा पति गायब हो गया और दो महीने तक जब उसकी कोई जानकारी नहीं मिली तो हार-थक कर मैं अपनी बेटी के साथ अपने मायके दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) को चल दिया। जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं थी। बताया कि लोगों के घरों में काम करती थी, कोरोना संक्रमण के चलते काम मिलना बंद हो गया। ऐसे में भूखे-प्यासे मरने की स्थिति आ गई। बताया कि आठ दिनों में वह 300 किमी की यात्रा पैदल तय किया है। पैदल चलने के कारण ललिता के दोनों पांव में बड़े-बड़े छाले पड़ गए थे। तन के कपड़े काफी गंदे और धूप के कारण मां-बेटी का चेहरा काला पड़ गया था। ललिता ने कहा कि जैसे 300 किमी पैदल आ गई भगवान ने चाहा तो 500 किमी की यात्रा भी पूरी हो जाएगी।
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ललिता ने बताया कि अपने पति के साथ अयोध्या में रहती थी। दोनों लोग काम करते थे लेकिन कोरोना संक्रमण के साथ ही अचानक मेरा पति गायब हो गया और दो महीने तक जब उसकी कोई जानकारी नहीं मिली तो हार-थक कर मैं अपनी बेटी के साथ अपने मायके दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) को चल दिया। जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं थी। बताया कि लोगों के घरों में काम करती थी, कोरोना संक्रमण के चलते काम मिलना बंद हो गया। ऐसे में भूखे-प्यासे मरने की स्थिति आ गई। बताया कि आठ दिनों में वह 300 किमी की यात्रा पैदल तय किया है। पैदल चलने के कारण ललिता के दोनों पांव में बड़े-बड़े छाले पड़ गए थे। तन के कपड़े काफी गंदे और धूप के कारण मां-बेटी का चेहरा काला पड़ गया था। ललिता ने कहा कि जैसे 300 किमी पैदल आ गई भगवान ने चाहा तो 500 किमी की यात्रा भी पूरी हो जाएगी।
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