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ट्रेनों में बर्थ फुल, बसों का किराया आसमान पर कैसें दीपावली, छठ पूजा पर आएं परदेशी
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बैरिया। दीपावली और छठ पूजा पर हैदराबाद, चेन्नई, सूरत, बंगलुरु, पुणे, मुंबई में नौकरीपेशा वाले परदेशियों को दीपावली व छठ पर्व के मौके पर अपने घर पहुंचने की ललक होती है। लेकिन पर्व के मौके पर परदेशी घर कैसे पहुंचेंगे, यह उनके लिए जटिल समस्या बनी हुई है। किराये में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने से सभी परेशान हैं।
दीपावली से लेकर छठ पर्व तक विभिन्न ट्रेनों में स्लीपर क्लास में बर्थ खाली नहीं है। वातानुकूलित क्लास में 100 से अधिक वेटिंग दिखा रहा है। तत्काल टिकट के लिए दलाल एक यात्री के मूल किराये के अतिरिक्त एक हजार से तीन हजार रुपये तक का डिमांड कर रहे हैं। दूसरी तरफ बंगलुरु, चेन्नई, पुणे, मुंबई जैसे महानगरों से वाया वाराणसी के लिए बसों का किराया आसमान छू रहा है। हैदराबाद से वाराणसी नॉन एसी बस का किराया 5500 से 6000 रुपये तक है। वहीं, एसी का किराया 7000 से 12000 हजार रुपये किराया है। यही हाल मुंबई, चेन्नई, पुणे, सूरत से वाराणसी तक के बस किराया की है। फ्लाइट का किराया तो और भी आसमान छू रहा है। हैदराबाद से वाराणसी फ्लाइट का किराया 9 हजार से 17 हजार तक है। पुणे से वाराणसी फ्लाइट का किराया 16 हजार से 22 हजार रुपये, सूरत से वाराणसी फ्लाइट का किराया 16 हजार से 25 हजार रुपये है। सभी महानगरों से वाराणसी तक की फ्लाइट का किराया महंगा है। अगर प्रवासी सस्ते दर पर रेल यात्रा करना चाहें तो टिकट मिलना नामुनकिन है। 12791 डाउन ट्रेन में सिकंदराबाद से बक्सर तक का स्लीपर क्लास में कोई बर्थ नहीं है। जबकि एसी थर्ड में 130 वेटिंग से अधिक है। बंगलुरु और चेन्नई से बक्सर तक 11295 डाउन संघमित्रा एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में 540 वेटिंग से अधिक है। वहीं, एसी में भी 100 से अधिक वेटिंग दिखा रहा है। सूरत से बलिया, सुरेमनपुर आने के लिए 19045 डाउन ताप्ती गंगा एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में कोई बर्थ नहीं है। जबकि थर्ड एसी में 130 वेटिंग से अधिक है। मुंबई से बलिया, सुरेमनपुर आने के लिए 11066 डाउन पवन एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में कोई बर्थ नहीं है। एसी में 80 से अधिक वेटिंग है। कुल मिलाकर विभिन्न महानगरों से बलिया और सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन का टिकट दीपावली व छठ पर्व के मौके पर मिलना मुमकिन नहीं है। वहीं, तत्काल टिकट पर दलालों का बोलबाला है।
दीपावली 24 अक्तूबर को और छठ पर्व 28 अक्तूबर को नहाय खाय से शुरू होगा और 30 अक्तूबर को संध्या अर्ध्य और 31 अक्तूबर को सूर्योदय अर्ध्य निर्धारित है। ऐसे में प्रवासी घर पहुंच पाएंगे, यह कहना बिल्कुल मुश्किल है।
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दीपावली, छठ पूजा में कुछ दिन ही शेष है। ऐसे में डाउन में आने वाली ट्रेनों में बर्थ मिलना काफी कठिन है। तत्काल टिकट ही विकल्प है जिन्हें मिल गया उनका तो सफर हो जाएगा और जिन्हें तत्काल टिकट नहीं मिलेगा उनका सफर मुश्किल है।
- कमलेश मीणा, वाणिज्य अधीक्षक, सुरेमनपुर, बलिया।
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दीपावली से लेकर छठ पर्व तक विभिन्न ट्रेनों में स्लीपर क्लास में बर्थ खाली नहीं है। वातानुकूलित क्लास में 100 से अधिक वेटिंग दिखा रहा है। तत्काल टिकट के लिए दलाल एक यात्री के मूल किराये के अतिरिक्त एक हजार से तीन हजार रुपये तक का डिमांड कर रहे हैं। दूसरी तरफ बंगलुरु, चेन्नई, पुणे, मुंबई जैसे महानगरों से वाया वाराणसी के लिए बसों का किराया आसमान छू रहा है। हैदराबाद से वाराणसी नॉन एसी बस का किराया 5500 से 6000 रुपये तक है। वहीं, एसी का किराया 7000 से 12000 हजार रुपये किराया है। यही हाल मुंबई, चेन्नई, पुणे, सूरत से वाराणसी तक के बस किराया की है। फ्लाइट का किराया तो और भी आसमान छू रहा है। हैदराबाद से वाराणसी फ्लाइट का किराया 9 हजार से 17 हजार तक है। पुणे से वाराणसी फ्लाइट का किराया 16 हजार से 22 हजार रुपये, सूरत से वाराणसी फ्लाइट का किराया 16 हजार से 25 हजार रुपये है। सभी महानगरों से वाराणसी तक की फ्लाइट का किराया महंगा है। अगर प्रवासी सस्ते दर पर रेल यात्रा करना चाहें तो टिकट मिलना नामुनकिन है। 12791 डाउन ट्रेन में सिकंदराबाद से बक्सर तक का स्लीपर क्लास में कोई बर्थ नहीं है। जबकि एसी थर्ड में 130 वेटिंग से अधिक है। बंगलुरु और चेन्नई से बक्सर तक 11295 डाउन संघमित्रा एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में 540 वेटिंग से अधिक है। वहीं, एसी में भी 100 से अधिक वेटिंग दिखा रहा है। सूरत से बलिया, सुरेमनपुर आने के लिए 19045 डाउन ताप्ती गंगा एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में कोई बर्थ नहीं है। जबकि थर्ड एसी में 130 वेटिंग से अधिक है। मुंबई से बलिया, सुरेमनपुर आने के लिए 11066 डाउन पवन एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में कोई बर्थ नहीं है। एसी में 80 से अधिक वेटिंग है। कुल मिलाकर विभिन्न महानगरों से बलिया और सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन का टिकट दीपावली व छठ पर्व के मौके पर मिलना मुमकिन नहीं है। वहीं, तत्काल टिकट पर दलालों का बोलबाला है।
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दीपावली 24 अक्तूबर को और छठ पर्व 28 अक्तूबर को नहाय खाय से शुरू होगा और 30 अक्तूबर को संध्या अर्ध्य और 31 अक्तूबर को सूर्योदय अर्ध्य निर्धारित है। ऐसे में प्रवासी घर पहुंच पाएंगे, यह कहना बिल्कुल मुश्किल है।
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दीपावली, छठ पूजा में कुछ दिन ही शेष है। ऐसे में डाउन में आने वाली ट्रेनों में बर्थ मिलना काफी कठिन है। तत्काल टिकट ही विकल्प है जिन्हें मिल गया उनका तो सफर हो जाएगा और जिन्हें तत्काल टिकट नहीं मिलेगा उनका सफर मुश्किल है।
- कमलेश मीणा, वाणिज्य अधीक्षक, सुरेमनपुर, बलिया।