{"_id":"58a707664f1c1b921ad84900","slug":"bahrepan-ka-ilaj-janpad-me-hi-sambhav","type":"story","status":"publish","title_hn":"बहरेपन का इलाज जनपद में ही संभव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बहरेपन का इलाज जनपद में ही संभव
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 17 Feb 2017 07:53 PM IST
विज्ञापन
Hospital
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहरेपन का इलाज अब जनपद में संभव हो सकेगा। इलाज कराने के लिए लोगों को दूर दराज बड़े शहरों की तरफ रुख नहीं करना होगा। इसके लिए जिला अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस आडियो मेट्रिक सेल का निर्माण कराया जा रहा है। इसके बन जाने के बाद मरीजों की जांच कर चिकित्सकों की देखरेख में उचित इलाज भी संभव हो सकेगा।
सीएमओ डा पीके सिंह ने बताया कि जनपद में कुल आबादी के करीब छह फीसद लोग बहरेपन का शिकार हैं, जिसमें शून्य से 14 साल तक के बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे मरीजों के उपचार तथा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक आडियो मेट्रिक सेल का निर्माण कराया जा रहा है।
जहां न सिर्फ मरीजों की जांच होगी, बल्कि उनकी सुनने की क्षमता और बीमारी की गंभीरता का भी पता चल सकेगा। जिले में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के चलते अधेड़ तो छोड़िए बच्चे भी बहरेपन के शिकार हो रहे हैं। इनकी संख्या आबादी के छह प्रतिशत तक हो गई है। यानी जिले में करीब एक लाख 92 लोग बहरेपन के शिकार हैं। जिसमें बच्चों की संख्या ज्यादा है।
विज्ञापन
चिकित्सक ों की माने तो ऐसा ध्वनि प्रदूषण के चलते हो रहा है। बहरेपन के शिकार हुए लोगों के उपचार तथा उनमें जागरूकता फैलाने के लिए भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत ऐसे मरीजों के उपचार व जागरूकता फैलाने के लिए जिला अस्पताल में एक आाडियो मेट्रिक सेल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें आडियोलाजिस्ट के साथ-साथ चिकित्सक व फार्मासिस्ट भी तैनात किए जायेंगे।
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया कार्यक्रम जिले के आस-पास के कई जिलों में अभी तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे यहां पर उपचार केंद्र खुल जाने के बाद अन्य जनपदों के मरीजों को भी लाभ मिलने लगेगा।
विज्ञापन
सीएमओ डा पीके सिंह ने बताया कि जनपद में कुल आबादी के करीब छह फीसद लोग बहरेपन का शिकार हैं, जिसमें शून्य से 14 साल तक के बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे मरीजों के उपचार तथा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक आडियो मेट्रिक सेल का निर्माण कराया जा रहा है।
विज्ञापन
जहां न सिर्फ मरीजों की जांच होगी, बल्कि उनकी सुनने की क्षमता और बीमारी की गंभीरता का भी पता चल सकेगा। जिले में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के चलते अधेड़ तो छोड़िए बच्चे भी बहरेपन के शिकार हो रहे हैं। इनकी संख्या आबादी के छह प्रतिशत तक हो गई है। यानी जिले में करीब एक लाख 92 लोग बहरेपन के शिकार हैं। जिसमें बच्चों की संख्या ज्यादा है।
विज्ञापन
चिकित्सक ों की माने तो ऐसा ध्वनि प्रदूषण के चलते हो रहा है। बहरेपन के शिकार हुए लोगों के उपचार तथा उनमें जागरूकता फैलाने के लिए भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत ऐसे मरीजों के उपचार व जागरूकता फैलाने के लिए जिला अस्पताल में एक आाडियो मेट्रिक सेल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें आडियोलाजिस्ट के साथ-साथ चिकित्सक व फार्मासिस्ट भी तैनात किए जायेंगे।
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया कार्यक्रम जिले के आस-पास के कई जिलों में अभी तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे यहां पर उपचार केंद्र खुल जाने के बाद अन्य जनपदों के मरीजों को भी लाभ मिलने लगेगा।