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बाढ़ विभाग को इसी समय का था इंतजार

Thu, 25 Aug 2016 08:23 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाल, बलिया
ब्यूरो,अमर उजाल, बलिया Updated Thu, 25 Aug 2016 08:23 PM IST
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badh vibhag ko isi samay ka tha intezar
बाढ़ में बना मचान।
बाढ़ विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकार ने अगर मौसम वैज्ञानिकों की बातों को लेकर थोड़ा भी संजीदगी दिखाई होती तो यह नौबत नहीं आती। इस बार अच्छी मानसून की संभावना के बावजूद केंद्र और प्रदेश सरकार ने इससे निबटने के लिए पहले कोई तैयारी नहीं की। और अगर योजना बनी तो वह धरातल तक क्यों नहीं पहुंच सकी।
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क्षेत्र के सचिन सिंह का आरोप है कि बाढ़  विभाग अगर पहले से दूबे छपरा रिंग बंधे पर जीओ विधि से प्लेटफार्म बना दिया  होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। विभाग इसी समय का इंतजार कर रहा था कि जब बाढ़ उफान पर हो तो फ्लड फाइटिंग के नाम पर जमकर धन की बंदरबांट की जाए।
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मुन्ना यादव का कहना है कि बाढ़ विभाग व जिला प्रशासन ने समय रहते कोई योजना नहीं बनाई थी नतीजतन एनएच-31, दूबे छपरा रिंग बंधा तो कहीं बीएसटी बंधा टूटता नजर आ रहा है। कमलेश तिवारी का कहना है कि अब तक यह बंधा तीन बार टूट चुका है।  वर्ष 2013 में टूटने के बाद बाढ़ विभाग नौ करोड़ रुपये खर्च कर चौड़ी व  ऊंचीकरण तो कर दिया। लेकिन बंधे के नीचे ही 60 से 80 फीट गहराई कर छोड़ दी,  जिससे यह नौबत आ गई है और बाढ़ विभाग सोच रहा था कि दूबे छपरा रिंग बंधे  पर तभी काम शुरू करे जब यह गंगा की लहरों में कटना शुरू हो। ग्रामीणों का कहना है कि बंधे पर कराए गए कार्यों की जांच की मांग करेंगे  ताकि ठेकेदार और अधिकारियों की पोल खुल सके।
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