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ह्वेनसांग की डायरी में भी है बाबा मुक्ति नाथ मंदिर का जिक्र

Mon, 18 Jul 2022 12:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 12:09 AM IST
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Baba Mukti Nath temple is also mentioned in Hiuen Tsang's diary
नरही क्षेत्र के कोटवा नारायनपुर गांव स्थित मुक्तिनाथ मंदिर। - फोटो : BALLIA
नरहीं। कोटवा नारायणपुर गांव स्थित बाबा मुक्ति नाथ मंदिर में क्षेत्र के अलावा गाजीपुर से भी हजारों श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने आते हैं। सावन में हजारों श्रद्धालु गंगा तट पर स्नान करने के बाद सीघे बाबा का जलाभिषेक करते हैं। इस मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका जिक्र ह्वेंनसांग की डायरी में भी मिलता है।
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जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर विकास खंड सोहांव के कोटवा नारायणपुर गांव स्थित बाबा मुक्ति नाथ मंदिर की स्थापना 15वीं शताब्दी में की गई थी। रोग से पीड़ित एक जमींदार खेत देखने गया तालाब के पानी से हाथ धोया तो उसका चर्म रोग ठीक हो गया। उसने उसी किचड़ युक्त तालाब में स्नान किया निरोग हो गया। उसके बाद उसने तालाब की खुदाई कराई। उसमें से शिवलिंग निकला। इसके बाद बाबा मुक्ति नाथ के नाम से उस शिवलिंग की स्थापना कराई गई। बलिया एक दृष्टि पुस्तक में डीएम हरिसेवक राम ने उल्लेख किया है कि बाबा का मंदिर छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास यह मंदिर नारायण देव के नाम से प्रसिद्ध था। इसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी डायरी में नारायण देव मंदिर के रूप में किया है।
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अस्सी के दशक में यह मंदिर जीर्ण हो गया था। तब गांव के ही नवयुवकों द्वारा मुक्ति नाथ मानस सेवा समिति का गठन कर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। परिणामस्वरूप आज यह भव्य मंदिर का रूप ले चुका है। फागुन के महाशिवरात्रि पर समिति के तत्वावधान में 32 वर्षों से शिव विवाह महोत्सव का बड़ा आयोजन होता है। इसमें दर्जनों ट्रैक्टरों पर मनमोहक झांकियों के साथ ही ग्यारह सौ कन्याएं कलश शोभायात्रा निकालती हैं। शिव विवाह को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं तथा जलाभिषेक भी करते हैं। मंदिर से कुछ दूरी पर गंगा बहती है सावन में श्रद्धालु गंगा स्नान कर भारी संख्या में जलाभिषेक करते हैं।
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