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Ballia News: खूंखार हुए जानवर, तीन गुना बढ़ी एआरवी की मांग
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ठंड बढ़ने के साथ कुत्ते, सियार, बिल्ली और बंदर अधिक खूंखार हो गए हैं। इनके काटने से जख्मी मरीजों की संख्या गर्मी के दिनों की अपेक्षा करीब तीन गुना बढ़ गई है। गर्मी के दिनों में जहां औसतन 40 से 50 लोग एआरवी का इंजेक्शन लगवाने आते थे, यह संख्या बढ़कर 150 से भी अधिक हो गई है। कई दिन तो 120 से अधिक मरीज आए हैं। हालांकि अधिकतर सीएचसी पर एआरवी उपलब्ध है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्ता सड़कों पर और बंदर घरों के अंदर काट कर घायल कर रहे हैं। कुत्तों का प्रजनन माह होने के कारण यह और खतरनाक हो गए हैं। कई मोहल्ले में इनका आतंक पसरा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से अब तक 39280 हजार लोगों को कुत्ते ने काटा है, वहीं 3890 लोगों को बंदरों व 746 लोगों को सियार व बिल्ली ने काटा है। चारों के काटने से रेबीज बीमारी होने का भय बना रहता है। रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है। लक्षणों के आधार पर इस बीमारी को हाइड्रोफोविया के नाम से भी जाना जाता है। रेबीज का संक्रमण कुत्ता, बंदर, लंगूर, सियार, लोमड़ी आदि जानवरों के काटने से होता है।
चिकित्सकों की माने तो इस बीमारी की चपेट में आकर दुनिया भर में सालाना 50 हजार से ज्यादा लोगों की असमय मौत होती है। इनमें सबसे अधिक मौतें भारत में होती हैं। इसमें लापरवाही जानलेवा साबित होती है। सरकार द्वारा इस बीमारी जागरुकता को लेकर अभियान चलाया जाता है।
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रेबीज एक खतरनाक बीमारी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। जिले के अस्पतालों में अभी करीब डेढ़ हजार एआरवी की डोज है। जिला अस्पताल में रोज 100 से डेढ़ सौ लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें बिहार के लोग भी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने आते हैं।
-डॉ. विजयपति द्विवेदी, सीएमओ।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से अब तक 39280 हजार लोगों को कुत्ते ने काटा है, वहीं 3890 लोगों को बंदरों व 746 लोगों को सियार व बिल्ली ने काटा है। चारों के काटने से रेबीज बीमारी होने का भय बना रहता है। रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है। लक्षणों के आधार पर इस बीमारी को हाइड्रोफोविया के नाम से भी जाना जाता है। रेबीज का संक्रमण कुत्ता, बंदर, लंगूर, सियार, लोमड़ी आदि जानवरों के काटने से होता है।
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चिकित्सकों की माने तो इस बीमारी की चपेट में आकर दुनिया भर में सालाना 50 हजार से ज्यादा लोगों की असमय मौत होती है। इनमें सबसे अधिक मौतें भारत में होती हैं। इसमें लापरवाही जानलेवा साबित होती है। सरकार द्वारा इस बीमारी जागरुकता को लेकर अभियान चलाया जाता है।
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रेबीज एक खतरनाक बीमारी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। जिले के अस्पतालों में अभी करीब डेढ़ हजार एआरवी की डोज है। जिला अस्पताल में रोज 100 से डेढ़ सौ लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगता है। इसमें बिहार के लोग भी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने आते हैं।
-डॉ. विजयपति द्विवेदी, सीएमओ।