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Ballia News: दूसरे दिन सरयू नदी में बरामद हुआ आकाश का शव
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सहतवार। थाना क्षेत्र के महाराजपुर गांव में सरयू नदी के किनारे शुक्रवार की शाम अपने फूफा के घर आया 12 वर्षीय बालक नदी के कटान के पास नाव से उतरने के दौरान पानी में गिरकर डूब गया था।
देर रात से ही परिजन व ग्रामीण डूबे बालक की सरयू नदी में खोजबीन कर रहे थे। सूचना पर पहुंची सहतवार पुलिस ने भी शव की खोजबीन शुरू की। बालक का शव रविवार को घटना स्थल से 100 मीटर पूरब दिशा में मिल गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
रेवती थाना क्षेत्र के दंतहा गांव निवासी स्व. अमरनाथ यादव का 12 वर्षीय पुत्र आकाश यादव महाराजपुर गांव में अपने फूफा छोटेलाल यादव के यहां रहता था। शुक्रवार को आकाश नदी के पार अपने फूफा के डेरा पर गया था। वहां से शाम को नाव से लौटने के दौरान महाराजपुर घाट पर आकाश असंतुलित होकर नदी के पानी में गिर गया था। नदी में तेज धारा होने के कारण आकाश पानी में बह गया था। पोते का शव देख 70 वर्षीय दादा जगनरायन व 65 वर्षीय दादी शांति दहाड़े मार कर रोने लगी।
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पुत्र अमरनाथ की मौत के बाद पोता आकाश ही दादा-दादी के बुढ़ापे का एक मात्र सहारा था। आकाश की बहन पूजा, रोशनी, नैना, नीतू व सुनैना इकलौते भाई की मौत पर बिलख रही थीं। मृतक आकाश के पिता की मौत के बाद मां अपने बच्चों को छोड़ दूसरी शादी कर ली। बच्चों की परवरिश दादा-दादी जग नारायण व शांति कर रही थी, लेकिन विधाता ने उनसे आकाश को भी उनसे छीन लिया।
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देर रात से ही परिजन व ग्रामीण डूबे बालक की सरयू नदी में खोजबीन कर रहे थे। सूचना पर पहुंची सहतवार पुलिस ने भी शव की खोजबीन शुरू की। बालक का शव रविवार को घटना स्थल से 100 मीटर पूरब दिशा में मिल गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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रेवती थाना क्षेत्र के दंतहा गांव निवासी स्व. अमरनाथ यादव का 12 वर्षीय पुत्र आकाश यादव महाराजपुर गांव में अपने फूफा छोटेलाल यादव के यहां रहता था। शुक्रवार को आकाश नदी के पार अपने फूफा के डेरा पर गया था। वहां से शाम को नाव से लौटने के दौरान महाराजपुर घाट पर आकाश असंतुलित होकर नदी के पानी में गिर गया था। नदी में तेज धारा होने के कारण आकाश पानी में बह गया था। पोते का शव देख 70 वर्षीय दादा जगनरायन व 65 वर्षीय दादी शांति दहाड़े मार कर रोने लगी।
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पुत्र अमरनाथ की मौत के बाद पोता आकाश ही दादा-दादी के बुढ़ापे का एक मात्र सहारा था। आकाश की बहन पूजा, रोशनी, नैना, नीतू व सुनैना इकलौते भाई की मौत पर बिलख रही थीं। मृतक आकाश के पिता की मौत के बाद मां अपने बच्चों को छोड़ दूसरी शादी कर ली। बच्चों की परवरिश दादा-दादी जग नारायण व शांति कर रही थी, लेकिन विधाता ने उनसे आकाश को भी उनसे छीन लिया।