लाल निशान से ऊपर बह रही घाघरा

Ballia Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
बिल्थरारोड। लाल निशान से ऊपर बह रही घाघरा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे बाढ़ की आशंका प्रबल हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक सोमवार को घाघरा का जलस्तर 64.20 मीटर दर्ज किया गया जो लाल निशान से 19 सेमी. ऊपर है। नदी में आधा से एक सेमी. प्रतिघंटे की दर से जलस्तर में वृद्धि हो रही है। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि जारी रहने का पूर्वानुमान लगाया है।
नदी की तेज लहरों से मटिया गुलौरा, चैनपुर, टंगुनियां, खैरा खास, तूर्तीपार में कटान जारी है। उधर, बाढ़ के पानी के दबाव से हाहानाला व तूर्तीपार रेगुलेटर के पास टीएस बंधे पर खतरा उत्पन्न हो गया है। तूर्तीपर गांव पानी से घिर गया है। टंगुनियां, गुलौरा, मठिया, महुआतर, खैराखास, मझवलिया, मुजौना, खैराखास, करीमगंज, बिल्थरा बाजार, सहिया, सोनबरसा, छकिया, हल्दीरामपुर के लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं।
उधर, रेवती संवाददाता के अनुसार बीते रविवार की रात घाघरा खतरे के बिंदु को पार गई। नदी का पानी उत्तर रेत पड़े भूखंड के ऊपर फैल गया। वहीं नदी के दक्षिणी किनारे की फसलें भी डूब गई। नदी का पानी तटीय सीमा को पार करते हुए टीएस बंधा को भी छूने लगा है। उधर बंधा से उत्तर स्थित गांव भी नदी के पानी से घिरने लगे हैं।
घाघरा में उफान हो से चांदपुर गेज पर नदी का जलस्तर सोमवार के शाम चार बजे खतरा बिंदु 58 मीटर से बढ़कर 58.40 मीटर पर था। नदी करीब एक सेमी. प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रही है। घाघरा के जलस्तर में वृद्धि के चलते शिवपुर, सेमरा, मांझा व नवका गांव मौजा के खेतों के फसलों में पानी रेंगने लगा है। नीची भूमि तथा बाढ़ के पानी से भर गए हैं। रतीछपरा-देवपुर कटे मार्ग से होता हुआ नदी का पानी नवका गांव टीएस बंधा मार्ग पर बसे कटान विस्थापितों को घेरने लगा है। उधर, मांझा के मुड़कटहीं पुल के पास की नीची भूमि से होता हुआ नदी का पानी मठ नागनाथ (देवपुर के आसपास) तक फैलकर नवका गांव को भी घेरने लगा है। नदी के बढ़ने का रफ्तार यदि यही रहा तो हजारों एकड़ पर बोई गई मक्का अरहर धान आदि की फसलें डूब जाएंगी। अनुमान है कि रातभर में नवका गांव, मांझा तथा देवपुर बाढ़ के पानी से घिर जाएंगे।

कटान तेज : यूपी-बिहार के करीब 50 हजार की आबादी में दहशत
सिताब दियारा बचाओ समिति का किया गठन
एसडीएम ने निरीक्षण कर शासन को पत्र भेजने को कहा
सुरेमनपुर। यूपी-बिहार की सीमा पर स्थित घाघरा ने उग्र रूप धारण कर लेने से कटान में तेजी आ गई है। जिससे यूपी-बिहार के करीब 50 हजार ग्रामीण दहशतजदा हैं। इसको लेकर इंडिया अगेंस्ट करप्शन छपरा के सदस्यों ने सिताब दियारा बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया।
घाघरा नदी की जलधारा में हो रहे उफान से मौजूदा समय में यूपी के इब्राहिमाबाद नौबरार, बिहार राज्य के अंतर्गत छपरा जिले के जननायक जेपी के गांव सिताब दियारा व प्रभुनाथ नगर कटान के जद में आ गए हैं। यही हाल रहा तो सिताब दियारा का अस्तित्व में समाप्त हो जाएगा। बिहार सरकार ने पिछले वर्ष अपने ग्रामपंचायतों को बचाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन बिहार सरकार के मनसूबों को घाघरा के उग्र तेवर ने चकनाचूर कर दिया। रविवार की शाम सिताब दियारा में इंडिया अगेंस्ट करप्शन टीम छपरा के सदस्य सियाराम सिंह, मनोहर तिवारी, रामायण जीवनदानी, आलोक सिंह आदि ने बैठक कर सिताब दियारा बचाओं संघर्ष समिति का गठन किया। अगेंस्ट करप्शन के सदस्यों का कहना है कि यूपी व बिहार राज्य मिलकर कटान रोकने का सार्थक पहल करें तो कटान रुकना संभव है। उधर, रविवार को बैरिया के उपजिलाधिकारी शीतला प्रसाद यादव ने यूपी-बिहार के सीमा स्थित कटान स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कटान से निपटने व स्थिति के विषय में शासन को पत्र भेज अवगत कराया जाएगा।

नरदरा भुसौला में तबाही बस 20 मीटर दूर
गंगापुर का जूनियर हाई स्कूल गंगा की धारा से 50 मीटर दूर
तेजी से बढ़ रही गंगा द्वाबा के गांवों की ओर कर रही रूख
रामगढ़। गंगा की उफनाती लहरें पचरूखिया से नरदरा, भूसौला तक नई तबाही की नई इबादत लिखनी शुरू कर दी है। ग्रासभा गंगापुर में धरोहर के रूप में बचा जूनियर हाई स्कूल को निगलने के लिए कदम बढ़ा रही है। स्कूल व गंगा की धाराओं की दूरी शेष 50 मीटर रह गई है। वहीं गंगा की पानी में वृद्धि के चलते द्वाबा के दर्जनों गांव जद में आने शुरू हो गए हैं।
सालों से तबाही का मंजर लिख रहीं गंगा इस बार भी उग्र तेवर अपनाने लगी हैं। इसके चलते पचरुखिया से भुसौला तक गंगा के किनारे कृषि योग्य भूमि कटान की जद में आने लगी है। सबसे विकट स्थिति नरदरा भुसौला में है। वहां गंगा नदी और रिहायशी मकानों का फासला मात्र 20 मीटर रह गया है। ऐेसे में गंगा की वेगवती लहरों को देख तटीय बाशिंदों की नींद उड़ चुकी है। वे अपने तथा अपने सामानों को सुरक्षित ठौर देने में युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं। गत 15 वर्षों से गंगा अपना कहर बरपाती चली आ रही हैं। गांव के गांव गंगा की गोद में समाते जा रहे हैं। अभी पिछले साल गंगा की कटान से बेघर होकर गंगापुर, लाला बगीचा, चौबेछपरा में लोग अपना शरणस्थली बनाए थे। लेकिन पानी की धाराओं में आया उफान फिर उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। लाल बगीचे में रहने वाले उपेंद्र पासवान, छट्ठू राम, बीटू लाल, अजय लाल आदि का कहना है कि पहले तो गंगा ने सब कुछ छिन लिया। बाढ़ जब उफान पर होती है तो पसीने की कमाई से बनाए गए रैन बसेरा को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता है। अति डेंजर जोरन पचरूख्यिा मझौंवा पर गंगा के बैक रोलिंग का दबाव पहले की तरह ही बरकरार है और लोगों के जमीनों का गिरना तेजी शुरू है। यदि गंगा का यही रुख रहा तो चंद दिनों में फिर कई गांवों की जलसमाधि हो सकती है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के मुताबिक सोमवार को गंगा का जलस्तर 55.310 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रतिघंटे गंगा में पांच सेमी. का बढ़ाव बना हुआ है जो खतरे के निशान 57.615 मीटर से करीब दो मीटर नीचे है।

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