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गोमुख से गंगा सागर तक के लिए निकली यात्रा बलिया पहुंची
Updated Sun, 11 Nov 2018 10:12 PM IST
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बलिया। 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय नदी दिवस पर गंगा को अविरल तथा निर्मल बनाने के संकल्प के साथ गोमुख से गंगासागर तक यात्रा निकाली गई, जो 14 जनवरी 2019 को मकर संक्रांति के दिन गंगासागर पहुंचेगी। रविवार को यह यात्रा वरिष्ठ सर्वोदई, गांधीवादी नेता राम धीरज की अगुवाई में बलिया पहुंची। डॉ जनार्दन राय, डॉ विश्राम यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता रणजीत सिंह, शिव कुमार मिश्र, धनंजय राय, सत्येंद्र तिवारी के साथ युवा साथियों ने यात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस अवसर पर मोती केशव धर्मशाला, रामलीला मैदान में एक गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। बतौर मुख्य वक्ता गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री धीरज ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता खतरे में है। आज के पढ़े-लिखे जागरूक समाज को यह समझना चाहिए कि जब हम गंगा की बात करते हैं तो वह केवल गंगा के अस्तित्व की बात नहीं होती बल्कि मानव अस्तित्व की बात होती है। हमें इस दृष्टिकोण के साथ काम करना होगा कि हम गंगा को नहीं स्वयं को बचा रहे हैं। सरकार और समाज दोनों को गंभीर होना पड़ेगा तब जाकर गंगा अविरल और निर्मल हो पाएंगी। वरिष्ठ अधिवक्ता रणजीत सिंह ने कहा कि आज के गंगा की दुर्दशा के लिए सिर्फ राज्य जिम्मेदार है।
गंगा को देखने का राज्य का नजरिया ठीक नहीं है। शिक्षक और नेता डा. विश्राम यादव ने कहा कि हमें गंगा के संदर्भ में उन लोगों से भी संवाद स्थापित करने की योजना बनानी चाहिए जो इनकी महत्ता के तकनीकी पक्ष को नहीं जानते हैं। इसके लिए हमें अपने व्यक्तिगत चोले को उतारकर समाज हित में आगे बढ़ना होगा। वरिष्ठ शिक्षक शिव कुमार मिश्र ने यात्रा के सफलता की शुभकामना दी तथा कहा कि हमें नौजवानों से बहुत उम्मीद है, गंगा एक बार फिर पुन: अपने नए अवतार में जरूर संस्कृति को पुष्पित तथा पल्लवित करेंगी। कार्यक्रम को वरिष्ठ नेता शिवप्रताप ओझा, ओम प्रकाश गिरि, ओम प्रकाश अरुण, ट्विंकल तथा लवकुश विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया। गोष्ठी के समापन के बाद रामलीला मैदान से शहीद चौक तक एक जागरूकता यात्रा भी निकाली गई। संचालन धनंजय राय ने किया।
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इस अवसर पर मोती केशव धर्मशाला, रामलीला मैदान में एक गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। बतौर मुख्य वक्ता गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री धीरज ने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता खतरे में है। आज के पढ़े-लिखे जागरूक समाज को यह समझना चाहिए कि जब हम गंगा की बात करते हैं तो वह केवल गंगा के अस्तित्व की बात नहीं होती बल्कि मानव अस्तित्व की बात होती है। हमें इस दृष्टिकोण के साथ काम करना होगा कि हम गंगा को नहीं स्वयं को बचा रहे हैं। सरकार और समाज दोनों को गंभीर होना पड़ेगा तब जाकर गंगा अविरल और निर्मल हो पाएंगी। वरिष्ठ अधिवक्ता रणजीत सिंह ने कहा कि आज के गंगा की दुर्दशा के लिए सिर्फ राज्य जिम्मेदार है।
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गंगा को देखने का राज्य का नजरिया ठीक नहीं है। शिक्षक और नेता डा. विश्राम यादव ने कहा कि हमें गंगा के संदर्भ में उन लोगों से भी संवाद स्थापित करने की योजना बनानी चाहिए जो इनकी महत्ता के तकनीकी पक्ष को नहीं जानते हैं। इसके लिए हमें अपने व्यक्तिगत चोले को उतारकर समाज हित में आगे बढ़ना होगा। वरिष्ठ शिक्षक शिव कुमार मिश्र ने यात्रा के सफलता की शुभकामना दी तथा कहा कि हमें नौजवानों से बहुत उम्मीद है, गंगा एक बार फिर पुन: अपने नए अवतार में जरूर संस्कृति को पुष्पित तथा पल्लवित करेंगी। कार्यक्रम को वरिष्ठ नेता शिवप्रताप ओझा, ओम प्रकाश गिरि, ओम प्रकाश अरुण, ट्विंकल तथा लवकुश विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया। गोष्ठी के समापन के बाद रामलीला मैदान से शहीद चौक तक एक जागरूकता यात्रा भी निकाली गई। संचालन धनंजय राय ने किया।
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