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Ballia News: निजी स्कूलों की मनमानी से 32.56 फीसदी बच्चे अच्छी पढ़ाई से वंचित
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बलिया। शहर के अलावा ग्रामीण अंचल में निवास करने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे भी निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें, इसको लेकर आरटीई योजना की।
इस बार एक महीना पहले आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। चार चरणों में पात्र पाए गए अभिभावकों के बच्चों को अब तक स्कूलों ने दाखिला नहीं दिया है। मौजूदा समय में 67.44 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश लिए गए हैं। जबकि 32.56 फीसदी चयनित बच्चे अभी भी प्रवेश से वंचित हैं।
प्रवेश लेने में आनाकानी करने वाले कॉवेंट स्कूल संचालक आगे हैं। विभाग से पात्रता की शर्तों पर खरा उतरने के बाद अभिभावक जब स्कूल पहुंचता है तो स्कूल संचालक अपने स्तर से जांच कराने के बाद ही प्रवेश देने की बात कहते हैं। 20 मई को जारी प्रवेश सूची को लेकर जो आंकड़े सामने आए,वह चौकाने वाले हैं।
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दिसंबर से लेकर मई तक करीब छह महीने के बाद भी अब तक 67.44 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश मिले हैं। आरटीई के चार चरणों में करीब 5731 आवेदनों में से 3345 बच्चों का चयन हुआ है। आवेदन के सापेक्ष 2256 सीटों पर ही अब तक बच्चों काे प्रवेश मिले हैं। अब भी करीब 1089 सीटों पर प्रवेश नहीं मिला है। स्कूल संचालक करते हैं मनमानी निर्धारित 25 प्रतिशत सीटों पर निशुल्क शिक्षा मिले, इसको लेकर कई स्तर पर पात्रता परखी जाती है। इसके बाद ही विभाग लेटर जारी करता है। इसके बाद भी स्कूल संचालक मनमानी करते हैं। अभिभावकों का आरोप है कि इसी वजह से स्कूल संचालक कम से कम प्रवेश हों, इसको लेकर तमाम तरह के कागजात मांगकर अभिभावकों को परेशान करते हैं।
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इस बार एक महीना पहले आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। चार चरणों में पात्र पाए गए अभिभावकों के बच्चों को अब तक स्कूलों ने दाखिला नहीं दिया है। मौजूदा समय में 67.44 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश लिए गए हैं। जबकि 32.56 फीसदी चयनित बच्चे अभी भी प्रवेश से वंचित हैं।
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प्रवेश लेने में आनाकानी करने वाले कॉवेंट स्कूल संचालक आगे हैं। विभाग से पात्रता की शर्तों पर खरा उतरने के बाद अभिभावक जब स्कूल पहुंचता है तो स्कूल संचालक अपने स्तर से जांच कराने के बाद ही प्रवेश देने की बात कहते हैं। 20 मई को जारी प्रवेश सूची को लेकर जो आंकड़े सामने आए,वह चौकाने वाले हैं।
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दिसंबर से लेकर मई तक करीब छह महीने के बाद भी अब तक 67.44 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश मिले हैं। आरटीई के चार चरणों में करीब 5731 आवेदनों में से 3345 बच्चों का चयन हुआ है। आवेदन के सापेक्ष 2256 सीटों पर ही अब तक बच्चों काे प्रवेश मिले हैं। अब भी करीब 1089 सीटों पर प्रवेश नहीं मिला है। स्कूल संचालक करते हैं मनमानी निर्धारित 25 प्रतिशत सीटों पर निशुल्क शिक्षा मिले, इसको लेकर कई स्तर पर पात्रता परखी जाती है। इसके बाद ही विभाग लेटर जारी करता है। इसके बाद भी स्कूल संचालक मनमानी करते हैं। अभिभावकों का आरोप है कि इसी वजह से स्कूल संचालक कम से कम प्रवेश हों, इसको लेकर तमाम तरह के कागजात मांगकर अभिभावकों को परेशान करते हैं।