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सीएचसी खेजुरी पर स्वास् थ्य सेवा बदहाल
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:06 AM IST
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खेजुरी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेजुरी की स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। न दवा की समुचित व्यवस्था है और न ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की। सिर्फ दो चिकित्सकों के सहारे सीएचसी चल रहा है। जो डाक्टर है भी वह यहां न बैठक कर सदर अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे।
36 बिस्तरों वाला यह अस्पताल अपनी 16वीं सालगिरह मना रहा है। तकनीकी दृष्टिकोण से 2 अत्याधुनिक शल्य चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं से युक्तएक ऐसा अस्पताल है ,जहां एक बार में 100 व्यक्तियों की आकस्मिक चिकित्सा करनी पड़े तो इसके लिए सीट उपलब्ध है लेकिन यहां मात्र थाना खेजुरी तथा थाना पकड़ी के मेडिकोलीगल को ही तैयार किया जाता है ।आकस्मिक सेवा के लिए उपलब्ध रोगियों को कभी भर्ती ही नहीं किया जाता। अस्पताल में पड़ी स्टेचरो की जरूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि रोगियों के अभाव में जंग खाने के लिए मजबूर हैं ।दवाएं अस्पताल में ऐसी मिलती हैं जिनका प्रभाव बहुत ही कम रहता है , सूत्र बताते हैं कि अस्पताल की पर्ची के बाद कुछ चीट वाली पर्ची रोगियों को उपलब्ध कराई जाती है। जिस पर दवाएं बाहर से मिलती हैं । प्रसूति की सुविधाओं के लिए कोई भी महिला चिकित्सक यहां कभी नहीं रही ।
चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बीके सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इन सारी समस्याओं से जिलास्तर पर सक्षम अधिकारियों को प्रतिमाह अवगत कराया जाता है ,लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं के कारण विलंब से समस्याओं का समाधान होता है। प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने अस्पताल की पुरानी व्यवस्था बहाल करने तथा रोगियों की सेवा के लिए सरकार द्वारा निर्गत सारी सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही। समस्या के निदान के लिए स्थानीय विधायक संजय यादव सिकंदरपुर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लिखित रुप से मामले का संज्ञान यदि दिया जाता है, तो जनता के हित में जो भी कराई करनी होगी उसे किया जाएगा।
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36 बिस्तरों वाला यह अस्पताल अपनी 16वीं सालगिरह मना रहा है। तकनीकी दृष्टिकोण से 2 अत्याधुनिक शल्य चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं से युक्तएक ऐसा अस्पताल है ,जहां एक बार में 100 व्यक्तियों की आकस्मिक चिकित्सा करनी पड़े तो इसके लिए सीट उपलब्ध है लेकिन यहां मात्र थाना खेजुरी तथा थाना पकड़ी के मेडिकोलीगल को ही तैयार किया जाता है ।आकस्मिक सेवा के लिए उपलब्ध रोगियों को कभी भर्ती ही नहीं किया जाता। अस्पताल में पड़ी स्टेचरो की जरूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि रोगियों के अभाव में जंग खाने के लिए मजबूर हैं ।दवाएं अस्पताल में ऐसी मिलती हैं जिनका प्रभाव बहुत ही कम रहता है , सूत्र बताते हैं कि अस्पताल की पर्ची के बाद कुछ चीट वाली पर्ची रोगियों को उपलब्ध कराई जाती है। जिस पर दवाएं बाहर से मिलती हैं । प्रसूति की सुविधाओं के लिए कोई भी महिला चिकित्सक यहां कभी नहीं रही ।
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चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बीके सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इन सारी समस्याओं से जिलास्तर पर सक्षम अधिकारियों को प्रतिमाह अवगत कराया जाता है ,लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं के कारण विलंब से समस्याओं का समाधान होता है। प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने अस्पताल की पुरानी व्यवस्था बहाल करने तथा रोगियों की सेवा के लिए सरकार द्वारा निर्गत सारी सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही। समस्या के निदान के लिए स्थानीय विधायक संजय यादव सिकंदरपुर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लिखित रुप से मामले का संज्ञान यदि दिया जाता है, तो जनता के हित में जो भी कराई करनी होगी उसे किया जाएगा।
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