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कोरोना के चलते एक माह में टल गए सोलह सौ ऑपरेशन
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बलिया। ऐसा नहीं कि कोरोना संक्रमण सामान्य जन के लिए ही मुसीबत बना है बल्कि यह पुराने व गंभीर मर्ज के शिकार रोगियों के लिए भी परेशानी का सबब बना है। जिसका कारण उनका ऑपरेशन और उपचार बाधित हो गया है, जिससे मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 16 सौ ऑपरेशन पिछले एक माह से टले हैं। इनमें अधिकांश तो गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों के ऑपरेशन हैं, जिनके मर्ज का निदान एक मात्र आपरेशन है। लेकिन कोरोना कर्फ्य लागू होने और सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद होने के कारण ऑपरेशन कराने वाले मरीज परेशान हैं। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों में मनमानी कीमत पर ऑपरेशन किया जा रहा है। जिस कारण गरीब और कमजोर तबके मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बता दें कि कोरोना कर्फ्यू से पूर्व जिला अस्पताल में प्रतिदिन आंख में मोतियाबिंद के औसतन नौ रोगियों का ऑपरेशन किया जाता था। इसके अलावा हड्डी रोग के औसतन दस, पेट की बीमारियों (अपेंडिस व पथरी) के करीब पांच रोगियों का ऑपरेशन किया जाता था। इसके अतिरिक्त नसबंदी के 250 और अन्य बीमारियों के करीब 300 ऑपेरशन किए जाते थे, जो ओपीडी सेवा बंद होने के कारण फिलहाल बंद है। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश मरीजों को बाद में ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई है। त्वरित आराम के लिए दवाओं के सेवन की अवधि बढ़ाई गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि जिला अस्पताल के आपातकालीन सेवा में हड्डी के माइनर ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल के एनेथिसिया के डॉकटर अभिषेक के अप्रैल के शुरुआती दौर में कोरोना संक्रमित होने के बाद से ही गाइनो (प्रसव) का ऑपरेशन बंद है। जबकि यहां प्रतिदिन औसतन आठ से दस सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते थे। सीएमएस डॉ सुमिता सिन्हा ने बताया कि प्रसव से संबंधित मरीजों के ऑपरेशन को पुन: चालू कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। एनेथेसिया के चिकित्सक के उपलब्ध होते ही इसे प्रारंभ करा दिया जाएगा। बताया कि इसके अलावा सामान्य रोगियों को लंबी अवधि के लिए औषधि दी जा रही है।
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प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा आपरेशन
जिले में करीब 45 पंजीकृत प्राइवेट अस्पताल हैं। इनमें कुछ निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना कर्फ्यू में भी मरीजों का उपचार और कोरोना के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित रोगियों का ऑपरेशन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम ऐसोसिएशन के सचिव डॉक्टर बीके गुप्ता ने बताया कि महामारी के इस दौर में नर्सिंग होमों द्वारा सेवा भाव के तहत इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि कोरोना काल में दूसरी अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को सहजता से उपचार मुहैया कराया जा सके।
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कोरोना के चलते टाल दिया ऑपरेशन
गड़वार थाना क्षेत्र के जनऊपुर निवासी रेखा गुप्ता(22) पुत्री स्व.बच्चा लाल गुप्ता का अप्रैल माह में पेट का ऑपरेशन होना था। लेकिन कोरोना कर्फ्यू लगने के कारण जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने उसका ऑपरेशन टाल दिया। रेखा बताती है कि आराम के लिए डॉक्टर ने लंबी अवधि की दवा दी है।
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25 अप्रैल को होना था ऑपरेशन
गड़वार थाना क्षेत्र के मसहां गांव निवासी रविंद्र राम(24) पुत्र सुदर्शन राजभर का बीते 25 अप्रैल को पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन होना था। लेकिन कोरोना कर्फ्यू में जिला अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद होने के कारण डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन भी हालात सामान्य होने तक टाल दिया है।
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कोरोना काल में ओपीडी सेवा बंद होने के कारण सभी प्रकार के ऑपरेशन को फिलहाल रोक दिया गया है और सभी चिकित्सकों को कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के कार्य में लगाया गया है। हालांकि इमरजेंसी में आने वाले हड्डी के मरीजों के ऑपरेशन चकी व्यवस्था चालू है।
- डॉ बीपी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, बलिया।
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बता दें कि कोरोना कर्फ्यू से पूर्व जिला अस्पताल में प्रतिदिन आंख में मोतियाबिंद के औसतन नौ रोगियों का ऑपरेशन किया जाता था। इसके अलावा हड्डी रोग के औसतन दस, पेट की बीमारियों (अपेंडिस व पथरी) के करीब पांच रोगियों का ऑपरेशन किया जाता था। इसके अतिरिक्त नसबंदी के 250 और अन्य बीमारियों के करीब 300 ऑपेरशन किए जाते थे, जो ओपीडी सेवा बंद होने के कारण फिलहाल बंद है। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश मरीजों को बाद में ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई है। त्वरित आराम के लिए दवाओं के सेवन की अवधि बढ़ाई गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि जिला अस्पताल के आपातकालीन सेवा में हड्डी के माइनर ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
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जिला महिला अस्पताल के एनेथिसिया के डॉकटर अभिषेक के अप्रैल के शुरुआती दौर में कोरोना संक्रमित होने के बाद से ही गाइनो (प्रसव) का ऑपरेशन बंद है। जबकि यहां प्रतिदिन औसतन आठ से दस सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते थे। सीएमएस डॉ सुमिता सिन्हा ने बताया कि प्रसव से संबंधित मरीजों के ऑपरेशन को पुन: चालू कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। एनेथेसिया के चिकित्सक के उपलब्ध होते ही इसे प्रारंभ करा दिया जाएगा। बताया कि इसके अलावा सामान्य रोगियों को लंबी अवधि के लिए औषधि दी जा रही है।
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प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा आपरेशन
जिले में करीब 45 पंजीकृत प्राइवेट अस्पताल हैं। इनमें कुछ निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना कर्फ्यू में भी मरीजों का उपचार और कोरोना के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित रोगियों का ऑपरेशन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम ऐसोसिएशन के सचिव डॉक्टर बीके गुप्ता ने बताया कि महामारी के इस दौर में नर्सिंग होमों द्वारा सेवा भाव के तहत इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि कोरोना काल में दूसरी अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को सहजता से उपचार मुहैया कराया जा सके।
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कोरोना के चलते टाल दिया ऑपरेशन
गड़वार थाना क्षेत्र के जनऊपुर निवासी रेखा गुप्ता(22) पुत्री स्व.बच्चा लाल गुप्ता का अप्रैल माह में पेट का ऑपरेशन होना था। लेकिन कोरोना कर्फ्यू लगने के कारण जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने उसका ऑपरेशन टाल दिया। रेखा बताती है कि आराम के लिए डॉक्टर ने लंबी अवधि की दवा दी है।
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25 अप्रैल को होना था ऑपरेशन
गड़वार थाना क्षेत्र के मसहां गांव निवासी रविंद्र राम(24) पुत्र सुदर्शन राजभर का बीते 25 अप्रैल को पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन होना था। लेकिन कोरोना कर्फ्यू में जिला अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद होने के कारण डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन भी हालात सामान्य होने तक टाल दिया है।
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कोरोना काल में ओपीडी सेवा बंद होने के कारण सभी प्रकार के ऑपरेशन को फिलहाल रोक दिया गया है और सभी चिकित्सकों को कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के कार्य में लगाया गया है। हालांकि इमरजेंसी में आने वाले हड्डी के मरीजों के ऑपरेशन चकी व्यवस्था चालू है।
- डॉ बीपी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, बलिया।