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16 चिकित्सक के बजाय नौ चिकित्सक की है तैनाती
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 20 May 2016 10:00 PM IST
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चिकित्सक
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क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय जाने के झंझट से बचाने के लिए सिकंदरपुर कस्बा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ। लेकिन इस सीएचसी में चिकित्सक और चिकित्सकीय सुविधाएं दयनीय होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है और रोगी जिला मुख्यालय जाने को ही मजबूर हैं।
आलम यह है कि सीएचसी पर 16 चिकित्सक के सापेक्ष नौ चिकित्सक ही तैनात हैं। जिसमें चार आयुष चिकित्सक हैं। वहीं मरीजों को बाहर से सुई-दवा लेनी तथा जांच करानी पड़ती है।
यहां आस-पास के आधा दर्जन पीएचसी से रेफर किए हुए मरीज लाए जाते है। लेकिन सुविधाओं के अभाव तथा चिकित्सकों की कमी के कारण अधिकांश मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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कागज में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहीं नहीं अस्पताल में असाध्य रोगों की दवा नहीं होने पर मरीजों को बाहर से दवा लेना पड़ता है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी जैसे-तैसे रहती है।
डीजल के अभाव में जेनरेटर एक से दो घंटे ही ओपीडी के समय चलाया जाता है। अस्पताल में एक्स-रे और पैथालाजी होने के बाद भी मरीजों को बाहर से एक्स-रे और जांच करानी पड़ती है।
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आलम यह है कि सीएचसी पर 16 चिकित्सक के सापेक्ष नौ चिकित्सक ही तैनात हैं। जिसमें चार आयुष चिकित्सक हैं। वहीं मरीजों को बाहर से सुई-दवा लेनी तथा जांच करानी पड़ती है।
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यहां आस-पास के आधा दर्जन पीएचसी से रेफर किए हुए मरीज लाए जाते है। लेकिन सुविधाओं के अभाव तथा चिकित्सकों की कमी के कारण अधिकांश मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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कागज में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहीं नहीं अस्पताल में असाध्य रोगों की दवा नहीं होने पर मरीजों को बाहर से दवा लेना पड़ता है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी जैसे-तैसे रहती है।
डीजल के अभाव में जेनरेटर एक से दो घंटे ही ओपीडी के समय चलाया जाता है। अस्पताल में एक्स-रे और पैथालाजी होने के बाद भी मरीजों को बाहर से एक्स-रे और जांच करानी पड़ती है।