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लोग परिवार के विकास के प्रति गंभीर नहीं : पूनम कर्णवाल
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बैरिया। जिला विधिक प्राधिकरण के तत्वावधान में शुक्रवार को बैरिया तहसील के सभागार में विधिक साक्षरता व जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व जज पूनम कर्णवाल ने कहा कि आज के समय में साक्षर व निरक्षर दोनों ही अपने विचारों व परिवार के विकास के प्रति गंभीर नहीं हैं और विवादों के भंवर जाल में फंसे हुए हैं। यही वजह है कि न्यायालयों में मुकदमों की भरमार है। 500 मुकदमे की जगह सीजेएम के न्यायालय में 20 हजार, एसीजेएम के न्यायालय में 15 हजार मुकदमे लंबित हैं। ऐसी हालत में लोक अदालत के माध्यम से मेडीएसन, कंसीड्रेशन व आरबिडेशन सेंटर बनाये गए हैं।
बताया कि बहुत लोगों को नहीं मालूम कि किस मामले में कहां आवेदन देना है। इसी समस्या के समाधान के लिए विधिक साक्षरता शिविर के माध्यम से लोगों को जानकारियां दी जा रही हैं। उपजिलाधिकारी लालबाबू दुबे ने कहा कि न्यायालयों में विचाराधीन मामलों को देखते हुए ही विधिक सेवा शिविर के माध्यम से जानकारी दी जा रही है कि मुकदमे का अनावश्यक बोझ न्यायालयों पर न पड़े। छोटे मामलों को गांव पर ही आपसी सूझबूझ से निपटाएं, अगर आपसे नहीं होता है तो हमसे सहयोग लें। पक्ष व विपक्ष दोनों तैयार हैं तो मामलों को आपसी सहमति से निस्तारण कराया जा सकता है। इस मौके पर एसएचओ बैरिया एसी तिवारी, तहसील के कर्मचारी, वादकारी, अधिवक्ता आदि रहे।
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बतौर मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व जज पूनम कर्णवाल ने कहा कि आज के समय में साक्षर व निरक्षर दोनों ही अपने विचारों व परिवार के विकास के प्रति गंभीर नहीं हैं और विवादों के भंवर जाल में फंसे हुए हैं। यही वजह है कि न्यायालयों में मुकदमों की भरमार है। 500 मुकदमे की जगह सीजेएम के न्यायालय में 20 हजार, एसीजेएम के न्यायालय में 15 हजार मुकदमे लंबित हैं। ऐसी हालत में लोक अदालत के माध्यम से मेडीएसन, कंसीड्रेशन व आरबिडेशन सेंटर बनाये गए हैं।
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बताया कि बहुत लोगों को नहीं मालूम कि किस मामले में कहां आवेदन देना है। इसी समस्या के समाधान के लिए विधिक साक्षरता शिविर के माध्यम से लोगों को जानकारियां दी जा रही हैं। उपजिलाधिकारी लालबाबू दुबे ने कहा कि न्यायालयों में विचाराधीन मामलों को देखते हुए ही विधिक सेवा शिविर के माध्यम से जानकारी दी जा रही है कि मुकदमे का अनावश्यक बोझ न्यायालयों पर न पड़े। छोटे मामलों को गांव पर ही आपसी सूझबूझ से निपटाएं, अगर आपसे नहीं होता है तो हमसे सहयोग लें। पक्ष व विपक्ष दोनों तैयार हैं तो मामलों को आपसी सहमति से निस्तारण कराया जा सकता है। इस मौके पर एसएचओ बैरिया एसी तिवारी, तहसील के कर्मचारी, वादकारी, अधिवक्ता आदि रहे।
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