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निर्दलीयों ने सता व विपक्ष को झकझोरा
Updated Fri, 01 Dec 2017 11:58 PM IST
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बलिया। निकाय चुनाव की मतगणना पूरी होने के साथ ही शुक्रवार की शाम तक पूरी तस्वीर भी साफ हो गई। इस चुनाव में निर्दलीयों ने सत्ता व विपक्षी पार्टियों को झकझोक कर रख दिया। भाजपा को जहां चार तो सपा व बसपा को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा। निर्दलीय प्रत्याशी चार सीटों पर जीतने में सफल रहे। इस परिणाम से मंत्री व पूर्व मंत्रियों का दांव उल्टा पड़ता रहा।
नगर निकाय चुनाव पहली बार पार्टी स्तर पर लड़ा गया और अध्यक्ष से लेकर सभासद पद तक के प्रत्याशियों को अलग-अलग पार्टियों की ओर से टिकट दिया गया था। पार्टी का टिकट लेने के लिए कमोवेश सभी दलों में मारामारी मची थी लेकिन अंतिम निर्णय के बाद कई प्रत्याशियों ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में सबसे अधिक प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने ताकत झोंकी थी। आलम यह था कि राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी ने जहां सभी निकायों में प्रचार किया था, वहीं जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभा की थी। इसके अलावा सत्ता पक्ष के सांसद व विधायक ने भी प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार किया था। लेकिन इतनी ताकत के बावजूद भाजपा को महज चार सीट नगर पंचायत बैरिया, सिकंदरपुर, मनियर व बेल्थरारोड अध्यक्ष पद ही हाथ लग सका। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने खूब चुनावी सभा की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली लेकिन वह अपने विधानसभा की एक सीट बांसडीह नगर पंचायत अध्यक्ष पद को जिताने में सफल रहे। इसी तरह बसपा को भी जिले में कोई खास सफलता तो नहीं मिली लेकिन पूर्व मंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र के एक मात्र नगर पंचायत चितबड़ागांव नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट को पार्टी के पाले में करने में सफल रहे। सांसद क्षेत्र की बात करें तो सलेमपुर सांसद के क्षेत्र में तीन नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर सफलता मिली तो बलिया के सांसद को एक मात्र बैरिया नगर पंचायत अध्यक्ष पद को ही जिता सके। विधायकों की बात करें तो बैरिया, सिकंदरपुर व बेल्थरारोड के विधायक अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल रहे। बांसडीह विधायक व नेता प्रतिपक्ष केवल एक सीट बचा सके तो रसड़ा विधायक को मायूसी ही हाथ लगी।
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नगर निकाय चुनाव पहली बार पार्टी स्तर पर लड़ा गया और अध्यक्ष से लेकर सभासद पद तक के प्रत्याशियों को अलग-अलग पार्टियों की ओर से टिकट दिया गया था। पार्टी का टिकट लेने के लिए कमोवेश सभी दलों में मारामारी मची थी लेकिन अंतिम निर्णय के बाद कई प्रत्याशियों ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में सबसे अधिक प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने ताकत झोंकी थी। आलम यह था कि राज्य मंत्री उपेंद्र तिवारी ने जहां सभी निकायों में प्रचार किया था, वहीं जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभा की थी। इसके अलावा सत्ता पक्ष के सांसद व विधायक ने भी प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार किया था। लेकिन इतनी ताकत के बावजूद भाजपा को महज चार सीट नगर पंचायत बैरिया, सिकंदरपुर, मनियर व बेल्थरारोड अध्यक्ष पद ही हाथ लग सका। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने खूब चुनावी सभा की लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली लेकिन वह अपने विधानसभा की एक सीट बांसडीह नगर पंचायत अध्यक्ष पद को जिताने में सफल रहे। इसी तरह बसपा को भी जिले में कोई खास सफलता तो नहीं मिली लेकिन पूर्व मंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र के एक मात्र नगर पंचायत चितबड़ागांव नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट को पार्टी के पाले में करने में सफल रहे। सांसद क्षेत्र की बात करें तो सलेमपुर सांसद के क्षेत्र में तीन नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर सफलता मिली तो बलिया के सांसद को एक मात्र बैरिया नगर पंचायत अध्यक्ष पद को ही जिता सके। विधायकों की बात करें तो बैरिया, सिकंदरपुर व बेल्थरारोड के विधायक अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल रहे। बांसडीह विधायक व नेता प्रतिपक्ष केवल एक सीट बचा सके तो रसड़ा विधायक को मायूसी ही हाथ लगी।
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