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ऐसा नुमाइंदा हो जो किसानों का समझे दर्द
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sat, 28 Jan 2017 10:55 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे किसान
- फोटो : अमर उजाला
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तुम्हारी मेहनत को चूहे और नेता खा जाते हैं, भूखों को कुछ मिलता नहीं अनाज खुले में सड़ जाते हैं और मेरे देश के किसान भूखे मर जाते हैं। कवि अंजान की यह पंक्तियां किसानों की दशा पर सटीक बैठती हैं। शनिवार को महसी तहसील के भगवानपुर बाजार में अमर उजाला की ओर से आयोजित फोकस ग्रुप में किसानों ने बेबाकी से विधायक के चयन को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। सभी ने अमर उजाला की इस पहल का स्वागत किया।
उपेक्षा व बदहाली के दर्द से कराह रहे काश्तकारों ने कहा कि जिनके दम पर प्रत्याशी चुनाव जीतकर सदन पहुंचता है, वही चुनाव जीतने के बाद जनता को भुला देता है। ऐसे में यदि इस बार चूक गए तो फिर पांच साल तक पछताना पड़ेगा। सभी ने एक स्वर में कहा कि जिस प्रत्याशी या पार्टी के एजेंडे में भूमि अधिग्रहण, किसानों की खाद, बीज, बिजली, पानी और गन्ना भुगतान की समस्या के निराकरण की बात होगी, किसानों का वोट उसी को मिलेगा। प्रत्याशी का ईमानदार, कर्मठ व सर्वसुलभ होना अनिवार्य है। ऐसा विधायक होना चाहिए जो किसानों का दर्द समझे।
भगवानपुर के विद्यालय परिसर में अमर उजाला सरोकार के तहत फोकस ग्रुप में जिले के किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने विधानसभा चुनाव में हमारा नेता कैसा हो विषय पर बेबाकी से अपना पक्ष रखा। इस दौरान जिले के विकास के साथ खाद, बिजली, पानी, सिंचाई, सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सभी ने किसान हित में कठोर नीति लागू करने की वकालत की।
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बोले कि जिस तरह से सरकारें किसानों की उपज का दाम निर्धारित करती हैं, वह गलत है। दाम निर्धारण में किसानों की सहमति लेनी चाहिए। गन्ना बकाया भुगतान का मुद्दा भी गरमाया रहा। किसानों ने कहा कि मिल प्रबंधन की कारगुजारियों से किसान आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। किसान कर्जदार हो रहे हैं। आए दिन आत्महत्या की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। लेकिन सरकारें किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है।
सभी राजनीतिक दलों ने समृद्ध भारत की तस्वीर बनाने के लिए किसानों की आर्थिक सेहत सुधारने की बात कही है, लेकिन दिल्ली की सत्ता हासिल होने के बाद मुद्दे सत्ता के गलियारों में मौन हो जाते हैं। पिछले चुनाव में भी प्रत्याशियों ने जोर-शोर से किसानों की समस्याओं को निपटाने के लिए खूब वादे किए, लेकिन जीतने के बाद उन्हें भुला दिया। सभी ने कहा कि सदन को जाने वाले नेता के चुनाव में समाज के हर वर्ग के साथ किसानों व मजदूरों को भी आगे आना होगा। सभी का मानना है कि प्रत्याशी शिक्षित हो, उसे क्षेत्र की समस्याओं के प्रति गहरी समझ हो, संवेदनशील होना अनिवार्य है।
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उपेक्षा व बदहाली के दर्द से कराह रहे काश्तकारों ने कहा कि जिनके दम पर प्रत्याशी चुनाव जीतकर सदन पहुंचता है, वही चुनाव जीतने के बाद जनता को भुला देता है। ऐसे में यदि इस बार चूक गए तो फिर पांच साल तक पछताना पड़ेगा। सभी ने एक स्वर में कहा कि जिस प्रत्याशी या पार्टी के एजेंडे में भूमि अधिग्रहण, किसानों की खाद, बीज, बिजली, पानी और गन्ना भुगतान की समस्या के निराकरण की बात होगी, किसानों का वोट उसी को मिलेगा। प्रत्याशी का ईमानदार, कर्मठ व सर्वसुलभ होना अनिवार्य है। ऐसा विधायक होना चाहिए जो किसानों का दर्द समझे।
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भगवानपुर के विद्यालय परिसर में अमर उजाला सरोकार के तहत फोकस ग्रुप में जिले के किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने विधानसभा चुनाव में हमारा नेता कैसा हो विषय पर बेबाकी से अपना पक्ष रखा। इस दौरान जिले के विकास के साथ खाद, बिजली, पानी, सिंचाई, सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सभी ने किसान हित में कठोर नीति लागू करने की वकालत की।
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बोले कि जिस तरह से सरकारें किसानों की उपज का दाम निर्धारित करती हैं, वह गलत है। दाम निर्धारण में किसानों की सहमति लेनी चाहिए। गन्ना बकाया भुगतान का मुद्दा भी गरमाया रहा। किसानों ने कहा कि मिल प्रबंधन की कारगुजारियों से किसान आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं। किसान कर्जदार हो रहे हैं। आए दिन आत्महत्या की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। लेकिन सरकारें किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है।
सभी राजनीतिक दलों ने समृद्ध भारत की तस्वीर बनाने के लिए किसानों की आर्थिक सेहत सुधारने की बात कही है, लेकिन दिल्ली की सत्ता हासिल होने के बाद मुद्दे सत्ता के गलियारों में मौन हो जाते हैं। पिछले चुनाव में भी प्रत्याशियों ने जोर-शोर से किसानों की समस्याओं को निपटाने के लिए खूब वादे किए, लेकिन जीतने के बाद उन्हें भुला दिया। सभी ने कहा कि सदन को जाने वाले नेता के चुनाव में समाज के हर वर्ग के साथ किसानों व मजदूरों को भी आगे आना होगा। सभी का मानना है कि प्रत्याशी शिक्षित हो, उसे क्षेत्र की समस्याओं के प्रति गहरी समझ हो, संवेदनशील होना अनिवार्य है।