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खसरे से तीन बच्चों की मौत, 10 बीमार
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sat, 04 Feb 2017 10:20 PM IST
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खसरे से बच्चों की मौत के बाद बिलखते परिवारीजन
- फोटो : अमर उजाला
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टेपरा प्रधानपुरवा गांव में शुक्रवार की रात खसरे से पीड़ित तीन मासूमों की सांसें थम गईं, जबकि 10 से अधिक बच्चे बीमार हैं। इनमें से छह की हालत काफी नाजुक बताई जा रही है। सूचना के 24 घंटे बाद चिकित्सीय टीम मौत की जानकारी पाकर शनिवार देर शाम गांव रवाना हुई, जबकि खसरा चार दिन से फैला हुआ है।
तराई में बदल रहे मौसम के बीच खसरे का प्रकोप शुरू हो गया है। जंगल से सटे ग्राम पंचायत नौबना के टेपरा प्रधानपुरवा गांव में चार दिन से खसरे का प्रकोप है। गांव का कोई ऐसा परिवार नहीं है, जिसके बच्चे खसरे की चपेट में न हों।
तेज बुखार के साथ सभी के शरीर पर लाल दाने निकल रहे हैं। खसरा फैलने की सूचना गांव निवासी सतीश, विद्या प्रकाश, रमेश, गुड्डू आदि ने तीन दिन पूर्व सीएचसी मिहींपुरवा तथा सीएमओ कार्यालय को दी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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पूर्व प्रधान कैलाश यादव ने मिहींपुरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खसरे से बच्चों की हालत गंभीर होने की सूचना दी, लेकिन इलाज का इंतजाम नहीं हो सका। इसके चलते शुक्रवार देर रात बुखार और फफोले के जख्म से कराहते हुए इलाज के अभाव में गांव निवासी अनीता (14) पुत्री मौजीलाल, हिमांशु (4) पुत्र गुड्डू व जयंकर (6) पुत्र शिवलाल की एक से डेढ़ घंटे के अंतराल में मौत हो गई। जबकि गांव निवासी दिव्यांशु (6), रूपा (6), रितेश (3), पूजा (8), रेखा (4) व गोपाल (3) की हालत नाजुक बताई जा रही है। जबकि 10 से अधिक बच्चे खसरे की चपेट में हैं।
रात में तीन बच्चों की मौत की सूचना शनिवार सुबह पुन: ग्रामीणों ने सीएमओ को दी। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी हरकत में आए। शनिवार शाम को सीएचसी मिहींपुरवा व संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम को गांव रवाना किया गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुणलाल ने कहा कि टेपरा प्रधानपुरवा गांव में खसरा फैलने की सूचना सुबह ही मिली है। सीएचसी और संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम को गांव भेजा गया है। टीम के चिकित्सक व कर्मी कैंप कर रोगियों का इलाज करेंगे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानपुरवा नौबना गांव में सप्ताह भर पूर्व भी खसरे का प्रकोप था। गांव निवासी अनुज (8 माह) व श्याम (3 माह) की मौत हो चुकी है। लेकिन उस समय खसरा इतने बड़े पैमाने पर नहीं फैला था। हालांकि अनुज के पिता बंशीलाल व श्याम के पिता रमेश ने सीएचसी पर सूचना दी थी, लेकिन सीजनल बुखार बताकर स्वास्थ्य कर्मियों ने किनारा कस लिया था।
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तराई में बदल रहे मौसम के बीच खसरे का प्रकोप शुरू हो गया है। जंगल से सटे ग्राम पंचायत नौबना के टेपरा प्रधानपुरवा गांव में चार दिन से खसरे का प्रकोप है। गांव का कोई ऐसा परिवार नहीं है, जिसके बच्चे खसरे की चपेट में न हों।
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तेज बुखार के साथ सभी के शरीर पर लाल दाने निकल रहे हैं। खसरा फैलने की सूचना गांव निवासी सतीश, विद्या प्रकाश, रमेश, गुड्डू आदि ने तीन दिन पूर्व सीएचसी मिहींपुरवा तथा सीएमओ कार्यालय को दी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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पूर्व प्रधान कैलाश यादव ने मिहींपुरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खसरे से बच्चों की हालत गंभीर होने की सूचना दी, लेकिन इलाज का इंतजाम नहीं हो सका। इसके चलते शुक्रवार देर रात बुखार और फफोले के जख्म से कराहते हुए इलाज के अभाव में गांव निवासी अनीता (14) पुत्री मौजीलाल, हिमांशु (4) पुत्र गुड्डू व जयंकर (6) पुत्र शिवलाल की एक से डेढ़ घंटे के अंतराल में मौत हो गई। जबकि गांव निवासी दिव्यांशु (6), रूपा (6), रितेश (3), पूजा (8), रेखा (4) व गोपाल (3) की हालत नाजुक बताई जा रही है। जबकि 10 से अधिक बच्चे खसरे की चपेट में हैं।
रात में तीन बच्चों की मौत की सूचना शनिवार सुबह पुन: ग्रामीणों ने सीएमओ को दी। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी हरकत में आए। शनिवार शाम को सीएचसी मिहींपुरवा व संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम को गांव रवाना किया गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुणलाल ने कहा कि टेपरा प्रधानपुरवा गांव में खसरा फैलने की सूचना सुबह ही मिली है। सीएचसी और संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम को गांव भेजा गया है। टीम के चिकित्सक व कर्मी कैंप कर रोगियों का इलाज करेंगे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानपुरवा नौबना गांव में सप्ताह भर पूर्व भी खसरे का प्रकोप था। गांव निवासी अनुज (8 माह) व श्याम (3 माह) की मौत हो चुकी है। लेकिन उस समय खसरा इतने बड़े पैमाने पर नहीं फैला था। हालांकि अनुज के पिता बंशीलाल व श्याम के पिता रमेश ने सीएचसी पर सूचना दी थी, लेकिन सीजनल बुखार बताकर स्वास्थ्य कर्मियों ने किनारा कस लिया था।