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बाढ़ से गांव को खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2016 10:52 PM IST
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नरहीं क्षेत्र में बाढ़ की पानी से घिरा डेरा।
- फोटो : balia
घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से तेज हुई कटान के निशाने पर महसी क्षेेत्र का चुरई पुरवा गांव आ गया है। नदी की लहरों में गांव के 13 मकान समा चुके हैं। करीब 80 बीघा खेत भी कटान की भेंट चढ़ गए। इससे तटवर्ती इलाकों के ग्रामीण दहशत में हैं। कटान रोकने के कोई उपाय अब तक नहीं किए गए हैं।
घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार को 106.146 मीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष जलस्तर अभी भी सात सेमी अधिक है। इस कारण कटान अचानक बढ़ गई है। नदी ने कटान करते हुए महसी तहसील क्षेत्र के चुरईपुरवा गांव को निशाने पर ले लिया है।
गांव निवासी अशोक कुमार, सत्य सागर, राजेश, शंभू दयाल, ललऊ, सुमन, शिवम, उमाशंकर और राजाराम समेत 13 ग्रामीणों के आशियाने को नदी ने लील लिया है। यह ग्रामीण गृहस्थी का सामान समेटकर परिवार समेत खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं।
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क्षेत्रीय लेखपाल नदी में समाहित हो रहे मकानों की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। मकान कटने की सूचना राजस्वकर्मियाें ने तहसील पर दी लेकिन अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इन हालात में ग्रामीण दहशत में हैं।
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घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार को 106.146 मीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष जलस्तर अभी भी सात सेमी अधिक है। इस कारण कटान अचानक बढ़ गई है। नदी ने कटान करते हुए महसी तहसील क्षेत्र के चुरईपुरवा गांव को निशाने पर ले लिया है।
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गांव निवासी अशोक कुमार, सत्य सागर, राजेश, शंभू दयाल, ललऊ, सुमन, शिवम, उमाशंकर और राजाराम समेत 13 ग्रामीणों के आशियाने को नदी ने लील लिया है। यह ग्रामीण गृहस्थी का सामान समेटकर परिवार समेत खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं।
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क्षेत्रीय लेखपाल नदी में समाहित हो रहे मकानों की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। मकान कटने की सूचना राजस्वकर्मियाें ने तहसील पर दी लेकिन अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इन हालात में ग्रामीण दहशत में हैं।