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थर्मोसेंसर कैमरे से होगी जंगल से सटे गांवों की निगरानी
बहराइच
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:53 PM IST
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लगाए जा रहे थर्मोसेंसर कैमरे।
- फोटो : अमर उजाला
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर और मुर्तिहा रेंज में बाघ और तेंदुआ प्रभावित गांवों की निगरानी अब थर्मो सेंसर कैमरों से होगी। अमृतपुर पुरैना, गंगापुर व आसपास के गांवों में 20 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के द्वारा बाघ और तेंदुओं के मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। ग्रामीणों को भी सजग किया जाएगा। वन विभाग के साथ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम गांव में डेरा डाले हुए है लेकिन ताबड़तोड़ हो रहे हमलों से गांव के लोग दहशतजदा हैं। अभी तक वह अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मुर्तिहा रेंज अंतर्गत अमृतपुर पुरैना गांव बाघ और तेंदुओं के निशाने पर है। इसके अलावा गंगापुर, मधवापुर, हरखापुर, सेमरीघटही, सेमरीमलमला गांव में भी बाघ और तेंदुओं की दहाड़ सुनाई पड़ रही है।
पखवारे भर पूर्व दो मासूमों को निवाला बनाते हुए बाघ और तेंदुओं ने पांच ग्रामीणों को घायल किया जबकि 18 से अधिक मवेशियों को मार डाला। ऐसे में मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया।
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फिर सुरक्षा के इंतजाम के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से संपर्क साधा। डब्ल्यडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन की अगुवाई में अमृतपुर पुरैना व आसपास के इलाकों में प्रथम चरण में 10 कैमरे रविवार तक लगाए गए।
लेकिन बाघ और तेंदुओं का मूवमेंट का दायरा अधिक देखते हुए 10 और कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया। उसी के तहत सोमवार दोपहर बाद से शेष 10 कैमरों को भी जंगल और गांवों के मध्य गन्ने के खेत और पेड़ों में स्थापित किया गया है। जिससे बाघ और तेंदुओं के मूवमेंट कैद किया जा सके।
साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षा के प्रति सजग किया जा सके। परियोजनाधिकारी दबीर ने बताया कि कैमरों के साथ चार पिंजरे पहले से लगे हुए हैं। वन विभाग व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम क्षेत्र में निरंतर निगरानी कर रही है। हमलावर तेंदुआ या बाघ पिंजरे में फंस सकेगा। ग्रामीणों को चितिंत होने की जरूरत नहीं है।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मुर्तिहा रेंज अंतर्गत अमृतपुर पुरैना गांव बाघ और तेंदुओं के निशाने पर है। इसके अलावा गंगापुर, मधवापुर, हरखापुर, सेमरीघटही, सेमरीमलमला गांव में भी बाघ और तेंदुओं की दहाड़ सुनाई पड़ रही है।
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पखवारे भर पूर्व दो मासूमों को निवाला बनाते हुए बाघ और तेंदुओं ने पांच ग्रामीणों को घायल किया जबकि 18 से अधिक मवेशियों को मार डाला। ऐसे में मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों ने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया।
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फिर सुरक्षा के इंतजाम के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से संपर्क साधा। डब्ल्यडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन की अगुवाई में अमृतपुर पुरैना व आसपास के इलाकों में प्रथम चरण में 10 कैमरे रविवार तक लगाए गए।
लेकिन बाघ और तेंदुओं का मूवमेंट का दायरा अधिक देखते हुए 10 और कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया। उसी के तहत सोमवार दोपहर बाद से शेष 10 कैमरों को भी जंगल और गांवों के मध्य गन्ने के खेत और पेड़ों में स्थापित किया गया है। जिससे बाघ और तेंदुओं के मूवमेंट कैद किया जा सके।
साथ ही ग्रामीणों को सुरक्षा के प्रति सजग किया जा सके। परियोजनाधिकारी दबीर ने बताया कि कैमरों के साथ चार पिंजरे पहले से लगे हुए हैं। वन विभाग व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम क्षेत्र में निरंतर निगरानी कर रही है। हमलावर तेंदुआ या बाघ पिंजरे में फंस सकेगा। ग्रामीणों को चितिंत होने की जरूरत नहीं है।