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Bahraich News: 169 वर्षों में बदल गई बहराइच की तस्वीर
Fri, 11 Jul 2025 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:48 AM IST
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बहराइच। बहराइच जिले का गठन मध्यकाल में अकबर के समय में हुआ था। उस समय इसे सिरकार बहराइच के नाम से जाना जाता था।
अंग्रेजों ने 1956 में बहराइच को प्रशासनिक आधार पर पूर्ण जिले का दर्जा दिया। उस समय आज का गोंडा जिला व खीरी का कुछ हिस्सा बहराइच का अंग था। जिसे बाद में सुविधा के अनुसार अलग किया गया। गठन के समय जिले की जनसंख्या क्या थी, इसके बारे में आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है लेकिन 1901 में कराई गई जनगणना में जिले की जनसंख्या 7,64,477 थी जो 2011 में बढ़ कर 34,87,731 पहुंच गई।
इस दौरान केवल 1911 व 2011 ही ऐसा वर्ष रहा जब जनसंख्या में कमी आई। विकास के क्षेत्र में भी इन 196 वर्षों में जिले की तस्वीर बदल गई। यह बीमारू से आत्मनिर्भर जनपद बन गया।
शिक्षा व चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन
जिले में 2803 परिषदीय स्कूलों के साथ ही 306 माध्यमिक स्कूल व 45 डिग्री कॉलेज हैं। चिकित्सा के लिए 15 सीएचसी, 55 पीएचसी, 334 हेल्थ सेंटर व 600 एएनएम सेंटर, पांच प्रथम संदर्भन इकाइयां हैं जहां लोगों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं। इसी के साथ जब जिले में श्रावस्ती भी जुड़ा था तो उस समय मात्र 18 पुलिस थाने हुआ करते थे जिनकी संख्या अब 23 हो चुकी है। विकास का दायरा बढ़ाने के लिए दो नगरपालिका व छह नगर पंचायतें भी बनीं।
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हुनरमंद हाथों ने भी दिखाया कमाल
जिले में इस समय 826 राइस मिल व आठ दाल मिल हैं। इनमें दुर्गा ब्रांड की दाल का विदेश में निर्यात होता है। इसके अतिरिक्त दो सरिया मिल, चार चीनी मिल के साथ दो सौ से अधिक छोटे उद्योग हैं।
युवाओं ने विदेश में गाड़ा झंडा
इसिता त्रिवेदी इस समय नासा में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं तो मुरारी अग्रवाल वाशिंगटन अमेरिका में प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही कई युवा अमेरिका में रह कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
हम दो हमारे दो के लिए भी चल रहा अभियान
जनसंख्या नियंत्रण के लिए हम दो, हमारे दो अभियान के लिए जिले में जागरूकता के साथ ही अन्य प्रयास भी हो रहे हैं। मार्च 25 तक 46 पुरुषों व 4653 महिलाओं नसबंदी हुई। 31,552 महिलाओं को कापरटी लगाया जा चुका है।
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अंग्रेजों ने 1956 में बहराइच को प्रशासनिक आधार पर पूर्ण जिले का दर्जा दिया। उस समय आज का गोंडा जिला व खीरी का कुछ हिस्सा बहराइच का अंग था। जिसे बाद में सुविधा के अनुसार अलग किया गया। गठन के समय जिले की जनसंख्या क्या थी, इसके बारे में आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है लेकिन 1901 में कराई गई जनगणना में जिले की जनसंख्या 7,64,477 थी जो 2011 में बढ़ कर 34,87,731 पहुंच गई।
इस दौरान केवल 1911 व 2011 ही ऐसा वर्ष रहा जब जनसंख्या में कमी आई। विकास के क्षेत्र में भी इन 196 वर्षों में जिले की तस्वीर बदल गई। यह बीमारू से आत्मनिर्भर जनपद बन गया।
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शिक्षा व चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन
जिले में 2803 परिषदीय स्कूलों के साथ ही 306 माध्यमिक स्कूल व 45 डिग्री कॉलेज हैं। चिकित्सा के लिए 15 सीएचसी, 55 पीएचसी, 334 हेल्थ सेंटर व 600 एएनएम सेंटर, पांच प्रथम संदर्भन इकाइयां हैं जहां लोगों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं। इसी के साथ जब जिले में श्रावस्ती भी जुड़ा था तो उस समय मात्र 18 पुलिस थाने हुआ करते थे जिनकी संख्या अब 23 हो चुकी है। विकास का दायरा बढ़ाने के लिए दो नगरपालिका व छह नगर पंचायतें भी बनीं।
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हुनरमंद हाथों ने भी दिखाया कमाल
जिले में इस समय 826 राइस मिल व आठ दाल मिल हैं। इनमें दुर्गा ब्रांड की दाल का विदेश में निर्यात होता है। इसके अतिरिक्त दो सरिया मिल, चार चीनी मिल के साथ दो सौ से अधिक छोटे उद्योग हैं।
युवाओं ने विदेश में गाड़ा झंडा
इसिता त्रिवेदी इस समय नासा में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं तो मुरारी अग्रवाल वाशिंगटन अमेरिका में प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही कई युवा अमेरिका में रह कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
हम दो हमारे दो के लिए भी चल रहा अभियान
जनसंख्या नियंत्रण के लिए हम दो, हमारे दो अभियान के लिए जिले में जागरूकता के साथ ही अन्य प्रयास भी हो रहे हैं। मार्च 25 तक 46 पुरुषों व 4653 महिलाओं नसबंदी हुई। 31,552 महिलाओं को कापरटी लगाया जा चुका है।