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तराई में लगातार बढ़ रहे टीबी के मरीज
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 22 Jul 2015 10:24 PM IST
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बहराइच। राज्य क्षय रोग अधिकारी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की 15 सदस्यीय टीम के साथ बुधवार को क्षय रोग अस्पताल का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने जांच, इलाज व अन्य सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया। इससे पूर्व तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत 14 ब्लॉकों में स्थित 27 स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच, व इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।
सूत्रों की मानें तो चिकित्सकीय सुविधाओं में कई खामियां मिलीं। इस कारण तराई में एमडीआर टीबी के रोगी बढ़ रहे हैं। इस पर भी टीम ने चिंता जताई है।
विभाग के निदेशक गुरुवार को डीएम से मुलाकात कर संयुक्त रिपोर्ट सौंपेंगे। उम्मीद की जा रही है आने वाले महीने में जिले में व्यापक स्तर पर टीबी रोगियों की पहचान व उनके इलाज के लिए कार्यक्रम चलाया जाएगा।
रिवाइज्ड नेशनल टीबी कंट्रोल प्रोग्राम की समीक्षा व भौतिक सत्यापन के लिए राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. आलोक रंजन गत सोमवार को बहराइच पहुंचे।
उनके साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन व आस-पड़ोस जिलों के जिला क्षय रोग अधिकारियों की 15 सदस्यीय टीम भी पहुंची।
डॉ. आलोक रंजन ने जिले के 14 ब्लॉकों में स्थित सीएचसी, पीएचसी समेत 27 स्वास्थ्य केंद्रों का भ्रमण किया। इस दौरान टीम ने क्षय रोगियों की जांच व इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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विगत तीन माह में चिह्नित किए करीब डेढ़ हजार टीबी रोगियों तक भी टीम पहुंची। इसके बाद बुधवार को टीम ने सीएमओ कार्यालय सभागार में लैब अस्सिटेंट व लैब टेक्नीशियन के साथ प्रोग्राम की समीक्षा।
एलए व एलटी को जांच के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति आगाह किया। डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि जिले में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर) के 68 रोगी मिले हैं। इन रोगियों को समाज को खतरा है।
इनका उपचार होना जरूरी है। वहीं सूत्रों की मानें तो निरीक्षण के दौरान टीम को कई तकनीकी खामियां मिली हैं। प्रोग्राम के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती जा रही है।
डॉ. रंजन ने बताया कि गुरुवार को विभाग के निदेशक डॉ. शैलेंद्र भटनागर बहराइच पहुंचे। वे डीएम अभय कुमार को जिले की संयुक्त रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद कार्यक्रम को और प्रभावी ढंग से जिले में संचालित करने पर रणनीति तय की जाएगी।
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इस दौरान उन्होंने जांच, इलाज व अन्य सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया। इससे पूर्व तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत 14 ब्लॉकों में स्थित 27 स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच, व इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।
सूत्रों की मानें तो चिकित्सकीय सुविधाओं में कई खामियां मिलीं। इस कारण तराई में एमडीआर टीबी के रोगी बढ़ रहे हैं। इस पर भी टीम ने चिंता जताई है।
विभाग के निदेशक गुरुवार को डीएम से मुलाकात कर संयुक्त रिपोर्ट सौंपेंगे। उम्मीद की जा रही है आने वाले महीने में जिले में व्यापक स्तर पर टीबी रोगियों की पहचान व उनके इलाज के लिए कार्यक्रम चलाया जाएगा।
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रिवाइज्ड नेशनल टीबी कंट्रोल प्रोग्राम की समीक्षा व भौतिक सत्यापन के लिए राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. आलोक रंजन गत सोमवार को बहराइच पहुंचे।
उनके साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन व आस-पड़ोस जिलों के जिला क्षय रोग अधिकारियों की 15 सदस्यीय टीम भी पहुंची।
डॉ. आलोक रंजन ने जिले के 14 ब्लॉकों में स्थित सीएचसी, पीएचसी समेत 27 स्वास्थ्य केंद्रों का भ्रमण किया। इस दौरान टीम ने क्षय रोगियों की जांच व इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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विगत तीन माह में चिह्नित किए करीब डेढ़ हजार टीबी रोगियों तक भी टीम पहुंची। इसके बाद बुधवार को टीम ने सीएमओ कार्यालय सभागार में लैब अस्सिटेंट व लैब टेक्नीशियन के साथ प्रोग्राम की समीक्षा।
एलए व एलटी को जांच के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति आगाह किया। डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि जिले में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर) के 68 रोगी मिले हैं। इन रोगियों को समाज को खतरा है।
इनका उपचार होना जरूरी है। वहीं सूत्रों की मानें तो निरीक्षण के दौरान टीम को कई तकनीकी खामियां मिली हैं। प्रोग्राम के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती जा रही है।
डॉ. रंजन ने बताया कि गुरुवार को विभाग के निदेशक डॉ. शैलेंद्र भटनागर बहराइच पहुंचे। वे डीएम अभय कुमार को जिले की संयुक्त रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद कार्यक्रम को और प्रभावी ढंग से जिले में संचालित करने पर रणनीति तय की जाएगी।