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गर्मी में सूख रहे हलक, हैंडपंप भी दे रहे दगा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:08 PM IST
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जर्जर हालत में पड़ा हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी में पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्राें में लगाए गए ढाई हजार हैंडपंप रिबोर होने की स्थिति में है। जबकि दो हजार हैंडपंप मामूली खराबियों के कारण बंद पड़े है। इनको ठीक करने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जिससे पेयजल की किल्लत बढ़ती जा रही है।
अप्रैल माह में जून की गर्मी का एहसास हो रहा है। ऐसे में पेयजल की किल्लत सताने लगी है। जनपद के 14 ब्लाकों मे लगभग 48715 हजार के करीब हैंडपंप स्थापित हैं। इन हैंडपंपों से साफ पानी की आपूर्ति तो दूर की बात है, अब घूंट भर पानी निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। जनपद के 14 ब्लाकों में जल निगम के आंकड़ाें के मुताबिक लगभग ढाई हजार हैंडपंप रिबोर की स्थिति में है।
जबकि पंचायती राज विभाग के हिसाब से इन ब्लॉकों मे करीब दो हजार हैंडपंप मामूली खराबियों से पानी नहीं दे रहे है। जबकि सरकारी आंकड़ाें से स्थिति भिन्न है। आधेे से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। पानी नहीं निकल रहा है। गांव में लगे हैंडपंप तो खराब हैं ही, शहर और कस्बों में भी यही हाल है।
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इतना ही नहीं 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालयों में भी स्थापित 600 हैंडपंप खराब हैं। जिससे छात्र-छात्राओं को भी पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल माह में जून की गर्मी का एहसास हो रहा है। तराई का चढ़ता पारा और बढ़ती बिजली कटौती से पेयजल का संकट और भी गहराने की उम्मीद है।
कुछ की कराई है मरम्मत, अब नहीं है बजट
दिसंबर माह तक चिन्हित खराब हैंडपंपों की सूची मिली थी। उसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में 50-50 हैंडपंपों को चिह्नित कर उनकी मरम्मत कराई गई। उसको रिबोर कराकर पानी पीने योग्य बनाया गया। लेकिन इस समय बजट नहीं है। फिर भी गर्मी के मौसम के चलते जांच करवाएंगे। बजट की मांग होगी, जहां भी हैंडपंप खराब होंगे। पुन: दुरुस्त करवाए जाएंगे। पेयजल की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। -आरबी राम अधिशासी अभियंता जल निगम
100 से अधिक हैंडपंप रिबोर लायक
नगरपालिका परिसर में लगा हैंडपंप खराब पड़ा है। इसके सामने ही कुछ दूरी पर तहसील के निकट लगा हैंडपंप भी पानी नहीं दे रहा है। शहर के 31 वार्डो में लगभग 285 हैंडपंप स्थापित हैं। लेकिन इनमें 100 से अधिक रिबोर के लायक हैं। शहर के मोहल्ला बरहियापुरा निवासी भानु कश्यप और सुशील का कहना है कि साफ पेयजल की आपूर्ति सबसे बड़ी समस्या है। कचेहरी रोड निवासी आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि पानी की जरुरत को पूरा करना सबसे अहम है। इस पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
नानपारा में भी बदहाल है स्थिति
नानपारा में 225 खराब पड़े हैं। जिसमें 110 रिबोर लायक है। गनेशपुर गांव निवासी दरबारी लाल, जैतापुर निवासी अवधेश, बाबागंज निवासी सरोज मिश्रा ने कहा कि गांवों में हैंडपंप खराब होने से पानी की दिक्कत होती है। इसकी शिकायत गांव से लेकर जिला स्तर तक की जा चुकी है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
महसी में भी समस्या
महसी के एरिया क्षेत्र के ही 86 में से 35 हैंडपंप रिबोर लायक है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जलनिगम को कई बार पत्र भेजा गया है। इसको लेकर अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए। गर्मी बढ़ने से गांव में पानी का संकट बढ़ गया है।
550 हैंडपंप होने हैं रिबोर
कैसरगंज तहसील क्षेत्र में 550 हैंडपंप रिबोर की स्थिति में हैं। तहसील कैसरगंज के ग्राम परशुरामपुर किला निवासी मनोज, राजन और रेहान का कहना है कि गांवों में पेयजल संकट बढ़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार को अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करनी चाहिए।
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अप्रैल माह में जून की गर्मी का एहसास हो रहा है। ऐसे में पेयजल की किल्लत सताने लगी है। जनपद के 14 ब्लाकों मे लगभग 48715 हजार के करीब हैंडपंप स्थापित हैं। इन हैंडपंपों से साफ पानी की आपूर्ति तो दूर की बात है, अब घूंट भर पानी निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। जनपद के 14 ब्लाकों में जल निगम के आंकड़ाें के मुताबिक लगभग ढाई हजार हैंडपंप रिबोर की स्थिति में है।
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जबकि पंचायती राज विभाग के हिसाब से इन ब्लॉकों मे करीब दो हजार हैंडपंप मामूली खराबियों से पानी नहीं दे रहे है। जबकि सरकारी आंकड़ाें से स्थिति भिन्न है। आधेे से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। पानी नहीं निकल रहा है। गांव में लगे हैंडपंप तो खराब हैं ही, शहर और कस्बों में भी यही हाल है।
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इतना ही नहीं 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालयों में भी स्थापित 600 हैंडपंप खराब हैं। जिससे छात्र-छात्राओं को भी पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल माह में जून की गर्मी का एहसास हो रहा है। तराई का चढ़ता पारा और बढ़ती बिजली कटौती से पेयजल का संकट और भी गहराने की उम्मीद है।
कुछ की कराई है मरम्मत, अब नहीं है बजट
दिसंबर माह तक चिन्हित खराब हैंडपंपों की सूची मिली थी। उसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में 50-50 हैंडपंपों को चिह्नित कर उनकी मरम्मत कराई गई। उसको रिबोर कराकर पानी पीने योग्य बनाया गया। लेकिन इस समय बजट नहीं है। फिर भी गर्मी के मौसम के चलते जांच करवाएंगे। बजट की मांग होगी, जहां भी हैंडपंप खराब होंगे। पुन: दुरुस्त करवाए जाएंगे। पेयजल की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। -आरबी राम अधिशासी अभियंता जल निगम
100 से अधिक हैंडपंप रिबोर लायक
नगरपालिका परिसर में लगा हैंडपंप खराब पड़ा है। इसके सामने ही कुछ दूरी पर तहसील के निकट लगा हैंडपंप भी पानी नहीं दे रहा है। शहर के 31 वार्डो में लगभग 285 हैंडपंप स्थापित हैं। लेकिन इनमें 100 से अधिक रिबोर के लायक हैं। शहर के मोहल्ला बरहियापुरा निवासी भानु कश्यप और सुशील का कहना है कि साफ पेयजल की आपूर्ति सबसे बड़ी समस्या है। कचेहरी रोड निवासी आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि पानी की जरुरत को पूरा करना सबसे अहम है। इस पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
नानपारा में भी बदहाल है स्थिति
नानपारा में 225 खराब पड़े हैं। जिसमें 110 रिबोर लायक है। गनेशपुर गांव निवासी दरबारी लाल, जैतापुर निवासी अवधेश, बाबागंज निवासी सरोज मिश्रा ने कहा कि गांवों में हैंडपंप खराब होने से पानी की दिक्कत होती है। इसकी शिकायत गांव से लेकर जिला स्तर तक की जा चुकी है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
महसी में भी समस्या
महसी के एरिया क्षेत्र के ही 86 में से 35 हैंडपंप रिबोर लायक है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जलनिगम को कई बार पत्र भेजा गया है। इसको लेकर अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए। गर्मी बढ़ने से गांव में पानी का संकट बढ़ गया है।
550 हैंडपंप होने हैं रिबोर
कैसरगंज तहसील क्षेत्र में 550 हैंडपंप रिबोर की स्थिति में हैं। तहसील कैसरगंज के ग्राम परशुरामपुर किला निवासी मनोज, राजन और रेहान का कहना है कि गांवों में पेयजल संकट बढ़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार को अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करनी चाहिए।