{"_id":"956c6812787fa5565edfb9a1392fd283","slug":"sugarcane-farmers-yet-not-recieved-93-crore-rupees-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों का 93 करोड़ 48 लाख रुपये फंसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों का 93 करोड़ 48 लाख रुपये फंसे
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 09 Jul 2015 10:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। दब कर कर्ज के बोझ से उसने मौत की कर ली तैयारी है, धरती पुत्र किसान का जीवन अब उस पर ही भारी है...। मो. हनीफ अंकुर की ये पंक्तियां किसानों की दशा पर सटीक बैठती हैं।
चिलवरिया व नानपारा मिल ने हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखाया है। किसानों का 93 करोड़ 48 लाख 63 हजार रुपया मिलों में फंसा हुआ है।
प्रशासन भी भुगतान करा पाने में नाकाम साबित हुआ है। फिलहाल, जिला गन्ना अधिकारी ने चीनी मिलों के जिम्मेदारों को नोटिस देकर स्पष्टीकरण तलब किया है।
हाईकोर्ट ने 27 मई 2015 को किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के संबंध में आदेश जारी किया था। चीनी मिलों को तीन चरणों में अवशेष धनराशि का 75 फीसदी भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे।
जिसके मुताबिक 15 जून 2015 तक 25 फीसदी, 30 जून 2015 तक 25 फीसदी और 15 जुलाई 2015 तक 25 फीसदी धनराशि का भुगतान करना है। जबकि अवशेष 25 फीसदी धनराशि के भुगतान के संबंध में 28 जुलाई को हाईकोर्ट की सुनवाई में फैसला लिया जाना है।
विज्ञापन
पहले चरण में ही सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया व श्रावस्ती सहकारी शुगर मिल नानपारा ने हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा दिया है।
सिर्फ आईपीएल शुगर मिल जरवल रोड व पारलेजी परसेंडी मिल भुगतान कर पाने में सफल हो सकी हैं। चिलवरिया पर 70 करोड़ 59 हजार रुपये की बकाएदारी है, जबकि नानपारा मिल पर 23 करोड़ 48 लाख चार हजार रुपये बकाया है।
ऐसे में भुगतान न होने से जहां न्यायालय की अवमानना हुई है, वहीं, भुगतान के अभाव में किसान परेशान हैं। आगामी खेती की तैयारी भी आर्थिक तंगी के चलते प्रभावित है।
फिर संकट में किसान
चीनी मिलों के रवैये से परेशान होकर पिछले तीन साल से किसानों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ रहा है।
इस पेराई सत्र में किसानों का अभी भी मिलों पर 93 करोड़ अरब 48 लाख 63 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया रह गया है। अब कोर्ट के आदेश को मिलों द्वारा ठेंगा दिखाए जाने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है।
भुगतान के लिए दिया नोटिस
जिला गन्ना अधिकारी राम किशन ने बताया कि चिलवरिया व नानपारा मिल के अध्यासियों को बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए नोटिस दिया गया है। उम्मीद है कि नानपारा मिल जल्द भुगतान शुरू करेगी।
विज्ञापन
चिलवरिया व नानपारा मिल ने हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखाया है। किसानों का 93 करोड़ 48 लाख 63 हजार रुपया मिलों में फंसा हुआ है।
प्रशासन भी भुगतान करा पाने में नाकाम साबित हुआ है। फिलहाल, जिला गन्ना अधिकारी ने चीनी मिलों के जिम्मेदारों को नोटिस देकर स्पष्टीकरण तलब किया है।
हाईकोर्ट ने 27 मई 2015 को किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के संबंध में आदेश जारी किया था। चीनी मिलों को तीन चरणों में अवशेष धनराशि का 75 फीसदी भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे।
विज्ञापन
जिसके मुताबिक 15 जून 2015 तक 25 फीसदी, 30 जून 2015 तक 25 फीसदी और 15 जुलाई 2015 तक 25 फीसदी धनराशि का भुगतान करना है। जबकि अवशेष 25 फीसदी धनराशि के भुगतान के संबंध में 28 जुलाई को हाईकोर्ट की सुनवाई में फैसला लिया जाना है।
विज्ञापन
पहले चरण में ही सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया व श्रावस्ती सहकारी शुगर मिल नानपारा ने हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा दिया है।
सिर्फ आईपीएल शुगर मिल जरवल रोड व पारलेजी परसेंडी मिल भुगतान कर पाने में सफल हो सकी हैं। चिलवरिया पर 70 करोड़ 59 हजार रुपये की बकाएदारी है, जबकि नानपारा मिल पर 23 करोड़ 48 लाख चार हजार रुपये बकाया है।
ऐसे में भुगतान न होने से जहां न्यायालय की अवमानना हुई है, वहीं, भुगतान के अभाव में किसान परेशान हैं। आगामी खेती की तैयारी भी आर्थिक तंगी के चलते प्रभावित है।
फिर संकट में किसान
चीनी मिलों के रवैये से परेशान होकर पिछले तीन साल से किसानों को कोर्ट की शरण में जाना पड़ रहा है।
इस पेराई सत्र में किसानों का अभी भी मिलों पर 93 करोड़ अरब 48 लाख 63 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया रह गया है। अब कोर्ट के आदेश को मिलों द्वारा ठेंगा दिखाए जाने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है।
भुगतान के लिए दिया नोटिस
जिला गन्ना अधिकारी राम किशन ने बताया कि चिलवरिया व नानपारा मिल के अध्यासियों को बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए नोटिस दिया गया है। उम्मीद है कि नानपारा मिल जल्द भुगतान शुरू करेगी।